भारत जल्द ही वियतनाम में सेटेलाइट ट्रैकिंग और इमेजिंग सेंटर स्थापित करेगा. खबरों के मुताबिक अपने उपग्रहों के जरिये वह वियतनाम, चीन के साथ-साथ विवादित दक्षिणी चीन सागर पर भी नजर रख सकेगा. अभी तक अर्थ ऑब्ज़र्वेशन सेटेलाइटों को कृषि और पर्यावरण संबंधी काम के लिए ही इस्तेमाल किया जाता था लेकिन अब नयी इमेजिंग तकनीक के जरिये इनका उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है. अधिकारियों के मुताबिक इस सेंटर के स्थापित होने से भारत और वियतनाम दोनों को ही फायदा होगा. उनके अनुसार विवादित दक्षिणी चीन सागर को लेकर चीन के साथ तनाव की वजह से वियतनाम काफी समय से इस क्षेत्र पर निगरानी रखने की कोशिश में लगा हुआ था, लेकिन तकनीकी में हाथ तंग होने की वजह से वह ऐसा कर नहीं पा रहा था.
बताया जाता है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) के द्वारा हो ची मिन्ह शहर में स्थापित होने वाले इस सेंटर से जहां वियतनाम दक्षिणी चीन सागर पर निगाह रख सकेगा, वहीं भारत की तकनीक का विस्तार होगा. हालांकि, चीन की ओर से अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है, लेकिन माना जा रहा है कि इस कदम से चीन को परेशानी हो सकती है. क्योंकि चीन काफी पहले से दक्षिण चीन सागर के पूरे क्षेत्र पर अपना हक जताता रहा है और वह कई देशों के द्वारा इस क्षेत्र की निगरानी पर उन्हें चेतावनियां भी दे चुका है.
पठानकोट हमले में भारत ने नए सबूत दिए, जांच जारी : नवाज शरीफ़
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के संबंध में भारत ने कुछ नए सबूत दिए हैं और उनका देश इनकी जांच कर रहा है. नवाज़ शरीफ़ ने लंदन में पत्रकारों से कहा, 'भारत ने हमें नए सबूत दिए हैं. हम उनका सत्यापन कर रहे हैं ताकि दोषियों को सजा मिल सके. हमने एक विशेष जांच दल भी बनाया है जो भारत जाकर सबूत इकट्ठा करेगा.' शरीफ ने इस मामले में अपनी पीठ थपथपाते हुए कहा, 'हम इस बात को दुनिया से छिपा सकते थे या इसे भूल भी सकते थे, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया है, क्योंकि हम इसे गंभीरता से ले रहे हैं.' नवाज शरीफ़ भारत से पठान कोट हमले के दोषियों पर उचित कार्रवाई करने का वादा कर चुके हैं.
ऑस्ट्रेलिया को गणराज्य बनाने के लिए अभियान शुरू, राज्यों ने समर्थन दिया
ऑस्ट्रेलिया के लगभग सभी राज्यों ने देश को गणराज्य बनाने को लेकर अपना समर्थन दे दिया है. इन राज्यों के प्रमुखों ने इससे संबंधित दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. ये अभियान ऑस्ट्रेलियन रिपब्लिकन मूवमेंट ने चलाया है, जो चाहता है कि संविधान में बदलाव कर महारानी एलिज़ाबेथ को राष्ट्र प्रमुख के ओहदे से हटा दिया जाए. वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया ही एक ऐसा राज्य है जिसने इस मसौदे पर दस्तखत नहीं किए हैं. इस राज्य के प्रमुख कॉलिन बार्नेट का कहना है कि वे इसके समर्थक हैं, लेकिन अभी ऐसा करने का सही समय नहीं है.
इससे पहले 1999 में भी ऑस्ट्रेलिया को गणराज्य बनाने को लेकर जनमत संग्रह हुआ था, जिसमें इसके ख़िलाफ़ बहुमत आया था. मौजूदा प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल उस समय इस अभियान के नेता थे. लेकिन, सत्ता में आने के बाद टर्नबुल ने यू-टर्न ले लिया है. उनका कहना है कि उनकी सरकार ने इस मुद्दे पर जनमत संग्रह कराने का वादा नहीं किया था. बतादें कि ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय को ऑस्ट्रेलिया सहित 16 देशों ने अपने राष्ट्र प्रमुख का दर्जा दे रखा है. हालांकि, इन देशों में सभी फैसले जनता के द्वारा चुनी गयी सरकार ही लेती है.