लेकिन जानकारों का मानना है कि यह कवायद तभी सार्थक होगी जब इसके जमीनी नतीजे दिखें. पठानकोट में हुए आतंकी हमले के बाद एक तरफ भारत अतीत की तुलना में अलग रवैय्या दिखा रहा है तो दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ भी कुछ ऐसा ही लगता है. डीएनए की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इस मामले में दो दिन के भीतर दूसरी उच्च स्तरीय बैठक करते हुए अधिकारियों को भारत के साथ सहयोग के निर्देश दिए हैं ताकि इस घटना को अंजाम देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके.
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि शरीफ ने भारत द्वारा मुहैया कराया गया हर सबूत और इस मामले की जांच का जिम्मा इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) के मुखिया आफताब सुल्तान को दिया है जो सीधे उन्हें रिपोर्ट करते हैं. यह इसलिए महत्वपूर्ण है कि पहले ऐसे सबूत इंटर सर्विसेज एजेंसी यानी आईएसआई को सौंप दिए जाते थे जो सेना के तहत काम करती है.
शरीफ ने भारत द्वारा मुहैया कराए गया हर सबूत और इस मामले की जांच का जिम्मा इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) के मुखिया आफताब सुल्तान को दिया है जो सीधे उन्हें रिपोर्ट करते हैं.
कूटनीतिक जानकारों की मानें तो यह असाधारण कदम बताता है कि शरीफ इस दिशा में कितने गंभीर हैं कि दोनों देशों के बीच काफी मुश्किलों के बाद शुरू हुई बातचीत फिर पटरी से न उतरे. कई भारतीय अधिकारी भी इसे एक दुर्लभ, सकारात्मक और उम्मीद जगाने वाला संकेत मान रहे हैं.
ऐसा इसलिए भी है कि पाकिस्तान पहले अक्सर ऐसे मामलों में एक बड़ी हद तक इनकार की मुद्रा में रहता था. हालांकि अभी यह देखा जाना बाकी है कि वह इस दिशा में क्या जमीनी कदम उठाता है. एक अधिकारी कहते हैं, 'हमारी कम से कम अपेक्षा यह है कि यह कार्रवाई जिनके इशारों पर हुई उनकी गिरफ्तारी हो.'
सूत्रों के मुताबिक शरीफ ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नासिर खान जंजुआ को अपने भारतीय समकक्ष अजीत डोभाल के संपर्क में रहने को कहा है. बताते हैं कि बैठक में जंजुआ ने कहा था कि भारत द्वारा दी गई जानकारी काफी नहीं है क्योंकि इसमें सिर्फ टेलीफोन नंबर हैं. शरीफ ने कहा कि और जानकारी के लिए वे डोभाल से बात करें. इस बैठक में पाकिस्तानी सेना के मुखिया राहील शरीफ, आईएसआई के डीजी रिजवान अख्तर और आंतरिक मामलों के मंत्री चौधरी निसार अली खान भी शामिल थे.
विदेशी ई कॉर्मस साइटों पर भारतीयों की आमद बढ़ रही है
नम्रता सरकार को जब इन सर्दियों में एक फैशनेबल गर्म कोट खरीदने की जरूरत महसूस हुई तो वेजाबोन्ग या मिंत्रा की जगह अली एक्सप्रेस पर गईं. यह ई कॉमर्स वेबसाइट चीन की है, लेकिन देश से बाहर भी ऑर्डर भेजती है. नम्रता के मुताबिक वे अक्सर विदेशी शॉपिंग साइटों से सामान खरीदती हैं क्योंकि देसी वेबसाइटों की तुलना में उन्हें अच्छी क्वालिटी की चीजें कम दाम पर मिल जाती हैं.
वे अकेली नहीं हैं. द इकॉनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीयों की एक बड़ी संख्या ऐसी विदेशी साइटों या ईटेलरों पर जा रही है. इस बात की पुष्टि बैंक और क्रेडिट कार्ड कंपनियां भी करती हैं. इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि उनमें कई प्रोडक्ट ऐसे भी होते हैं जो भारतीय वेबसाइटों पर नहीं मिलते.
दिल्ली में पढ़ने वाली देवीना आनंद ने हाल ही में एमेजॉनडॉटकॉम से एक फोल्डेबल स्टडी टेबल खरीदी है. इस तरह की टेबल उन्हें किसी भारतीय ई कॉमर्स साइट पर नहीं मिली. वे कई बार ऐसी वेबसाइटों से कपड़े भी खरीदती हैं. कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें विदेशी साइटों पर अपनी पसंद की ब्रैंडेड चीजें सस्ती मिल जाती हैं तो वे उन्हें वहीं रह रहे अपने दोस्तों या रिश्तेदारों के पते पर मंगा लेते हैं जो भारत आते वक्त उन्हें अपने साथ ले आते हैं. एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करने वाली पूजा खन्ना ने हाल ही में अमेरिका में अपने एक परिचित के पते पर एक नामी कंपनी का हैंडबैग मंगाया जिस पर उन्हें करीब छह हजार रु का फायदा हुआ.
हालांकि इस नए चलन के अपने झंझट भी हैं. भारत में डिलिवरी करते वक्त कीमत में ड्यूटी और शिपिंग फीस का खर्च जुड़ जाता है. पूजा कहती हैं कि कॉसमेटिक्स और फैशन एक्सेसरीज पर 28.8 फीसदी की कस्टम ड्यूटी लगती है. इसके अलावा कई बार सामान अटक भी जाता है और कभी-कभी तो गुम भी हो जाता है. इसके अलावा पसंद न आने पर चीज वापस भेजना भी एक सिरदर्द होता है. इन वजहों के चलते वे अपना सामान भारत नहीं मंगातीं.
ऐसे मिले-जुले अनुभवों के बावजूद एमेजॉनडॉटकॉम पर भारत से आने वाले नए ग्राहकों की तुलना में एक साल के भीतर 10 फीसदी बढ़ोतरी हुई है. अलीबाबाडॉटकॉम के साथ भी ऐसा ही है जिसके मुताबिक भारतीयों की पहली पसंद मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण होते हैं. कोटक महिंद्रा बैंक के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेजीडेंट (डिजिटल इनिशिएटिव्स) दीपक शर्मा बताते हैं कि क्रेडिट कॉर्ड से अंतर्राष्ट्रीय ई कॉमर्स वेबसाइटों पर होने वाले खर्च में हर साल औसतन 48 फीसदी की दर से बढ़ोतरी हो रही है.