एक ताजा रिपोर्ट बताती है कि रियल एस्टेट या सोने के प्रति भारतीयों का आकर्षण अब पहले जैसा नहीं रहा.
भारतीयों के बारे में आम तौर पर माना जाता है कि वे रियल एस्टेट या फिर सोने में निवेश करते हैं. लेकिन एक ताजा रिपोर्ट बताती है कि स्थिति अब बदल रही है. इसके मुताबिक भारतीय निवेशक अब इक्विटी और बॉन्ड्स जैसे दूसरे वित्तीय विकल्पों में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं.
वेल्थ मैनेजमेंट के क्षेत्र में सक्रिय कंपनी कार्वी प्राइवेट वेल्थ का एक हालिया अध्ययन बताता है कि वित्तीय वर्ष 2015 में निवेशकों के कुल पैसे का 57.25 फीसदी वित्तीय परिसंपत्तियों में निवेश हुआ है. इंडिया वेल्थ रिपोर्ट नाम का यह अध्ययन बताता है कि वित्तीय परिसंपत्तियों में लगी रकम में 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. दूसरी तरफ निवेश के परंपरागत विकल्पों, जिन्हें फिजिकल एसेट्स भी कहा जाता है, में लगी रकम में 2.3 फीसदी की गिरावट देखी गई. इस दौरान कुल मिलाकर लोगों की संपत्ति में 8.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह आंकड़ा 280 लाख करोड़ पर पहुंच गया.
वित्तीय परिसंपत्तियों में लगी रकम में 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. दूसरी तरफ निवेश के परंपरागत विकल्पों, जिन्हें फिजिकल एसेट्स भी कहा जाता है, में लगी रकम में 2.3 फीसदी की गिरावट देखी गई.
वित्तीय परिसंपत्तियों में इक्विटी, कैश, बॉन्ड्स, म्यूचल फंड, पेंशन फंड और अल्प बचत जैसे विकल्प आते हैं. फिजिकल एसेट्स यानी भौतिक परिसंपत्तियों में सोना, फ्लैट या दुकान, चांदी और हीरे जैसी चीजें आती हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक बीते सालों के उलट 2015 में एक अलग धारा देखने को मिली है. अब तक लोग सोने और रियल एस्टेट को ही निवेश का सबसे अच्छा साधन मानते रहे थे. लेकिन इस साल ज्यादातर निवेश वित्तीय परिसंपत्तियों में हुए हैं. रिपोर्ट कहती हैं, 'इससे एक नए भारत का संकेत मिलता है जिसमें लोगों को यह लगता है कि मेहनत से कमाए गए पैसे को ज्यादा रिटर्न देने वाले क्षेत्र में निवेश करना बेहतर है.' यह अलग बात है कि इसमें जोखिम भी ज्यादा हो जाता है.
यह अध्ययन परिसंपत्तियों की उन सभी श्रेणियों पर किया गया है जिनमें एक आम निवेशक पैसा लगा सकता है. अध्ययन का हिस्सा भी आम निवेशक ही हैं. सरकार और संस्थागत निवेशकों को इसमें शामिल नहीं किया गया था.
जानकारों का मानना है कि भौतिक परिसंपत्तियों में निवेश गिर रहा है तो यह स्वाभाविक भी है. इसलिए कि उस पर उतना रिटर्न नहीं मिल रहा. जानकारों के मुताबिक ऐसा नहीं है कि रियल एस्टेट की तरफ लोगों का रुझान कम हुआ है. लेकिन अभी इसमें निवेश बहुत महंगा सौदा है और उस पर रिटर्न की संभावना उतनी बेहतर भी नहीं लगती. ऐसे में आम निवेशक को इक्विटी या फिर बॉन्ड बेहतर विकल्प लग रहे हैं.
ऐसा नहीं है कि रियल एस्टेट की तरफ लोगों का रुझान कम हुआ है. लेकिन अभी इसमें निवेश बहुत महंगा सौदा है और उस पर रिटर्न की संभावना उतनी बेहतर भी नहीं लगती
भारत के शेयर बाजार ने इस साल अपेक्षाकृत रूप से बेहतर प्रदर्शन किया है. मार्च में तो सेंसेक्स 30 हजार के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया था. उधर, रियल एस्टेट के मोर्चे पर अच्छी खबरों का अभाव बना हुआ है. अक्सर कर्ज संकट और बढ़ती इनवेंटरी से जूझते बिल्डरों की खबरें ही चर्चा में रही हैं. सोने की कीमतों में भी बीते तीन महीनों के दौरान काफी गिरावट आई है. सोने को तो हमेशा ही सबसे सुरक्षित विकल्प समझा जाता था. लेकिन इसकी कीमत में आई अप्रत्याशित गिरावट ने लोगों को झटका दिया. ये सब कारण मिलकर इन क्षेत्रों में निवेशकों का उत्साह घटा रहे हैं.