देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद पटेल आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने राज्य सरकार को फिर से आंदोलन करने की चेतावनी दी है. हार्दिक का कहना है कि इस बार उन्हें आंदोलन करने से गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल भी नहीं रोक पाएंगी. सूरत की एक स्थानीय अदालत में पेशी पर आये हार्दिक पटेल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'जब कभी मैं जेल से बाहर आऊंगा, मैं आरक्षण हासिल करने के अपने आंदोलन में जुट जाऊंगा और इस बार ज्यादा ताकत से ज्यादा बड़ा आंदोलन खड़ा करूंगा.' हार्दिक का कहना था, 'हमारे आंदोलन को कोई नहीं रोक सकता, यहां तक कि इस बार मेरी बुआ (आनंदीबेन पटेल) भी नहीं रोक पाएंगी क्योंकि यह आंदोलन योजना के मुताबिक चलेगा और सफल होगा.

बता दें कि अपने समुदाय के युवकों को आत्महत्या करने की बजाय पुलिसकर्मियों की हत्या करने के लिए कथित तौर पर उकसाने को लेकर हार्दिक के खिलाफ देशद्रोह का मामला अक्तूबर माह में दर्ज किया गया था. वे इस मामले में पिछले दो महीने से गुजरात की जेल में बंद हैं.

सम-विषम योजना 15 जनवरी तक जारी रहेगी, अदालत का हस्तक्षेप से इंकार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए शुरू की गई वाहनों की सम-विषम योजना में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है. अब यह योजना 15 जनवरी तक लागू रहेगी. अदालत ने कहा, 'इस योजना को यह देखने के लिए लागू किया गया है कि इससे प्रदूषण का स्तर घटता है या नहीं. यह देखते हुए हमारा विचार है कि इसमें अदालत के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है.' अदालत के अनुसार इस योजना के कार्यान्वयन से समाज के कुछ वर्गों को मुश्किल हो सकती है लेकिन अदालत अपने अधिकार को एेसे नीतिगत निर्णय को बदलने के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकती. हालांकि, कोर्ट ने सरकार से यह भी कहा है कि भविष्य में इस योजना को लागू करने से पहले इस योजना को चुनौती देने वाली याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर वह जरूर विचार करे.

बच्चियों के बलात्कारियों को कठोरतम सजा देने के कानून पर संसद विचार करे : सुप्रीम कोर्ट

छोटी बच्चियों के साथ हो रहे बलात्कार से चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने संसद को इस मामले में और कठोर कानून बनाए जाने का सुझाव दिया है. कोर्ट ने यह सुझाव कुछ महिला वकीलों की ओर से दायर की गयी उस याचिका पर दिया है जिसमें मांग की गयी थी कि बच्चियों के साथ बढ़ते रेप के मामलों को देखते हुए केंद्र को इनके लिए अलग से कानून बनाने को कहा जाए. सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत का यह भी कहना था कि नवजातों और दस वर्ष से कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार और उनके यौन शोषण की घटनाएं अपराधियों की विकृत मानसिकता को दर्शाती हैं और इस वजह से इसके लिए कठोरतम सजा होनी चाहिए. कोर्ट ने यह भी कहा है कि संसद को बच्चियों के साथ हो रहीं इन घटनाओं को ध्यान में रखते हुए भारतीय दंड संहिता(आईपीसी) में 'बच्चे' की परिभाषा को बदलने पर भी विचार करना चाहिए. दरअसल, अभी तक आईपीसी में 18 बर्ष से कम उम्र के हर व्यक्ति को बच्चे की श्रेणी में ही रखा जाता है. हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ़ किया कि यह कोई बाध्यकारी सलाह नहीं हैं.