रणवीर सिंह इधर जाएंगे कि उधर? 
ये आप जानते ही हैं कि रणवीर सिंह पिछले साल करण जौहर की ‘शुद्धि’ करने वाले थे लेकिन ‘बाजीराव मस्तानी’ के कड़क निर्देशक ने ऐसा होने नहीं दिया और रणवीर-भंसाली से करण जौहर खासे खफा हो गए. गुजरते वक्त ने हालांकि रणवीर और करण के बीच आई दरार पर बिरला व्हाइट पुट्टी भर दी और सबकुछ वापस ठीक-ठाक चलने लगा. मगर अब लग रहा है कि इतिहास खुद को दोहराने वाला है. रणवीर सिंह एक बार फिर भंसाली और करण जौहर के बीच पिसने वाले हैं.खबर है कि भंसाली अपनी अगली फिल्म इसी साल शुरू करना चाहते हैं जिसमें उन्होंने एक बार फिर रणवीर सिंह को लेने का मन बना लिया है. उन्होंने रणवीर को बता भी दिया है कि आदित्य चोपड़ा की ‘बेफिक्र’ की शूटिंग खत्म होने के तुरंत बाद ही वे उन्हें अपने सेट पर देखना चाहते हैं. वहीं करण जौहर चाहते हैं कि उनकी ‘राम-लखन’ की रीमेक में अनिल कपूर वाला किरदार रणवीर सिंह करें! दिक्कत ये है कि करण भी इसी साल अपनी फिल्म की शूटिंग शुरू करना चाहते हैं और अब आप शर्तिया मानकर चलिए कि रणवीर सिंह इस साल ‘कोई मिल गया’ के ‘इधर चला, कभी उधर चला, जाने कहां मैं किधर चला’ गीत को कई बार गाने वाले हैं!


'बॉलीवुड उन लड़कियों को पसंद नहीं करता जो बेहद महत्वाकांक्षी होती हैं. इस इंडस्ट्री के मर्दों की यही सोच है और ऐसे ही मर्द औरतों से उनकी पहचान छीन लेना चाहते हैं'

कंगना रनोट



कैटरीना के महंगे बालों का फितूर

आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते कि ‘फितूर’ में कैटरीना के जिन लाल बालों के आप दीवाने हो रहे हैं, उन्हें खूबसूरत बनाने में उन्होंने निर्माताओं के कितने पैसे बहाए हैं! खबर है कि न सिर्फ ‘फितूर’ के ओवर-बजट होने से निर्माता कंपनी यूटीवी खफा है बल्कि कैटरीना के लाल बालों पर हुआ खर्चा देखकर भी निर्माताओं के चेहरे सुर्ख लाल हो गए हैं. कहा जा रहा है कि कैटरीना ने पूरी फिल्म के दौरान लाल बाल रंगवाने में ही उनके तकरीबन 55 लाख रुपए खर्च कर दिए!
चूंकि निर्देशक अभिषेक कपूर हीरोइन के लाल बालों द्वारा चिनार के लाल रंग को ट्रिब्यूट देना चाहते थे इसलिए कैटरीना ने ऐसे प्रोफेशनल एक्सपर्ट को ढूंढा जो बेहतरीन बाल रंगने का हुनर रखता हो. अब जाहिर है ऐसा एक्सपर्ट उन्हें हिंदुस्तान में तो मिला नहीं होगा, इसलिए कैट ने लंदन जाकर बाल रंगने वाले एक एक्सपर्ट की सेवाएं लीं. वे साल में कई बार लंदन गईं, अपने बाल बार-बार रंगाने और लाल रंग की चमक बरकरार रखने. इसके लिए उन्होंने प्लेन के फर्स्ट क्लास में सफर किया, अपनी टीम को बिजनेस क्लास में सफर करवाया और सभी के साथ लंदन के फाइव-स्टार होटलों में रुकीं. बाद में जब इन सारे खर्चों को कैलकुलेटर में डाला गया तो 55 लाख रुपए में कैटरीना के बालों का रंग निर्देशक की पसंद वाला सुर्ख लाल हो पाया! इस जानकारी के बाद आपको ‘फितूर’ में कैटरीना को देखने में डेफिनिटली ज्यादा मजा आएगा. नहीं?


फ्लैशबैक –कैसे इफ्तिखार फिल्मों में पुलिस का चेहरा बन गए?
इफ्तिखार
इफ्तिखार
सुधी सिनेमा प्रेमी अभिनेता इफ्तिखार को पुराने जमाने की फिल्मों में पुलिस वाले की अनगिनत भूमिकाओं के लिए बखूबी जानते हैं. लेकिन एक-से नजर आते उन किरदारों से इतर जो उनका जीवन था, वो काफी रोचक और संघर्षों से भरा हुआ था. केएल सहगल से प्रभावित इफ्तिखार गायक बनना चाहते थे और उन्होंने 1942 के आसपास कलकत्ता में एचएमवी कंपनी द्वारा रिलीज एक प्राइवेट एलबम के लिए दो गाने भी गाए थे. मगर उनकी कदकाठी और भाषा पर पकड़ ने उन्हें कलकत्ता में बनने वाली फिल्मों का हीरो बना दिया. यहीं उन्होंने एक यहूदी लड़की से शादी भी की. कुछ सालों बाद जब भारत का विभाजन हुआ तो दंगों की आग उन्हें बॉम्बे ले आई जहां काम की तलाश में कुछ अरसे भटकने के बाद उनकी मुलाकात अशोक कुमार से हुई जिनसे वे कलकत्ता में पहले सिर्फ एक बार मिले थे. इसके बाद दादा मुनि के कहने पर कलकत्ता की फिल्मों के हीरो को बॉम्बे की फिल्मों में छोटे-मोटे रोल मिलने लगे.
‘इत्तेफाक (1970)’ में पुलिसवाले का किरदार निभाने से पहले इफ्तिखार 70 फिल्में कर चुके थे लेकिन उन्हें इन फिल्मों से कोई पहचान हासिल नहीं हुई
मगर इफ्तिखार सिर्फ अभिनेता और गायक नहीं थे. वे एक पेंटर भी थे जिससे खुद दादा मुनि यानी अशोक कुमार ने पेंटिग करना सीखा और उन्हें इस विधा में अपना ‘गुरु’ माना. इफ्तिखार कितने उम्दा चित्रकार थे यह इस बात से भी पता चलता है कि ‘दूर गगन की छांव में’ नामक फिल्म की शुरुआत उनकी बनाई तस्वीरों से ही हुई थी.
बॉम्बे आने के बाद 1950 और 60 के दशक में इफ्तिखार ने 70 से ज्यादा फिल्मों में काम किया लेकिन न उन्हें कामयाबी मिली और न ही दर्शकों ने उन्हें पहचाना. लेकिन जब 1969 में बीआर चोपड़ा निर्मित और राजेश खन्ना अभिनीत ‘इत्तेफाक’ आई, जिसमें उन्होंने एक पुलिस वाले की भूमिका निभाई थी, तो उनकी तकदीर हमेशा के लिए बदल गई. इसके बाद वे फिल्मों में बतौर पुलिस वाले इस कदर व्यस्त हुए कि न सिर्फ जल्द ही बॉम्बे में अपना फ्लैट खरीद लिया बल्कि 1970 और 80 का दशक इफ्तिखार के जीवन का स्वर्ण-काल साबित हुआ. उनका यह अच्छा वक्त उनके ‘शिष्य’ अशोक कुमार की वजह से आया, जिनकी सिफारिश ने उन्हें बीआर चोपड़ा की फिल्मों में जगह दिलाई और ‘इत्तेफाक’ से इत्तेफाकन ही इफ्तिखार की जिंदगी बदल गई!