रूस सीरिया में आईएस पर जो हवाई हमले कर रहा है उनमें बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिक भी मारे जा रहे हैं. मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन हमलों में कम से कम 200 नागरिकों की मौत हुई है. एमनेस्टी का कहना है कि उसने यह रिपोर्ट 30 सितंबर से 29 नवंबर के बीच सीरिया के पांच शहरों में हुए 25 से अधिक रूसी हमलों की गहन छानबीन के बाद तैयार की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस ने सीरिया में अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानूनो बड़ा उल्लंघन किया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक़, रूसी अधिकारियों ने सीरिया में मस्जिदों, अस्पतालों और नागरिकों के उन आवासीय क्षेत्रों पर भी अंधाधुंध बमबारी की जहां आईएस लड़ाकों के छिपे होने की कोई संभावना ही नहीं थी.
वहीं इस रिपोर्ट के आने के बाद एमनेस्टी के निदेशक फिलिप लूथर का कहना है कि वे इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि सीरिया में रूस के कौन से हमले युद्ध अपराधों के दायरे में आ सकते हैं. उधर, रूस ने एमनेस्टी की इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा है कि उसकी कार्रवाई में किसी तरह के मानवीय कानूनों को नहीं तोडा गया है. साथ ही उसने इस रिपोर्ट को एक कल्पना मात्र बताया है.
सऊदी अरब में श्रीलंकाई महिला को 'पत्थर मार कर मौत' की सजा ख़त्म की गयी
श्रीलंका और सऊदी अरब के बीच एक महिला की मौत की सजा को लेकर लंबे समय से चल रहा गतिरोध समाप्त हो गया है. श्रीलंकाई विदेश मंत्रालय का कहना है कि सऊदी अरब में एक श्रीलंकाई महिला को दी गई पत्थर मार कर मौत की सज़ा को हटा दिया गया है. मंत्रालय के अनुसार, सऊदी कोर्ट ने मामले की दोबारा सुनवाई करते हुए पाया कि इस्लामी सरिया कानून के मुताबिक अगर महिला के द्वारा किये गए अपराध के चार प्रत्यक्षदर्शी होते तभी उसे मौत की सजा दी जा सकती थी. जबकि इस मामले में ऐसा नहीं था जिसके बाद कोर्ट ने मौत की सज़ा हटाते हुए महिला को जेल में रखने को कहा है. अप्रैल 2014 में इस श्रीलंकाई महिला को एक अविवाहित व्यक्ति से अवैध संबंध बनाने को लेकर मौत की सजा सुनाई गयी थी. सऊदी अदालत का कहना था कि उसे तब तक पत्थर मारे जाएं जब तक वह मर न जाए. इस फैसले का श्रीलंका में काफी विरोध होने बाद वहां की सरकार ने इस सजा के खिलाफ अपील की थी.
मुशर्रफ ने खुद को निर्दोष बताया, कहा, आपातकाल के लिए तत्कालीन जनरल कयानी जिम्मेदार
2007 में पाकिस्तान में आपातकाल लगाने को लेकर राजद्रोह के आरोपों का सामना कर रहे परवेज मुशर्रफ ने इस मामले में एक बड़ा खुलासा किया है. उनका कहना है कि पाकिस्तान में आपातकाल की घोषणा से पहले उन्होंने तत्कालीन जनरल परवेज कयानी और प्रधानमंत्री शौकत अजीज से इस बारे में मशविरा किया था और इन लोगों के कहने पर ही उन्होंने इस आपातकाल की घोषणा की थी. मुशर्रफ ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एफआईए) को दिए बयान में आपातकाल के लिए इन दोनों को जिम्मेदार बताते हुए अपने आप को निर्दोष करार दिया है. बता दें कि मुशर्रफ ने तीन नवंबर 2007 को पाकिस्तान में आपातकाल की घोषणा की थी जिसके लिए उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जा रहा है. वहीं, इस मामले में मुशर्रफ ने पहली बार किसी और को भी जिम्मेदार ठहराया है.