प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अचानक पाकिस्तान दौरे की भले ही पूरी दुनिया में सराहना हो रही हो, लेकिन इससे मुंबई हमले का मास्टरमाइंड हाफिज सईद तिलमिला गया है. उसने पीएम मोदी के पाकिस्तान दौरे और वहां हुए उनके भव्य स्वागत की जमकर आलोचना की है. सईद का कहना है कि मोदी का पाकिस्तान में स्वागत सत्कार देखकर आज वे कश्मीरी रो रहे हैं जो पाकिस्तान को अपना सबसे बड़ा हमदर्द मानते हैं. उसने मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, 'यह वही मोदी है, जिसने कुछ दिन पहले बांग्लादेश जाकर पाक को तोड़ने का ऐलान किया था और यह एक ऐसा शख्स है जो पाकिस्तान में आतंक फैलाने के लिए कोई मौका नहीं जाने देता.' सईद ने इन सारी चीजों को तकलीफदेह बताते हुए नवाज शरीफ से सफाई देने की भी मांग की है.
हालांकि, हाफिज सईद के दावे के उलट कश्मीर के अलगाववादी नेता मीरवाईज उमर फारुख और सैयद अली शाह गिलानी ने मोदी के इस कदम की सराहना की है. उनका कहना है कि यह भारतीय प्रधानमंत्री का एक सकारात्मक कदम है. बीते शुक्रवार को अफगानिस्तान से लौटते वक्त नरेंद्र मोदी नवाज शरीफ का निमन्त्रण स्वीकार कर उनकी नातिन की शादी में शरीक होने पाकिस्तान चले गए थे.
नेपाल सरकार से निपटने के लिए मधेसियों ने हथियार उठाये
नेपाल में मधेसियों ने सरकार से आर-पार की लड़ाई करने की ठान ली है. ख़बरों के मुताबिक, नेपाल के रूपनदेह जिले के घने जंगलों में करीब चार सौ मधेसी युवकों को हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. मधेसी महागठबंधन के रूपन देह जिले के अध्यक्ष संतोष पाण्डेय ने इस बात का खुलासा किया है. संतोष के अनुसार प्रशिक्षण लेने वाले 22 जिलों के ये लड़ाके सरकार और सुरक्षा बलों की नींद उड़ाने वाले हैं.' उनके मुताबिक, 'सरकार ने पिछले चार महीनों में मधेसियों पर जमकर अत्याचार किये जिसके चलते 50 से ज्यादा मधेसी मारे गए. लेकिन अब हम ईंट का जबाब पत्थर से देने को तैयार हैं.' वहीं, इस सूचना के बाद नेपाल सहित भारत की जांच एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं. इस के चलते भारतीय सीमा सुरक्षा बल ने अलर्ट जारी कर भारत-नेपाल सीमा पर 24 घंटे गश्त के आदेश जारी कर दिए हैं.
प्रदूषण के चलते चीन ने 17000 फैक्ट्रियां बंद कीं
चीन की सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए एक बड़ा फैसला किया है. इसके तहत सरकार ने शनिवार से देश की सत्तरह हजार फैक्ट्रियां पूरी तरह से बंद कर दी हैं और अठाईस हजार से ज्यादा को अस्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया गया है. चीन के पर्यावरण मंत्रालय ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि पिछले दिनों हुई एक जांच में पाया गया था कि ये सभी फैक्ट्रियां तय सीमा से ज्यादा प्रदूषण फैला रही हैं. हालांकि, मंत्रालय ने यह भी माना है कि इससे देश की उत्पादन क्षमता पर काफी फर्क पड़ेगा, लेकिन उसके मुताबिक सरकार लोगों की सेहत को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती.
खबरों के मुताबिक चीन के इस फैसले पर पहुंचने के पीछे एक हॉटलाइन की अहम भूमिका है. सितंबर में शुरू हुई इस हॉटलाइन के जरिये बारह हजार से ज्यादा लोगों ने प्रदूषण को लेकर अपनी शिकायतें दर्ज करायी थीं. इन शिकायतों के आधार पर सरकार ने पांच सौ से ज्यादा जांच टीमें देश भर में भेजी थीं. इसके बाद चीनी सरकार को पता चला कि देश में 63,700 कंपनियां गैरकानूनी निर्माण में लगी हुईं हैं.