हमारे समय की फिल्मों में कुछ ऐसी रियल लाइफ नायिकाएं भी हैं जो घिसे-पिटे दकियानूसी मानकों का ‘क’ निकालकर अपना और फिल्म जगत का मान बढ़ा रही हैं
आज बात उम्र और जेंडर को लेकर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की असहिष्णुता की. हमारी फिल्म इंडस्ट्री ने अभिनेता और अभिनेत्रियों की उम्र के लिए अलग-अलग मानक तय कर रखे हैं जो रिग्रेसिव तो हैं ही, कभी-कभी पाषाणकालीन होने की बू भी छोड़ते हैं. हम सब इस भेदभाव को भलीभांति जानते-समझते हैं. हमारे यहां पचास का नायक पचास का नहीं माना जाता और अभिनेत्रियों को पैंतीस-चालीस का जीवनसाथी ढूंढ़कर तीस की उम्र तक शादी करने की सलाह पच्चीस के आस-पास से ही दी जाने लगती है.
हमारी नायिकाओं को ऐसा करने की हिदायत दी जाती है, क्योंकि माना जाता है कि फिल्मों में उन्हें नायिका के रोल मिलना तीस की लक्ष्मण रेखा के पार मुमकिन नहीं है. इस सोच को बरसों की मेहनत और काबिल चतुराई से कुछ इस तरह अभिनेत्रियों के मानस में गढ़ दिया गया है कि अनेकों अभिनेत्रियां ऐसा ही करती भी हैं. तीस के करीब आते-आते किसी सफल उद्यमी/अभिनेता/राजकुमार/क्रिकेटर/राजनेता से ब्याह रचा रघुवीर सहाय की कविता ‘पढ़िए गीता, बनिए सीता’ को सच करने निकल पड़ती हैं. अभिनय छोड़-छाड़कर.
समानता की दीवानी दुनिया में 50 के समानांतर 50 को ही खड़ा होना चाहिए लेकिन फिल्म इंडस्ट्री की फितरत समझने वाले जानते हैं कि यहां 50 के सामने 30 पार की महिलाओं का खड़ा होना भी कम क्रांतिकारी नहीं है
लेकिन, और यह लेकिन लिखने में हमें खासी खुशी महसूस हो रही है, कि हमारे इस समय में कुछ रियल लाइफ नायिकाएं हैं जो इन घिसे-पिटे दकियानूसी मानकों का ‘क’ निकालकर अपना मान बढ़ा रही हैं. वे उम्र की इस लक्ष्मण रेखा को न सिर्फ आगे खिसका रहीं हैं बल्कि तमाम दूसरी बंदिशों को भी सिरे से नकार रहीं हैं. वे तीस पार की होकर भी ठीक उसी रॉकस्टार अंदाज में फिल्म इंडस्ट्री और दर्शकों पर छाई हुईं हैं जैसे 50 की होकर खान त्रयी छाई हुई है. हालांकि किसी समानता की दीवानी दुनिया में 50 के समानांतर 50 को ही खड़ा होना चाहिए लेकिन हमारी फिल्म इंडस्ट्री की फितरत को समझने वाले जानते ही हैं कि यहां 50 के सामने 30 पार की महिलाओं का खड़ा होना भी कम क्रांतिकारी नहीं है.
हमारे यहां महिला प्रधान मनोरंजक फिल्में कम बन पाती हैं, और स्ट्रांग महिला किरदारों वाली फिल्मों का कुछ यूं अकाल पड़ा रहता है कि हमें ‘एंग्री इंडियन गाडेस’ जैसी फिल्मों को नारीवादी फिल्म कहने पर मजबूर होना पड़ता है. जबकि इस फिल्म के ट्रेलर में नायिकाएं वही करती नजर आती हैं जिन लंपट और छिछोरी हरकतों के लिए हम लड़कों की वाजिब आलोचना हमेशा से करते रहे हैं. लेकिन हमारे इस समय में भी हिंदी फिल्मों के पास पांच ऐसी अभिनेत्रियां हैं जो 30 पार की होकर भी सिर्फ अपने दम पर इंडस्ट्री और दर्शकों के बीच आज भी वैसे ही छाई हुईं हैं जैसे अपनी जवानी के दिनों में शीर्ष पर होकर छाया करतीं थीं. और हां, इन पांच में से दो 40 पार की भी हैं!
सबसे पहले बात कर लेते हैं विद्या बालन की. हमारे समय की वो अभिनेत्री जो अच्छी फिल्म और बढ़िया लिखा किरदार मिलने पर अभिनय को उस ऊंचाई पर ले जाती हैं जहां पर उसे उचक-उचककर छूना भी समकालीन अभिनेत्रियों के बस की बात नहीं. विद्या को हमेशा ही उनके बढ़ते वजन और बढ़ती उम्र पर फब्तियों का सामना करना पड़ा है, लेकिन मौका मिलते ही उन्होंने जवाब तगड़ा ही दिया है. अभी हाल ही में उन्होंने खुद जिक्र कर यह बता भी दिया कि वजन और उम्र की बात आने पर उनके जैसी सफल और स्थापित अभिनेत्री के लिए भी फिल्म इंडस्ट्री क्रूर ही रहती है. तब, जब उन्ही के शब्दों में एक बेहद सीनियर एक्टर ने उनसे कहा, ‘बहुत मोटी हो गई हो’.
विद्या को हमेशा ही उनके बढ़ते वजन और बढ़ती उम्र पर फब्तियों का सामना करना पड़ा है, लेकिन मौका मिलते ही उन्होंने जवाब तगड़ा ही दिया है
विडंबना देखिए, ये वाकया उन्होंने तब शेयर किया जब एक पैनल डिस्कशन में आईं आस्कर-नामित मशहूर अमेरीकी फिल्म ‘सेलमा’ की निर्देशिका ने कहा कि अगर उन्हें कभी जेम्स बांड पर फिल्म बनाने का मौका मिला तो उसमें वे विद्या बालन को बांड गर्ल लेना चाहेंगी. एक अमेरीकी निर्देशक हिंदुस्तान आकर हमेशा से सुंदरता और मादकता का मिश्रण रही बांड गर्ल के लिए विद्या बालन को लेना चाहती है, और हमारी इंडस्ट्री अभी भी उस अभिनेत्री के वजन और उम्र को लेकर फब्तियां कसने से बाज नहीं आती. कमाल है!
37 वर्षीय विद्या भले अभी भगवान दादा पर बन रही मराठी फिल्म ‘एक अलबेला’ में गीता बाली का किरदार निभाने के अलावा कोई और फिल्म नहीं कर रही हों, और न ही उन्होंने पिछले दो सालों में किसी खास फिल्म में काम ही किया है, लेकिन उनका नाम जिन भी फिल्मों से हाल-फिलहाल जुड़ा है या जुड़ा होने की अफवाह है, वे सभी उम्मीद पैदा करने वाली फिल्में हैं. उनका नाम इस तरह के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स से जुड़ना ही बता देता है कि अभी भी इंडस्ट्री के लिए वे कितनी बहुमूल्य अभिनेत्री हैं. बात चाहे बेनजीर भुट्टो, इंदिरा गांधी, सुचित्रा सेन, एमएस सुब्बलक्ष्मी, लेखिका कमला सुरैय्या जैसी शख्सियतों पर बनने वाली ढेर सारी बायोपिक की हो जिसमें निर्देशक विद्या को लेना चाहते हैं, या फिर उनकी ‘कहानी’ के निर्देशक सुजाय घोष की ‘दुर्गा रानी सिंह’ की, विद्या बालन इनमें से जिस भी फिल्म से आने वाले वक्त में जुड़ेंगी, कमाल ही करेंगी.
ठीक वैसे ही जैसे 33 वर्षीय प्रियंका चोपड़ा इन दिनों विदेशी धरती पर कर रही हैं. क्वांटिको को अगर हम समीक्षा के डोमेन से बाहर रखकर बात करें तो प्रियंका चोपड़ा के लीड रोल वाला यह अमेरिकी शो टीआरपी के डोमेन में जवर्दस्त कमाल कर रहा है. क्वांटिको अमेरीकी लोगों द्वारा इस कदर पसंद किया जा रहा है कि एक तो इसका पहला सीजन ही अब 22 एपीसोड का होने वाला है, और दूसरा प्रतिष्ठित अमेरीकी ‘पीपल्स चाइस अवार्ड्स’ को नयी टीवी सीरीज में पसंदीदा अभिनेत्री वाली कैटेगरी में प्रियंका चोपड़ा को नामित भी करना पड़ा है.
एक 30 पार की भारतीय अभिनेत्री हालीवुड में उपलब्धियों का भंडार लगा रही है और बॉलीवुड में भी भंसाली की ‘बाजीराव मस्तानी’ और प्रकाश झा की ‘जय गंगाजल’ से अभिनय की एक समानांतर रेलगाड़ी तेज रफ्तार से चला रही है
यह भी खबर है कि क्वांटिको बनाने वाले एबीसी नेटवर्क के लिए प्रियंका एक अमेरीकी टॉक शो भी होस्ट करने वाली हैं और अब एक बेहतर अमेरिकी एजेंट उनका हॉलीवुड फिल्म करियर भी संवारने वाला है. एक 30 पार की भारतीय अभिनेत्री हालीवुड में उपलब्धियों का भंडार लगा रही है और बॉलीवुड में भी भंसाली की ‘बाजीराव मस्तानी’ और प्रकाश झा की ‘जय गंगाजल’ से अभिनय की एक समानांतर रेलगाड़ी तेज रफ्तार से चला रही है तो ये बहुत बड़ी बात है.
इस बिना क्रम वाली सूची की तीसरी बड़ी अभिनेत्री करीना कपूर भले ही प्रियंका चोपड़ा की तरह तेज रफ्तार न चलकर अपनी मनमौजी रफ्तार से चलती हों, और दुनिया की परवाह कम करती हों, लेकिन अभी भी 35 वर्षीय यह नायिका उतनी ही खूबसूरत और अभिनय की ऊर्जा से भरपूर नजर आती है जैसी वो ‘जब वी मेट’ के समय आया करती थी. उनके चेहरे पर निखार दिव्य रूप से बढ़ा है और पुरानी वाली हड़बड़ी हटी है. वैसे तो प्रशंसक होने के बावजूद मौका मिलने पर हम उनकी आलोचना भी भरपूर करते रहे हैं, लेकिन उनकी आने वाली अभिषेक चौबे की ‘उड़ता पंजाब’ और आर बाल्की की ‘की एंड का’ लगता है हमें आगे उनकी आलोचनाओं के मौके कुछ कम देने वाली हैं.
शादी के बाद भी करीना की बेफ्रिकी और अपनी रफ्तार और मर्जी से फिल्में करने का साहस ये भी बता रहा है कि इंडस्ट्री बदल तो रही है, लेकिन ऐसे बदलाव के लिए उसे ऐसी मजबूत महिलाओं की भी जरूरत है जो असल जिंदगी में भी नायिका कहलाएं. करीना कपूर की तरह. करीना को बस फिल्में चुनने में सजग रहना होगा, क्योंकि जितना उनमें पोटेनशियल है, उतने में वे ऐश्वर्या राय जितना लंबा करियर आसानी से बना सकती हैं.
दुनिया की परवाह न करने वाली 35 वर्षीय यह नायिका अभी भी उतनी ही खूबसूरत और अभिनय की ऊर्जा से भरपूर नजर आती है जैसी ‘जब वी मेट’ के समय आया करती थी
इसी के साथ अब ऐश्वर्या राय बच्चन की बात कर लेते हैं, जिन्होंने सिर्फ 30 ही नहीं पार किया बल्कि 43 की होकर भी अपने करियर में दर्शकों की रूचि को अभी तक बनाए रखने का गजब हुनर भी पाया है. उन्होंने भी उम्र को वैसे ही धता बताया है जैसे खान त्रयी ने. भले ही ‘जज्बा’ से हुई उनकी वापसी हमारे जहन में जज्ब होने में नाकाम रही लेकिन इस फिल्म को देखते वक्त हमेशा उनकी खूबसूरती – जो अब एवरग्रीन हो चली है - पर ही अचरज की मारी हमारी नजरें टिकी रहीं. अभिनय तो वे हमेशा ही औसत करती हैं लेकिन अपनी जबरदस्त स्क्रीन-प्रजेंस से इस कमी को पूरी करने की कोशिश लगातार करती हैं. इस पर भी ध्यान देना चाहिए कि मेहनताने के प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल का फायदा बॉलीवुड में दीपिका जैसी इक्का-दुक्का टॉप हीरोइनों को छोड़कर अभी तक सिर्फ मेल सुपरस्टार ही उठाया करते थे. पांच साल बाद वापसी करने के बावजूद ऐश्वर्या ने न सिर्फ ‘जज्बा’ के निर्माता-निर्देशक को इसके लिए राजी कर लिया बल्कि इससे खासा मुनाफा भी कमा लिया.
इस साल शाहरुख खान के जन्मदिन से एक दिन पहले 1 नवंबर को 43 की हुईं ऐश्वर्या इस वक्त रणबीर कपूर के साथ करण जौहर की ‘ऐ दिल है मुश्किल’ शूट कर रही हैं, सरबजीत पर बनी बायोपिक - जिसमें वे सरबजीत की बहन का किरदार कर रहीं हैं - को कान ले जाने की तैयारी कर रहीं हैं, सुजॉय घोष के साथ फिल्म करने की घोषणा वे पहले ही कर चुकी हैं औऱ रोहित शेट्टी की अगली फिल्म में उनके शाहरुख के साथ होने की अफवाह भी हवा में तैर रही है. हमें ये भी उम्मीद है कि वे आगे ‘रेनकोट’ जैसा भी कुछ जरूर ही करेंगी. जाहिर है, उम्र को अपनी उंगलियों पर नचाने में वे अपनी समकालीन अभिनेत्रियों से मीलों आगे हैं, और अगर चाहें तो सिर्फ उनका आदर्श लेकर भी वर्तमान समय की कई सक्षम अभिनेत्रियां बॉलीवुड द्वारा निर्धारित उम्र की लक्ष्मण रेखा को थोड़ा आगे खिसका सकती हैं.
तब्बू एक ऐसी अभिनेत्री हैं जिनसे हम इस तरह की बोझ डालती उम्मीद तब भी करेंगे जब वे अमिताभ बच्चन की उम्र की हो जाएंगी
आखिरी नाम इस सूची में हमारी पसंदीदा अभिनेत्री तब्बू का है जिन्हें हम कभी ‘मकबूल’ के उनके किरदार निम्मी तो कभी ‘हैदर’ की गजाला के नाम से भी याद करते रहते हैं. वे इसी 4 नवंबर को 44 की हुईं हैं और हमारी नजर में पिछले साल की सर्वश्रेष्ठ फिल्म ‘हैदर’ (हमारी नजर में ‘क्वीन’ से भी बेहतर एक फिल्म) के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार जरूर मिलना चाहिए था. नहीं मिला, लेकिन आने वाले भविष्य में किसी फिल्म के लिए एक बार फिर जरूर मिलेगा, क्योंकि वे ऐसी अभिनेत्री हैं जिनसे हम इस तरह की बोझ डालती उम्मीद तब भी करेंगे जब वे अमिताभ बच्चन की उम्र की हो जाएंगी.
इस सूची में हम 41 की हो चुकीं काजोल का नाम भी जोड़ना चाहते थे, लेकिन अति की प्रतिभावान ये अभिनेत्री पिछले कुछ सालों में काम इतना कम कर रही हैं, और जब भी कर रही हैं अपने ‘कंफर्ट जोन’ से बाहर आ ही नहीं रही हैं, कि हमें यह सूची यहीं समाप्त करनी पड़ रही है.
लेकिन इस तरह की सूची की इतिश्री यहीं नहीं होती, होनी चाहिए भी नहीं. आने वाले दो-तीन-चार सालों में दीपिका पादुकोण, कंगना रनोट, अनुष्का शर्मा जैसी कई अभिनेत्रियां 30 के पार की होने वाली हैं. इनमें से कुछ उतनी ही प्रतिभावान हैं जितनी अभी की ये पांच अभिनेत्रियां. इसलिए मजा आएगा, आने वाले वक्त में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उम्र की लक्ष्मण रेखा को न सिर्फ आगे खिसकते हुए देखने में, बल्कि उस ख्वाब को भी पूरा होते हुए देखने में जिसमें उम्र की दकियानूसी लक्ष्मण रेखा धुंधली हो-होकर पूरी तरह खत्म हो जाएगी. शायद!