एचएसबीसी बैंक की स्विट्जरलैंड स्थित प्राइवेट बैंकिंग इकाई में गोपनीय खाते रखने वालों की एक नई सूची सामने आई है जिसमें अंबानी बंधुओं सहित कई चर्चित नाम शामिल हैं.
स्विस बैकों में किस की कितनी रकम जमा है, इस विषय पर भारत में बीते कुछ समय के दौरान राजनीतिक माहौल कई बार गरमाया है. इस संबंध में ताजा खबर यह है कि एचएसबीसी बैंक की स्विट्जरलैंड स्थित प्राइवेट बैंकिंग इकाई में गोपनीय खाते रखने वालों की एक नई सूची लीक हुई है. इसमें 2007 तक इन खातों में जमा रकम का ब्योरा है.
द इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के मुताबिक इस सूची में 200 देशों के नागरिकों के नाम हैं. इन सब के खातों में कुल मिलाकर सौ अरब डॉलर से ज्यादा की रकम जमा है. वरिष्ठ पत्रकार रितु सरीन की इस खबर के मुताबिक इस सूची में 1195 भारतीयों के नाम भी हैं. उनकी कुल रकम का आंकड़ा 25420 करोड़ रु के करीब बैठता है. इनमें बड़े कारोबारी भी हैं और नेता भी. मुकेश अंबानी, उनके भाई अनिल अंबानी, आनंद चंद बर्मन, राजन नंदा, यशोवर्धन बिड़ला, चंद्रू लक्ष्मण दास रहेजा, दत्ताराज सलगावकर, भद्रश्याम कोठारी और श्रवण गुप्ता जैसे उद्योगपतियों के नाम इस सूची में हैं. सूची में कई हीरा व्यवसायी भी हैं. इनमें रसेल मेहता, अनूप मेहता, सौनक पारीख, चेतन मेहता, गोविंद भाई ककाड़िया और कुणाल शाह शामिल हैं.
कई नेताओं और उनके रिश्तेदारों के नाम भी सूची में हैं. उदाहरण के लिए यूपीए सरकार में मंत्री रहीं प्रणीत कौर, पूर्व कांग्रेस सांसद अनु टंडन, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे की पत्नी नीलम नारायण राणे और पुत्र नीलेश राणे, कांग्रेस नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री वसंत साठे के परिजन और बाल ठाकरे की बहू स्मिता ठाकरे.
सूची में मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी, यशोवर्धन बिड़ला, प्रणीत कौर और स्मिता ठाकरे जैसे चर्चित नाम शामिल हैं.
खबर के मुताबिक पूरी सूची पर नजर दौड़ाई जाए तो इसमें बड़े ड्रग माफियाओं से लेकर हथियारों के सौदागरों और तानाशाहों तक के नाम हैं. इससे बैंक के काम करने के तरीके पर कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं.
गौरतलब है कि 1195 भारतीयों के नाम वाला यह नया आंकड़ा 2011 में फ्रांसीसी अधिकारियों द्वारा भारत को सौंपे गए 628 नामों से लगभग दोगुना है. संभावना जताई जा रही है कि इस नई जानकारी के बाद काले धन पर जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआइटी) की जांच के दायरे में विस्तार होगा.
इस बीच, वित्त मंत्री अरुण जेटली का बयान आया है कि एचएसबीसी के अवैध खाताधारकों के खिलाफ कार्रवाई जारी है. जेटली के मुताबिक 2014 से शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत 350 लोगों के खिलाफ पेनाल्टी की कार्रवाई भी हुई है. वित्तमंत्री अतीत में कह चुके हैं कि कालेधन को लेकर चल रही जांच 31 मार्च से पहले पूरी हो जाएगी. गौरतलब है कि इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमबी शाह की अगुवाई वाली एसआईटी भी काम कर रही है. इसने दिसंबर, 2014 में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि एचएसबीसी की जिनेवा शाखा में काला धन रखने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई को जल्द तार्किक परिणति तक पहुंचाया जाएगा.

बैंक का पक्ष

खबरों के मुताबिक दस्तावेज बताते हैं कि बैंक ने कई खाताधारकों की टैक्स चोरी में मदद की. एचएसबीसी पर आरोप लग रहे हैं कि उसने अपने खाताधारकों को बताया कि कानून से एक कदम आगे कैसे रहा जा सकता है.
बताया जाता है कि जब बैंक को खातेदारों के संबंध में चल रही जांच की जानकारी दी गई तो पहले तो बैंक ने इन जानकारियों को नष्ट करने के लिए कहा. लेकिन जब उसे रिपोर्टिंग टीम की व्यापक खोजबीन और इससे मिली चिंताजनक जानकारियों के बारे में बताया गया तो बैंक की प्रतिक्रिया बदल गई. उसने माना कि उसके स्विस प्राइवेट बैंक में नियमों के पालन व खातेदारों के बारे में तहकीकात के विषय में लापरवाही बरती गई. लेकिन उसका तर्क था कि उस वक्त बैंकिंग उद्योग में नियम-कानून लचर थे और उनका पालन आज की तरह सख्ती से नहीं होता था.  बैंक के मुताबिक अब वह नए सिरे से इस विषय पर ध्यान दे रहा है और यही वजह है कि 2007 के बाद से एचएसबीसी का स्विस प्राइवेट बैंक अपने 70 फीसदी खातेदारों के खाते हटा चुका है.

काले धन के काले पहलू

ऐसी अघोषित रकम के कई पहलू हैं. अलग-अलग अनुमानों के मुताबिक टैक्स का स्वर्ग कहे जाने वाले देशों में कुल मिलाकर 7.6 खरब डॉलर की रकम जमा है. इससे दुनिया भर की सरकारों को हर साल तकरीबन 200 अरब डॉलर की चपत लग रही है.
यह भी आरोप लगते रहे हैं कि यह पैसा आतंकवाद की फसल को खाद-पानी देने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. 2012 में अमेरिकी सीनेट की एक रिपोर्ट में एचएसबीसी द्वारा उन लोगों को भी अपना ग्राहक बनाने पर चिंता जताई गई थी जिनके अल-कायदा से रिश्ते हैं. बताया जाता है कि ओसामा-बिन-लादेन ने एक बार अपनी टिप्पणी में ऐसे 20 लोगों और संस्थाओं का जिक्र गोल्डन चेन के रूप में किया था.

भारत में हुई अब तक की कार्रवाई

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के शीर्ष अधिकारियों का हवाला देते हुए खबर बताती है कि अब तक एचएसबीसी खाताधारकों की 3150 करोड़ रुपए की अघोषित आय का पता लगाया जा चुका है. लेकिन प्राप्त आंकड़ों में कुछ खामियां भी बताई जाती हैं. करीब 200 खाताधारकों के खाते में कोई रकम नहीं है, जबकि 211 खाते अप्रवासी भारतीयों के निकले. सीबीडीटी और एसआइटी समय-समय पर सर्वोच्च न्यायालय को इन जानकारियों से अवगत कराते रहे हैं.
सीबीडीटी अधिकारियों के मुताबिक पिछले महीने तक 27 एचएसबीसी खाताधारकों ने जुर्माना अदा कर दिया था और 15 लोग खातों के बारे में जानकारी छिपाने के मामले में आयकर विभाग की कार्रवाई का सामना कर रहे हैं.

खबर पर प्रतिक्रिया

अखबार ने जिन लोगों के नाम छापे हैं उनमें से कई ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी है. रिलांयस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रवक्ता को उद्धृत करते हुए कहा गया है कि मुकेश अंबानी का दुनिया में कहीं भी कोई अवैध खाता नहीं है और न अतीत में कभी रहा है. गौरतलब है कि इस सूची के मुताबिक 2007 तक मुकेश अंबानी के स्विटजरलैंड स्थित एचएसबीसी बैंक के खाते में करीब 164 करोड़ रु थे. उनके छोटे भाई अनिल अंबानी के लिए भी यह आंकड़ा इतना ही था. अनिल अंबानी की तरफ से भी ऐसी ही प्रतिक्रिया आई है. इसमें कहा गया है कि अंबानी का विदेश में कोई भी एसएचबीसी खाता नहीं है. पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रणीत कौर ने एक बार फिर कहा है कि उनका विदेश में कोई बैंक खाता नहीं है. उधर, यश बिड़ला समूह, डाबर समूह, जेट एयरवेज और डालमिया सीमेंट जैसे कारोबारी घरानों की प्रतिक्रिया का लब्बोलुआब यह है कि उन्होंने जो भी किया है वह देश के कानूनों की हद में रहकर ही किया है और समय-समय पर इस मुद्दे पर अपना जवाब भी दिया है जिससे संबंधित संस्थाएं संतुष्ट हुई हैं.