अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों - ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल - ने अल्पसंख्यकों पर हमले नहीं रोक पाने के लिए मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की है. 659 पन्नों की अपनी रिपोर्ट में ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हो रहे हमलों को रोकने में पूरी तरह से नाकाम रही है. इस रिपोर्ट में कथित तौर पर देश में बीफ़ को लेकर हुई चार मुस्लिमों की हत्या का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि ऐसी घटनाएं और इन पर भाजपा के कुछ नेताओं के मुस्लिम विरोधी बयानों ने अल्पसंख्यकों में डर पैदा कर दिया है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी अपनी रिपोर्ट में मानवाधिकार उल्लंघन का जिक्र करते हुए कहा है कि भारत के उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में मोदी सरकार के दौरान सांप्रदायिक हिंसा बढ़ी है. साथ ही इसमें दलितों और आदिवासियों के खिलाफ़ जातीय हिंसा और देश में जातिगत भेदभाव की घटनाओं में इजाफा होने की बात भी कही है. इस रिपोर्ट में गुजरात सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि 2002 के गुजरात दंगों की जांच कर रहे नानावती-मेहता आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है लेकिन सरकार ने फिर भी इसे सार्वजनिक नहीं किया है.

इन रिपोर्टों में भारत में कार्यरत गैर सरकारी संगठनों के प्रति मोदी सरकार के रवैये की भी आलोचना की गयी है. इनमें ग्रीनपीस और फोर्ड फाउंडेशन का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि भारत में जो एनजीओ सरकार का या बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं का विरोध करती हैं, सरकार उनके विदेश से मिलने वाले पैसे पर रोक लगा देती है. रिपोर्ट में इन एनजीओ और इनके कार्यकर्ताओं को समय-समय पर निशाना बनाये जाने की बात भी कही गयी है.

रक्षा मंत्रालय ने सेना के दो मेजर जनरलों की सीबीआई जांच को मंजूरी दी

रक्षा मंत्रालय ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में सेना के दो मेजर जनरल अशोक कुमार और एसएस लांबा की सीबीआई जांच को मंजूरी दे दी है. दिल्ली में तैनात इन दोनों सैन्य अधिकारियों पर आरोप हैं कि इन्होनें विभिन्न स्रोतों से न केवल आय से अधिक संपत्ति बनाई बल्कि पदोन्नति के मामलों में रिश्वत भी ली है. बताया जाता है कि रक्षा मंत्रालय को दोनों के खिलाफ अज्ञात शिकायतें मिली थीं जिनकी प्रारंभिक जांच कराने के बाद रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इनकी जांच सीबीआई से कराने का फैसला किया है. भारतीय सेना में यह पहला मौका है जब सरकार द्वारा शीर्ष सेवारत सेना अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए गये हैं. पिछले साल सेना में 'अति विशिष्ट सेवा मेडल' पा चुके ये दोनों मेजर जनरल इसी साल रिटायर होने वाले हैं.

सौर पैनल घोटाले में कोर्ट ने ओमान चांडी के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया

केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी की मुश्किलें बढती नजर आ रही हैं. छह करोड़ रुपये के सौर पैनल घोटाले का सामना कर रहे चांडी और उनके ऊर्जा मंत्री के खिलाफ त्रिशूर की सतर्कता अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है. अदालत ने यह आदेश बुधवार को इसी मामले में आरोपित सरिता नायर की गवाही के बाद दिया है. सरिता नायर ने जांच आयोग के सामने कहा था कि उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी के माध्यम से चांडी को 1.9 करोड़ रुपए और ऊर्जा मंत्री अर्यादन मोहम्मद को 40 लाख रुपए की रिश्वत दी थी. सरिता के अनुसार मुख्यमंत्री ने इन पैसों के बदले उनकी सोलर कंपनी को सरकारी सब्सिडी और तमाम तरह की रियायतें देने का वादा किया था. इससे पहले दिसंबर माह में इस मामले के दूसरे मुख्य आरोपी बीजू राधाकृष्णन ने भी जांच आयोग के सामने मुख्यमंत्री को 5.50 करोड़ रुपये की रिश्वत देने की बात कही थी. मुख्यमंत्री चांडी जांच आयोग के सामने इन आरोपों को नकार चुके हैं.