डीडीसीए मामले में आम आदमी पार्टी ने वित्‍त मंत्री अरुण जेटली पर एक बार फिर हमला बोला है. 'आप' नेताओं ने आरोप लगाया है कि अरुण जेटली को डीडीसीए में हो रही गड़बड़‍‍ियों की पूरी जानकारी थी और उन्‍होंने राज्‍यसभा में नेता विपक्ष के रूप में अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए डीडीसीए में धोखाधड़ी के एक मामले की जांच बंद करने को कहा था. आप नेता आशुतोष ने अरुण जेटली के द्वारा लिखी गयीं दो चिट्ठियां दिखाते हुए कहा कि 27 अक्टूबर 2011 को तत्‍कालीन पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में जेटली ने डीडीसीए से जुड़े एक मामले की जांच बंद करने की बात कही थी. उनके अनुसार, इस चिट्ठी के आठ महीने बाद जेटली ने स्पेशल कमिश्नर रंजीत नारायण को एक और पत्र लिखकर जांच बंद करने का अाग्रह किया था. आशुतोष का कहना था कि इन चिट्ठियों से साबित होता है कि जेटली के दावों के उलट उन्हें डीडीसीए के घोटालों और रोज के कार्यों की पूरी जानकारी रहती थी और उन्‍होंने जांच को प्रभावित करने का प्रयास भी किया था.
उधर, डीडीसीए के कार्यकारी अध्यक्ष चेतन चौहान ने इस तरह के आरोपों को नकारते हुए कहा है कि डीडीसीए इन मनगढ़ंत आरोपों के लिए अरविंद केजरीवाल और कीर्ति आज़ाद पर मानहानि का मुकदमा करेगी. उनके मुताबिक, यदि डीडीसीए का कामकाज गलत होता तो विराट कोहली जैसे खिलाड़ी आज भारतीय टीम के कप्तान नहीं होते.
आईआईटी के 75 शिक्षाविदों ने 'फ़्री बेसिक प्लान' को फ़ेसबुक की चाल बताया
फ़ेसबुक के फ़्री बेसिक प्लान को लेकर देश में विवाद बढ़ता जा रहा है. अब भारत के 75 प्रमुख शिक्षाविदों ने फ़ेसबुक की इस योजना की आलोचना करते हुए इस पर सवाल उठाये हैं. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईटी) और भारतीय विज्ञान संस्थान(आईआईएससी) के 75 प्रोफ़ेसरों ने फेसबुक की फ्री बेसिक योजना में मुख्यतः तीन कमियां बताई हैंः पहली, यह कि इस योजना में लोगों के लिए बेसिक क्या है इसे निर्धारित करने का अधिकार लोगों को नहीं बल्कि फेसबुक को ही है; दूसरा, फ्री बेसिक एप के जरिये इस सेवा को इस्तेमाल करने वालों का सारा डाटा हमेशा फेसबुक की आसान पहुंच में रहेगा; और तीसरा ऊपर से फ्री लगने वाली ये सेवा असल में फ्री नहीं है. बस इसकी कीमत किसी और को देनी होगी. इन शिक्षाविदों ने भारत सरकार और भारतीय टेलीकॉम नियामक (ट्राई) से इस सर्विस को लागू न करने की अपील की है.
छत्तीसगढ़ टेप: चुनाव आयोग ने जांच के आदेश दिए
छत्तीसगढ़ में पिछले साल विधानसभा के एक उपचुनाव में राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह के परिजनों और कांग्रेस नेता अजीत जोगी के बीच कथित ‘लेनदेन’ के कुछ टेप सार्वजनिक होने के बाद चुनाव आयोग हरकत में आ गया है. आयोग ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को इस मामले की जांच कराने के आदेश दिए हैं. पिछले साल 13 सितंबर को बस्तर की अंतागढ़ विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव हुआ था. बताया जाता है कि इस चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मंतूराम पवार चुनाव जीतने कि स्थिति में थे लेकिन चुनाव से ठीक पहले उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया था. इसके बाद भाजपा ने इस चुनाव में जीत दर्ज की थी.
इसी से संबंधित बातचीत का एक टेप जारी हुआ है जिसमें मुख्यमंत्री रमन सिंह के के दामाद, पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी, कांग्रेस प्रत्याशी से उम्मीदवारी छोड़ने के बदले करोड़ों के लेनदेन की बात कर रहे हैं. इस टेप के सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हड़कंप मच गया है. राज्य कांग्रेस के नेताओं ने अजीत जोगी और उनके बेटे को तत्काल पार्टी से बाहर करने की मांग की है. कांग्रेस ने इस मामले में अमित जोगी को नोटिस भी जारी किया है. कांग्रेस ने यह भी कहा है कि कांग्रेस के उम्मीदवार को मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पैसे देकर बिठाया था इसलिए प्रधानमंत्री को इस मामले की जांच करानी चाहिए.