जीतनराम मांझी और शरद यादव
जीतनराम मांझी और शरद यादव
दिल्ली में चुनाव प्रचार खत्म हुआ और बिहार में कुर्सी का खेल शुरू हो गया. अगर देश के किसी राज्य के नेताओं को सबसे ज्यादा दिल्ली के चुनावी नतीजों का इंतजार है तो वह बिहार ही है. जेडीयू नेताओं की मानें तो बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर जीतनराम मांझी सिर्फ कुछ ही दिनों के मेहमान हैं. अगर नीतीश कुमार के कैंप के नेताओं की मानें तो सिर्फ दो दिन और.
सूत्रों के मुताबिक जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव ने जीतनराम मांझी को कुर्सी छोड़ने के लिए कह दिया है. आज उन्होंने मांझी से अकेले में फिर से मुलाकात कर यह बात कही. मांझी को मनाने के लिए उन्हें कुछ ऑफर भी दिए गये. उनसे कहा गया कि पद छोड़ने के एवज में पार्टी उनका और उनके परिवार के भविष्य का पूरा ख्याल रखेगी. वे जेडीयू में आला नेताओं में शामिल होंगे और उन्हें उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है. इसके अलावा उनके बेटे या बेटी में से भी किसी को मंत्री बनाया जा सकता है. लेकिन लेकिन मांझी इस्तीफा देने को तैयार नहीं हुए. उनका कहना था कि नीतीश सार्वजनिक तौर पर कहें कि वे मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं, तभी वे इस्तीफा देंगे. नीतीश कैंप ने मांझी की शर्त को मानने से इनकार कर दिया. इसके बाद उन्हें कुर्सी से हटाने के लिए सात तारीख को जनता दल-यूनाइटेड के विधायकों की मीटिंग बुलाई गई. मांझी ने पूरा खेल एक बार फिर पलट दिया. उन्होंने शरद यादव के फैसले पर ही सवाल खड़े कर दिए. मांझी ने प्रेस रिलीज़ जारी कर बयान दिया कि शरद यादव को विधायक दल की बैठक बुलाने का अधिकार ही नहीं है. यह हक तो मुख्यमंत्री का है.
मांझी को मनाने के लिए उन्हें कुछ ऑफर भी दिए गये. उनसे कहा गया कि पद छोड़ने के एवज में पार्टी उनका और उनके परिवार के भविष्य का पूरा ख्याल रखेगी.
जानकारों के अनुसार अगले कुछ घंटे शरद यादव पूरी कोशिश करेंगे कि मांझी मान जाएं. हालांकि इसकी उम्मीद अब न के बराबर है. अगर शनिवार शाम चार बजे तक मांझी ने इस्तीफा नहीं दिया तो उन्हें सीएम की कुर्सी से हटाया जा सकता है और नीतीश फिर से विधायक दल के नेता चुने जा सकते हैं. अब यह नीतीश कुमार को तय करना होगा कि वे ऐसे माहौल में फिर नेता बनेंगे या नहीं.
उधर मांझी ने भी पलटवार की तैयारी कर ली है. वे मन बना चुके हैं कि अपने मंत्रिमंडल में मौजूद नीतीश के सबसे करीबी चार मंत्रियों को बर्खास्त कर देंगे. वे इस बात पर अड़े हैं कि यदि मैं नहीं तो फिर कोई और भी नहीं. मांझी कैंप की बात करें तो इसमें पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के बेटे नीतीश मिश्र हैं जो पूरी तरह से उनको सपोर्ट कर रहे हैं. नीतीश कुमार के कुछ विरोधी नेताओं का भी साथ मांझी को है. इसके अलावा भाजपा भी उन पर तरह-तरह से डोरे डाल रही है. राज्य के राज्यपाल एक खांटी भाजपाई केसरीनाथ त्रिपाठी हैं. ऐसे में अगर जीतनराम मांझी बिहार विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव दे देते हैं तो वह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी. और बिहार साल के अंत की बजाय बीच में ही चुनाव के रास्ते पर बढ़ सकता है. अगले कुछ घंटे बिहार की सियासत में आर-या-पार वाले हैं. और मंझधार में बिहार के लोग हैं.