हाइड्रोजन बम परीक्षण के बाद बने अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते उत्तर कोरिया के तेवरों में नरमी आई है. वहां के तानाशाह किम जोंग उन अमेरिका के साथ संधि करने के लिए राजी हो गए हैं. हालांकि, उन्होंने इसके लिए एक शर्त भी रखी है. इसकी जानकारी देते हुए उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि उत्तर कोरिया अमेरिका के साथ एक शांति संधि के तहत अपने परमाणु परीक्षण बंद करने को तैयार है. लेकिन इसके बदले में अमेरिका को दक्षिण कोरिया के साथ अपने सभी वार्षिक सैन्य अभ्यास बंद करने होंगे. प्रवक्ता ने हाइड्रोजन बम परीक्षण को सही ठहराते हुए कहा कि जब अमेरिका उसके पड़ोसी शत्रु देश दक्षिण कोरिया को सैन्य मदद देता है तो उत्तर कोरिया के भीतर एक डर व्याप्त होना स्वाभाविक है और ऐसे में वह अपनी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए ही यह परीक्षण कर रहा है.
उत्तर कोरिया ने विश्व शक्तियों को आश्वस्त किया है कि वह बिना सोचे समझे कभी भी परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेगा. हालांकि अमेरिका ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन, बताया जाता है कि उत्तर कोरिया अमेरिका के सामने पहले भी कई बार ऐसे ही प्रस्ताव रख चुका है और अमेरिका इन्हें ठुकरा भी चुका है. अमेरिका चाहता है कि उत्तर कोरिया परमाणु हथियारों का पूरी तरह से त्याग कर दे.
चीन, भारत-नेपाल विवाद में दखल नहीं देगा, लिपु लेख दर्रे को भी विवाद की वजह बताया
भारत-नेपाल के बीच सीमा पर नाकेबंदी संबंधी विवाद से चीन पूरी तरह सावधान है. उसका कहना है कि वह इन दोनों देशों के बीच मधेसी आंदोलन से पैदा हुई असहज स्थिति में कोई दखल नहीं देगा. यह बात चीन की सरकारी समाचार पत्रिका में कही गयी है. उसके अनुसार जरूरत पड़ने पर चीन नेपाल को मदद देगा, लेकिन इसके लिए वह अपने हितों का भी ध्यान रखेगा. चीन का कहना है कि नेपाल में अशांति से बिगड़े भारत-नेपाल रिश्तों का समाधान नेपाल अपने स्तर से ही निकाले. इस पत्रिका में चीन ने लिपु लेख दर्रे को भी भारत-नेपाल संबंधों में आई खटास की वजह बताया है. भारत और चीन व्यापार को बढ़ावा देने के लिए इस दर्रे का उपयोग व्यापार मार्ग के रूप में करना चाहते हैं. लेकिन, नेपाली सीमा के इस दर्रे के नजदीक होने की वजह से नेपाल इस व्यापार मार्ग को लेकर नाराजगी जताता रहा है.
'ईरान पर लगे प्रतिबंध आज हटेंगे'
अंतरराष्ट्रीय परमाणु निगरानी संस्था (आईएईए) की रिपोर्ट आने से पहले ही ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ ने कहा है कि उनके देश के ख़िलाफ़ लगे प्रतिबंध शनिवार को हट जाएंगे. यह बात उन्होंने इन प्रतिबंधों को लेकर ऑस्ट्रिया के वियना में होने वाली बैठक से कुछ घंटे पहले कही है. इस बैठक में आईएईए ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अपनी रिपोर्ट जारी करने वाली है जिसमें इस बात की पुष्टि की जाएगी कि अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत ईरान ने अपने वादे पूरे किए हैं या नहीं. पिछले साल जुलाई में हुए समझौते में ईरान ने वादा किया था कि अब वह अपना परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ही चलाएगा.
हालांकि, पिछले महीने अमेरिका ने कहा था कि ईरान ने समझौते पर अमल करते हुए अपने वादे पूरे कर लिए हैं. लेकिन, इस संबंध में आईएईए की आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही ईरान के ऊपर से ये प्रतिबंध हटेंगे. इस निर्णय पर भारत सहित कई देशों की निगाहें लगी हैं. क्योंकि प्रतिबंध हटने के बाद ईरान फिर से तेल बेचना शुरू कर देगा जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आ जायेगी.