सऊदी अरब में शीर्ष शिया धर्मगुरु निम्र-अल-निम्र की फांसी के बाद सऊदी अरब और ईरान के बीच विवाद बढ़ता ही जा रहा है. इसी के चलते अब सऊदी अरब ने ईरान के साथ अपने कूटनीतिक संबंध तोड़ने का फैसला किया है. उसने ईरान के राजदूत को 48 घंटे के अंदर देश छोड़ने का आदेश दिया है, साथ ही ईरान स्थित अपने राजदूत को भी वापस बुला लिया है. सऊदी सरकार का कहना है कि इस फांसी को लेकर ईरान के विरोध से यह साफ़ हो गया है कि वह आतंक का समर्थन करता है. ऐसे में उसके साथ संबंधों को बनाए रखना संभव नहीं है. वहीं, ईरान के उप विदेश मंत्री हुसैन आमिर ने कहा है कि सऊदी अरब ने एक धर्मगुरू को मौत की सजा देने की जो गलती की है उससे दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए वह ऐसा कर रहा है.
उधर, अमेरिका ने दोनों देशों को जल्दबाजी में कोई फैसला न लेने की सलाह दी है. शनिवार को सुन्नी बहुल सऊदी अरब ने 56 बर्षीय धर्मगुरु निम्र-अल-निम्र को 2011 में सरकार विरोधी प्रदर्शनों का नेतृत्व करने के अपराध में फांसी दे दी थी. सऊदी अरब के कट्टर प्रतिद्वंदी और शियाबहुल ईरान ने इसकी कड़ी आलोचना की थी. ईरान ने शेख निम्र-अल-निम्र को निर्दोष बताते हुए सऊदी अरब को चेतावनी दी थी कि उसे अपनी इन शिया विरोधी नीतियों के परिणाम जल्द ही भुगतने पड़ेंगे.
नेपाल में मधेसी मोर्चा फूट की राह पर
नेपाल के संविधान में अपनी उपेक्षा को लेकर सरकार का विरोध कर रहा मधेसी मोर्चा फूट की राह पर जाता दिखाई दे रहा है. इस मोर्चे में शामिल सदभावना पार्टी ने मोर्चे से अलग आंदोलन करने की घोषणा की है. इसकी प्रमुख वजह पिछले हफ्ते सदभावना पार्टी के अध्यक्ष राजेंद्र महतो पर हुए पुलिस लाठी चार्ज को बताया जा रहा है. दरअसल, सदभावना पार्टी का कहना है कि जब तक सरकार इस लाठी चार्ज को लेकर माफ़ी नहीं मांगेगी, तब तक मधेसी सरकार से कोई बातचीत नहीं करेंगे. लेकिन, उसकी इस बात पर मधेसी मोर्चे में शामिल अन्य दल सहमत नहीं हैं. मधेसी मोर्चे में शामिल संघीय लोकतांत्रिक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र यादव ने तो सदभावना पार्टी के इस फैसले की आलोचना की है. उनके अनुसार सद्भावना पार्टी  का यह फैसला एक बड़ी भूल साबित होगा क्यूंकि इससे मधेसी आंदोलन कमजोर होने के आसार हैं.
डोनाल्ड ट्रम्प का आरोप, आईएस के लिए ओबामा-हिलेरी जिम्मेदार
अपने विवादित बयानों को लेकर सुर्ख़ियों में रहने वाले रिपब्लिकन पार्टी के नेता डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है. उन्होंने बराक ओबामा और हिलेरी क्लिंटन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इन दोनों ने ही मिलकर आतंकी संगठन 'आईएसआईएस' को खड़ा किया है. अपनी चुनावी सभा को संबोधित करते हुए ट्रम्प ने कहा कि 2003 में जार्ज बुश के द्वारा इराक पर किये गए हमलों ने आईएस के बनने की नींव रखी. लेकिन, उसके बाद आई ओबामा सरकार ने भी स्थिति को न संभालते हुए इराक पर हमले जारी रखे जिस वजह से आईएस का जन्म हुआ. बराक ओबामा के पहले कार्यकाल में हिलेरी क्लिंटन उनकी विदेश मंत्री थीं. रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति चुनाव की उम्मीदवारी में डोनाल्ड ट्रम्प इस समय सबसे आगे चल रहे हैं. वह उम्मीदवार बनने को लेकर होने वाली पांच बहस जीत चुके हैं. जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उम्मीदवारी के लिए हिलेरी क्लिंटन का दावा अभी तक सबसे मजबूत है. ऐसे में दोनों के आगामी चुनाव में राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनने और इनमें से एक के राष्ट्रपति बनने की संभावनाएं प्रबल हैं. इसी को देखते हुए पिछले कुछ समय से ये दोनों नेता एक दूसरे पर जमकर हमला बोल रहे हैं.