अमेरिका में जीका वायरस का पहला मामला सामने आया है. खबरों के अनुसार अमेरिका के टेक्सास में एक व्यक्ति जीका वायरस से पीड़ित पाया गया है. डॉक्टरों का कहना है कि यह व्यक्ति यौन सम्बन्धों के कारण जीका वायरस की चपेट में आया है. टेक्सास के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार डलास काउंटी में रहने वाले इस व्यक्ति ने एक ऐसी महिला के साथ यौन संबंध बनाए थे जो पहले से इस वायरस से पीड़ित थी. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में भी जीका वायरस के दो मामले सामने आए हैं. कैरेबियाई देशों से हाल ही में सिडनी लौटे दो आस्ट्रेलियाई नागरिकों में जीका वायरस के लक्षण पाए गए हैं. हालांकि वहां के एक स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है, 'हम पहले भी ऐसे मामलों से निपट चुके हैं इसीलिए इन दोनों व्यक्तियों में पाए गए जीका के शुरुआती लक्षणों पर काबू पा लिया गया है.' ऑस्ट्रेलिया में 2014 में जीका वायरस के चार मामले सामने आए थे.
उधर, जहां दुनिया की बड़ी कंपनियां जीका वायरस की दवा या वैक्सीन बनाने के लिए संघर्ष कर रही हैं, वहीं हैदराबाद की एक बायोटेक कंपनी ने जीका वायरस से निजात दिलाने की वैक्सीन बना लेने का दावा किया है. कंपनी के प्रमुख कृष्णा इला का कहना है कि उन्होंने दो वैक्सीन तैयार किए हैं, लेकिन उसका किसी जानवर या इंसान पर ट्रायल करने में लंबा वक्त लग सकता है. इला ने इस वैक्सीन को जीका वायरस से पीड़ित देशों में पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद मांगी है.
सऊदी अरब ने फलस्तीनी कवि की मौत की सजा को आठ साल कैद और 800 कोड़ों में बदला
अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बाद सऊदी अरब की एक अदालत ने इस्लाम को न मानने का दोषी पाए गए एक फलस्तीनी कवि की फांसी की सजा को बदल दिया है. अदालत ने कवि अशरफ फयाज की फांसी की सज़ा को आठ साल की क़ैद में बदल दिया है साथ ही उन्हें 800 कोड़े भी मारे जाएंगे. अदालत ने उनके कविता लिखने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. सऊदी अरब में पैदा हुए अशरफ फयाज फलस्तीनी शरणार्थी परिवार से हैं. फयाज पर नास्तिकता का प्रचार करने और ईश-निंदा को बढ़ावा देने का आरोप था जिसके कारण उन्हें 2015 में फांसी की सजा सुनाई गई थी. फयाज की इस सजा का दुनिया भर के लेखकों और बुद्धिजीवियों ने विरोध किया था. इस बार के बर्लिन इंटरनेशनल लिटरेचर फेस्टिवल में भी यह मुद्दा कई बार उठाया गया और माना जाता है कि इन सब वजहों सऊदी प्रशासन पर काफी दबाव था.
लालू यादव के मधेसियों का समर्थन करने पर नेपाल भड़का
नेपाल में आंदोलन कर रहे मधेसियों के समर्थन में बिहार के नेता लालू प्रसाद यादव के द्वारा दिए गए बयान पर नेपाल ने नाराजगी जताई है. नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि नेपाल के आंतरिक मुद्दों पर बिहार के कुछ बड़े नेताओं द्वारा की गई टिप्पणियां गलत, भड़काऊ और जमीनी हकीकत से एकदम परे हैं और इनसे दोनों देशों के मधुर संबंध कमजोर हो सकते हैं. दरअसल, बीते सोमवार को कुछ मधेसी नेताओं ने पटना में आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव से मुलाकात कर उनसे अनुरोध किया था कि वे भारत सरकार पर दबाव बनाएं, जिससे भारत नेपाल सरकार से मधेसियों की मांगों को पूरा करने को कहे. लालू ने इन नेताओं को आश्वासन देते हुए कहा था कि मधेसियों की मांगे पूरी तरह जायज हैं और नेपाल सरकार को इन्हें मान लेना चाहिए.