नेपाल में मधेसियों और सरकार के बीच छिड़ी जंग जल्द खत्म होती नहीं दिख रही. मधेसियों ने उस तीन सूत्री प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया है जो सरकार ने सोमवार शाम उनके सामने रखा था. उनका साफ़ तौर पर कहना है कि सीमांकन से संबंधित मुद्दा तुरंत हल होना चाहिए. सरकार ने इस मुद्दे को अगले तीन महीने में हल करने की बात कही थी. मधेसी मोर्चा के नेता उपेन्द्र यादव का कहना है कि भले ही इस प्रस्ताव की हर जगह तारीफ़ हो रही हो लेकिन इसमें कुछ नया नहीं है. उनके अनुसार, संविधान संशोधन से जुडी उनकी जो मांगे हैं वे इस प्रस्ताव से पूरी नहीं होतीं. इसके साथ ही मधेसियों ने अपने आंदोलन को और तेजी से बढाने की घोषणा कर दी है.
दरअसल, सोमवार को नेपाल सरकार ने मधेसियों के सामने तीन बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव रखा था. इसमें सरकार ने समानुपातिक प्रतिनिधित्व, निर्वाचन क्षेत्र के परिसीमन और नागरिकता से संबंधित संशोधन की बात कही थी. इसके अलावा सरकार ने यह भी कहा था कि प्रदेशों के सीमांकन को तीन महीने के अंदर एक उच्च स्तरीय राजनीतिक प्रक्रिया के ज़रिए हल किया जाएगा. नेपाल ने नया संविधान लागू होने के बाद से ही इसमें खुद की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मधेशियों ने आंदोलन छेड़ा हुआ है.


'पाकिस्तान ने आतंकवाद को रोकने के लिए दुनियाभर से ज्यादा प्रयास किए हैं. हमने और हमारी सेना ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बाकी देशों से ज्यादा त्याग भी किया है.'

मोहम्मद आसिफ, पाकिस्तानी रक्षामंत्री
एक पाकिस्तानी समाचार पत्र से बातचीत में



इराकी सेना ने रमादी शहर को आईएस के चंगुल से मुक्त कराया
इराकी सेना को काफी अरसे बाद एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. इराक की सेना ने वहां के प्रमुख शहर रमादी को आईएस के कब्जे से मुक्त करा लिया है. इराकी सेना के प्रवक्ता के अनुसार, वहां की सेना और अमेरिकी वायु सेना की मदद से रमादी के रिहायसी इलाकों से आईएस के लड़कों को खदेड़ दिया गया है. हालांकि उनका कहना है कि अभी भी शहर में कई आईएस लड़ाकों के छिपे होने की आशंका को देखते हुए वहां आम नागरिकों के जाने पर पाबंदी लगी रहेगी. इराक की राजधानी बग़दाद से क़रीब 90 किलोमीटर दूर स्थित रमादी शहर पर मई महीने में आईएस ने कब्जा कर लिया था.
चीन दक्षिण चीन सागर पर अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट का फैसला नहीं मानेगा
चीन ने दक्षिण चीन सागर को लेकर एक बार फिर आवाज तेज कर दी है. उसने इस मामले में संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट का फैसला खारिज करते हुए कहा है कि वह इस मामले में दिए गए कोर्ट के फैसले को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार दक्षिण चीन सागर चीन का क्षेत्र है इसलिए इस क्षेत्र में किसी तरह का निर्णय लेने का अधिकार सिर्फ उसे ही है. प्रवक्ता का कहना था कि दूसरे लोगों या संगठनों को इसमें दखल देने का अधिकार नहीं है. चीन ने यह घोषणा भी की है कि अमेरिकी बमवर्षक विमानों के इस क्षेत्र में आने के बाद वह इस क्षेत्र में फिर सैन्यीकरण बढ़ाएगा. दरअसल, इस विवादित क्षेत्र के कुछ हिस्से पर अपने अधिकार की बात कहते हुए फिलीपीन्स ने हेग स्थित अन्तराष्ट्रीय कोर्ट में मामला दर्ज कराया था. इसके बाद कोर्ट ने चीन के क्षेत्रीय संप्रभुता के दावे को खारिज करते हुए इस पर सुनवाई करने का फैसला किया था.