प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पाकिस्तान यात्रा से पैदा हुई गर्मजोशी ने सार्क देशों के बीच परिवहन समझौते की संभावना प्रबल कर दी है.सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही अगरतला से काबुल या लाहौर से कोलंबो सड़क या रेल यात्रा का लुत्फ उठाते हुए भी पहुंचा जा सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अचानक पाकिस्तान यात्रा के बाद इस बात की संभावना बढ़ गई है कि दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (सार्क) के सदस्य देशों के बीच बहुप्रतीक्षित परिवहन समझौता हो जाए. इसके बाद इन देशों के बीच लोगों और सामान की निर्बाध आवाजाही हो सकेगी.
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक जल्द ही भारत-पाकिस्तान के परिवहन सचिव इस सिलसिले में मिलने वाले हैं. इस समझौते का सबसे बड़ा रोड़ा भारत-पाक के बिगड़ते संबंध ही थे. सचिवों की बातचीत के बाद सार्क के सदस्य देशों के परिवहन मंत्रियों की एक बैठक होगी जिसमें इस समझौते को अमली जामा पहनाने पर बात होगी.
अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो अगले साल होने वाले सार्क सम्मेलन में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं. यह सम्मेलन पाकिस्तान में होना है. इसके बाद इन सभी देशों को सड़क और रेल मार्ग से जोड़ने के लिए काम शुरू होगा. सार्क में आठ देश हैं--भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, अफगानिस्तान और मालदीव.
1985 में बना सार्क आपसी व्यापार के मामले में इस तरह के सारे क्षेत्रीय संगठनों में सबसे फिसड्डी है. इसके कुल वैश्विक व्यापार का सिर्फ पांच फीसदी ही इसके सदस्य देशों के बीच होता है. उधर, यूरोपीय संघ के लिए यह आंकड़ा 66 और दक्षिण एशियाई संघ के लिए 25 फीसदी है. उम्मीद की जानी चाहिए कि इस समझौते के बाद इसमें बढ़ोतरी होगी.
एक बंगला जो इतिहास बनाते-बनाते रह गया
एबी13 की दीवारों से अब भी ताजे पेंट की महक आती है. दिल्ली की मथुरा रोड पर बने इस बंगले तक जाने वाले रास्ते के इर्द-गिर्द लगी घास कुछ दिनों से कटी नहीं है. अगल-बगल के बंगलों में ड्यूटी पर तैनात पुलिकर्मी हैरान हैं कि इतना काम होने के बावजूद एबी13 एक साल से खाली क्यों पड़ा है.
दरअसल यह बंगला एनडीए सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल का केंद्र होने वाला था. इसे राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेऐसी) का मुख्यालय होना था. लेकिन ऐसा होते-होते रह गया.
इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक संसद के दोनों सदनों से एनजेएसी बिल पास होने के बाद कानून मंत्रालय ने शहरी विकास मंत्रालय से एक ऐसा बंगला आवंटित करने का अनुरोध किया था जो एनजेएसी मुख्यालय के रूप में काम कर सके. आरटीआई से प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस साल सात फरवरी को सुप्रीम कोर्ट से महज 100 मीटर दूर एबी13 कानून मंत्रालय को आवंटित हुआ. इसके एक महीने के भीतर ही सीपीडब्लूयडी से कहा गया कि वह इस पर रंग-रोगन और मरम्मत का काम शुरू कर दे.
आरटीआई से प्राप्त जानकारी बताती है कि वित्त मंत्रालय ने एनजेएसी के लिए सात नियुक्तियों को मंजूरी दी थी. इसके बाद कानून मंत्रालय ने गृहमंत्रालय से यह अनुरोध किया कि वह अधिकारी उपलब्ध करवाए. ऐसा हो भी गया. इनमें एक डिप्टी सेक्रेटरी और एक अंडर सेक्रेटरी शामिल था. अब इन अधिकारियों के काम शुरू करने की देर थी.
लेकिन यह होता, उससे पहले 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने एनजेएसी एक्ट को असंवैधानिक घोषित कर दिया. इसके बाद नौ दिसंबर को कानून मंत्रालय ने यह एबी13 को वापस कर दिया. डिप्टी सेक्रेटरी और अंडर सेक्रेटरी फिर गृह मंत्रालय में चले गए और बाकी अधिकारियों को कानून मंत्रालय में ही खाली पड़े पदों में समायोजित कर लिया गया. 21 दिसंबर को यह बंगला झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास को आवंटित हो गया.
इस तरह एबी13 न्याय व्यवस्था से जुड़ी प्रशासनिक हलचलों का केंद्र बनते-बनते रह गया.