राजस्थान के सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी उमराव सालोदिया नेेे अपने साथ भेदभाव के आरोप लगाते हुए धर्म परिवर्तन करने की घोषणा की है. प्रदेश के अतिरिक्त मुख्यसचिव और राजस्थान सड़क परिवहन निगम के अध्यक्ष सालोदिया ने अपनी कथित उपेक्षा से नाराज होकर स्वैच्छिक सेवानिवृति यानि वीआरएस लेने का भी फैसला किया है. अपने फैसले की जानकारी देते हुए उनका कहना था कि दलित होने के कारण उन्‍हें प्रताड़ित किया गया इसलिए उन्‍होंने इस्लाम अपनाने का फैसला किया है क्योंकि उसमें ऊंच-नीच का भेदभाव नहीं होता. उमराव सालोदिया की इस घोषणा ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है.
दरअसल, सालोदिया राज्य का मुख्य सचिव न बनने से आहत हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि पहली बार राज्य में कोई दलित अफसर मुख्य सचिव बन रहा था और वह वरिष्ठता सूची में भी सबसे ऊपर था. लेकिन, उसे रोकने के लिए मौजूदा मुख्य सचिव को तीन माह का एक्सटेंशन दे दिया गया. राजस्‍थान सरकार ने सालोदिया के भेदभाव के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और सरकार की आलोचना के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई के संकेत भी दिए हैं.
दिल्‍ली सरकार द्वारा निलंबित अफसरों को केंद्र ने बहाल किया
केंद्र की मोदी सरकार और दिल्‍ली की केजरीवाल सरकार के बीच एक बार फिर ठन गई है. अब केद्रीय गृह मंत्रालय ने केजरीवाल सरकार द्वारा दिल्ली, अंडमान-निकोबार सिविल सेवा (दानिक्स) के दो वरिष्ठतम अफसरों के निलंबन को अमान्‍य घोषित कर दिया है. गृह मंत्रालय का कहना है कि दानिक्‍स अधिकारी केंद्रीय सेवाओं के तहत आते हैं और इन्हें दिल्ली के उपराज्यपाल ही गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद निलंबित कर सकते हैं. विशेष सचिव (अभियोजन) यशपाल गर्ग और विशेष सचिव (जेल) सुभाष चंद्रा ने लोक अभियोजकों के वेतन में वृद्धि से जुड़े केजरीवाल कैबिनेट के फैसले से जुड़ी एक फाइल पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था. इसके बाद दिल्ली सरकार ने दो दिन पहले इन दोनों को निलंबित कर दिया था. अरविंद केजरीवाल ने गृह मंत्रालय के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अधिकारियों के कंधों पर बंदूक रखकर उनकी सरकार को निशाना बना रहे हैं. उन्होंने दानिक्स को भाजपा की बी टीम भी बताया है.
अश्विन के रूप में 42 साल बाद कोई भारतीय खिलाड़ी नंबर वन टेस्ट गेंदबाज बना
भारतीय गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद(आईसीसी) की 2015 की टेस्ट रैंकिंग में रविचंद्रन अश्विन नंबर वन टेस्ट गेंदबाज बन गए हैं. 2015 में अश्विन का प्रदर्शन शानदार रहा है. इस साल उन्होंने सिर्फ 9 टेस्ट मैचों में 62 विकेट लिए हैं. हाल में समाप्त हुई घरेलू सीरीज में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चार मैचों में 31 विकेट झटके थे. 29 वर्षीय ऑफ़ स्पिनर अश्विन की यह सफलता कितनी बड़ी है इसका पता इस बात से चलता है कि 42 साल बाद किसी भारतीय खिलाड़ी ने यह उपलब्धि हासिल की है. इससे पहले भारत के बिशन सिंह बेदी ही एक मात्र ऐसे भारतीय गेंदबाज थे जो आईसीसी की टेस्ट सूची में नंबर वन पर पहुंचे थे. कपिल देव, भगवत चंद्रशेखर और अनिल कुंबले जैसे महान गेंदबाज भी इस लिस्ट में नंबर दो तक ही पहुंच सके थे.