2013 में आईपीएल में सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग का खुलासा होने से खलबली मच गई थी. इसकी जांच के लिए बनी मुद्गल समिति ने अगस्त 2014 में सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपी. इसके बाद बीते साल जनवरी में शीर्ष अदालत ने बीसीसीआई में पारदर्शिता और सुधार लाने के लिए पूर्व चीफ जस्टिस आरएम लोढा की अगुवाई में एक समिति बनाई थी. इस समिति ने अपनी अहम रिपोर्ट इसी साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी थी. 159 पन्नों की इस रिपोर्ट के 10 मुख्य बिंदु

1- लोढा समिति की सबसे अहम सिफारिश तो यही है कि एक राज्य में एक ही क्रिकेट संघ हो जो पूर्ण सदस्य हो और जिसे वोट देने का अधिकार हो. इसने यह भी कहा है कि रेलवे, सर्विसेज और यूनिवर्सिटियों की अहमियत घटाकर उन्हें एसोसिएट मेंबर का दर्जा देना चाहिए.

2-समिति का यह भी मानना है कि आईपीएल और बीसीसीआई की गवर्निंग बॉडीज अलग-अलग होनी चाहिए.इसने आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल के लिए सीमित स्वायत्तता की सिफारिश की है.

बीसीसीआई पदाधिकारियों की योग्यता के मानदंड बनाए जाने चाहिए. पदाधिकारी बनने के लिए यह जरूरी होना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति वह मंत्री या सरकारी अधिकारी नहीं होना चाहिए

3-समिति के मुताबिक बीसीसीआई पदाधिकारियों की योग्यता के मानदंड बनाए जाने चाहिए. पदाधिकारी बनने के लिए यह जरूरी होना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति मंत्री या सरकारी अधिकारी न हो और यह भी कि उसने बीसीसीआई में किसी पद पर नौ साल या तीन कार्यकाल न गुजारे हों. समिति का यह भी कहना है कि किसी भी बीसीसीआई पदाधिकारी को लगातार दो बार से ज्यादा का कार्यकाल नहीं मिलना चाहिए.

4-समिति ने आईपीएल के पूर्व चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर सुंदर रमन को क्लीन चिट दे दी है. 2013 में जब आईपीएल में सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग का घोटाला उजागर हुआ तो आयोजन की कमान उनके ही हाथ में थी. रमन ने नवंबर 2015 में इस्तीफा दे दिया था.

5- समिति ने यह भी कहा है कि सट्टेबाजी को वैध बना दिया जाना चाहिए जिसके लिए भीतर से ही कोई व्यवस्था हो.

6- रिपोर्ट में यह भी प्रस्ताव है कि खिलाड़ियों की अपनी एक असोसिएशन बने.

7- समिति ने एक स्टीयरिंग कमेटी बनाने की सिफारिश भी की है जिसके अध्यक्ष पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई हों और मोहिंदर अमरनाथ, डायना इदुलजी और अनिल कुंबले उसके सदस्य हों.

रिपोर्ट के मुताबिक बोर्ड में क्रिकेट संबंधी मसलों को निपटाने की जिम्मेदारी पूर्व खिलाड़ियों को दी जानी चाहिए. साथ ही एक ‘एथिक्स ऑफिसर’ हो जो हितों के टकराव संबंधी मामलों पर फैसला करे.

8-रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एक ‘एथिक्स ऑफिसर’ हो जो हितों के टकराव संबंधी मामलों पर फैसला करे.

9-समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि बीसीसीआई को सूचना का अधिकार (आरटीआई) के दायरे में लाया जाना चाहिए. यह काफी मुद्दा तीखे टकराव का विषय रहा है.

10-रिपोर्ट के मुताबिक बोर्ड में क्रिकेट संबंधी मसलों को निपटाने की जिम्मेदारी पूर्व खिलाड़ियों को दी जानी चाहिए जबकि इससे इतर मामले संभालने के लिए सीईओ, उसके छह सहायक मैनजरों और दो समितियों वाली एक व्यवस्था हो.

बीते साल जुलाई में जस्टिस लोढ़ा समिति ने अपनी रिपोर्ट का पहला हिस्सा जारी किया था. इसके बाद आईपीएल की दो फ्रेंचाइजियों चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स पर दो साल का प्रतिबंध लगा दिया गया था. हालांकि ये सिफारिशें बीसीसीआई के लिए बाध्यकारी नहीं हैं लेकिन अगर इन पर आगे बढ़ने की कोई संभावना बनती है तो बीसीसीआई का ढर्रा बदल सकता है. इन सिफारिशों पर टिप्पणी करते हुए जस्टिस लोढ़ा का कहना था, ‘हमें यह सुनिश्चत करना था कि बीसीसीआई की स्वायत्तता बनी रहे. बीमारियों को ठीक करने की जरूरत है, लेकिन ऐसा करते हुए शरीर में मौजूद वे जीवाणु खत्म नहीं होने चाहिए जो अच्छे होते हैं.’