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इस सूची में क्या है?

इस सूची में एचएसबीसी बैंक के एक लाख से भी ज्यादा उन खातेदारों का विवरण है जिनका खाता बैंक की जेनेवा स्थित शाखा में है. सूची बताती है कि 2006-07 तक इन खातों में जमा राशि कितनी थी. 203 देशों के नागरिकों के इन खातों में कुल जमा रकम का आंकड़ा है 102.05 अरब डॉलर.

इनमें से कितने लोग भारत से हैं.

नागरिकता, जन्म स्थान, पते और पहचान संबंधी दस्तावेजों के हिसाब से सूची में 1688 भारतीय हैं. तीन महीने की अपनी पड़ताल के बाद द इंडियन एक्सप्रेस ने पाया कि यह आंकड़ा 1,195 है. इसकी वजह यह थी कि कुछ एंट्रियां डुप्लीकेट थीं तो कुछ नाम ऐसे लोगों के भी थे जो आजादी के बाद पाकिस्तान चले गए थे.

यह सूची किसको मिली और कहां से मिली?

यह सूची पेरिस स्थित अखबार ले मोंदे के पत्रकारों को फ्रांस सरकार में मौजूद अपने सूत्रों के जरिये मिली. इसमें दुनिया भर के लोगों के नाम शामिल थे इसलिए अखबार ने वाशिंगटन स्थित इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) को अपने साथ जोड़ा. आईसीआईजे ने 45 देशों के 140 से भी ज्यादा पत्रकारों के साथ हाथ मिलाया. ये पत्रकार द इंडियन एक्सप्रेस, द गार्डियन और बीबीसी जैसे समाचार संस्थानों से थे. कंसोर्टियम ने तय किया कि सभी इस खबर को एक साथ छापेंगे और तारीख होगी नौ फरवरी.

क्या इस सूची में वे भारतीय भी शामिल हैं जिनका नाम एचएसबीसी के खातेदारों वाली उस सूची में है जो भारत सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को सौंपी है?

हां. फ्रांसीसी अधिकारियों ने 2011 में भारत को 628 नामों की एक सूची सौंपी थी. ये नाम इस नई सूची में भी हैं. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उसने जिन खातेदारों से बात की उनमें से कइयों ने माना कि आयकर विभाग के अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया है.

क्या ये सारे खाते अघोषित हैं?

नहीं, सूची में शामिल खातों में से कई ऐसे भी हो सकते हैं जो जरूरी अनुमतियों के बाद खोल गए हों. और कई खाते इसके उलट भी हो सकते हैं. इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि बीते महीने तक भारतीय अधिकारियों द्वारा एचएसबीसी के ऐसे खातों में जमा 3150 करोड़ रु की रकम को कर के दायरे में लाया जा चुका था.