दुनिया में सबसे ऊंचाई पर स्थित लड़ाई के मैदान सियाचिन में रहना ही अपने आप में बहुत मुश्किल है जहां तापमान शून्य से 60 डिग्री से नीचे तक चला जाता है.
वैसे तो सेना का सिपाही होने का मतलब ही चुनौतियों से भरा जीवन है, लेकिन भारतीय सेना के जांबाजों के लिए इन चुनौतियों में भी सबसे मुश्किल है सियाचिन. दुनिया में सबसे ऊंचाई पर स्थित लड़ाई के इस मैदान में रहना ही अपने आप में बहुत मुश्किल है जहां तापमान शून्य से 60 डिग्री नीचे तक चला जाता है.
लेकिन ऐसे मुश्किल हालात भी भारतीय सेना के जवानों को महत्वपूर्ण अवसरों पर तिरंगा लहराने से नहीं रोक पाते. इसी महीने 15 जनवरी को सेना दिवस के मौके पर उन्होंने -23 डिग्री तापमान के बावजूद तिरंगा फहराया और राष्ट्रगान गाया. इन जवानों का एक वीडियो हाल ही में जारी हुआ है.
यह कवायद भारत की जेब पर बहुत भारी पड़ती है और खबरों के मुताबिक इसकी आर्थिक लागत रोज औसतन छह करोड़ रु से ज्यादा बैठती है.
15 जनवरी 1948 को ले. जनरल केएम करियप्पा भारतीय सेना के पहले मुखिया बने थे. उन्होंने ब्रिटिश जनरल रॉय बुचर से कमान ली थी. तब से हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है.
करीब 20 हजार फीट की औसत ऊंचाई पर स्थित सियाचिन ग्लेशियर पर पाकिस्तान भी अपना दावा करता है. 1984 से यह भारत के नियंत्रण में है. यह कवायद भारत की जेब पर बहुत भारी पड़ती है और खबरों के मुताबिक इसकी आर्थिक लागत रोज औसतन छह करोड़ रु से ज्यादा बैठती है. लड़ाई से ज्यादा सैनिक मौसम का शिकार हो जाते हैं.  हिमस्खलन और ठंड से शरीर के अंगों को बेकार करने वाला 'फ्रॉस्टबाइट' जैसा खतरा हर समय उनके ऊपर मंडराता रहता है.
https://youtu.be/ojvcOGBufQ8