मधेसी आंदोलन के चलते भारत-नेपाल के बीच पैदा हुए मनमुटाव का फायदा उठाते हुए चीन वहां अपना दबदबा बढ़ाता जा रहा है. अब चीन नेपाल में एक व्यापारिक शहर विकसित करने जा रहा है. इस शहर को विकसित करने के लिए वह नेपाल में 450 मिलियन डालर(करीब 30 अरब रुपए) खर्च करेगा. चीन इस शहर में एक बड़ा व्यापारिक केंद्र बनाएगा. नेपाल के एक समाचार पत्र के अनुसार राजधानी काठमांडू से 15 किलोमीटर दूर यह प्रस्तावित केंद्र 100 हेक्टेयर में बनेगा. इसमें होटल, रेस्तरां, अस्पताल, अनाथालय, स्विमिंग पूल और कारखानों सहित रहने के लिए रिहायशी इमारतें भी बनेंगी.
कहा जा रहा है कि चीन जहां इस केंद्र को दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा बाजार बनाकर यहां से भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया क्षेत्र के बड़े बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाएगा. वहीं, इसके जरिये नेपाल को भी पूरी दुनिया से आयात-निर्यात करने में आसानी होगी. इस केंद्र से नेपाल सरकार को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अगर भविष्य में कभी मधेसी आंदोलन जैसा संकट दोबारा आता है तो वह भारत पर निर्भर न रहकर चीन से पूरी मदद ले सकेगी. नेपाल-चीन संबंधों इसे काफी महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा सकता है क्योंकि पिछले महीने ही चीन ने नेपाल में अपने बेहतर आवागमन के लिए एक एयरपोर्ट बनाने की घोषणा की थी.
हाफिज सईद ने पठानकोट जैसे और हमले करने की धमकी दी
जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद ने भारत में पठानकोट जैसे और हमले करने की धमकी दी है. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में एक रैली को संबोधित करते हुए सईद ने कहा कि भारत को पठानकोट जैसे अभी और दर्द दिए जाएंगे. उसका कहना था कि कश्मीर की आजादी ही उसकी जिंदगी का एक मात्र मकसद है और इसे पाने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकता है. सईद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सलाह देते हुए कहा कि मोदी को कश्मीर के लोगों के मन की बात को समझने की कोशिश करनी चाहिए, जबकि वहां फौजी आम लोगों का नरसंहार कर रहे हैं. उसके अनुसार जब चीजें दबाई जाती हैं तो कई दिशाओं से उसका जवाब मिलता है और मोदी की नीति कश्मीरियों को दबाने की ही है.
विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे इक्वाडोर दूतावास को जल्द छोड़ेंगे
विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे लंदन स्थित इक्वाडोर दूतावास को जल्द छोड़ देंगे. उन्होंने कहा है कि अगर यूएन का पैनल उनके खिलाफ फैसला देता है तो वह खुद को ब्रिटेन पुलिस के हवाले कर देंगे. असांजे के अनुसार, 'अगर शुक्रवार को यूएन यह ऐलान कर देता है कि मैं ब्रिटेन और स्वीडन के खिलाफ अपना केस हार चुका हूं तो मैं उसी दिन दूतावास खाली कर दूंगा. मैं खुद को ब्रिटिश पुलिस के हवाले भी कर दूंगा, क्योंकि यूएन के इस फैसले के बाद अपील करने का कोई मतलब नहीं रह जाएगा.' हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई है कि यूएन उनके पक्ष में ही फैसला देते हुए उनकी गिरफ्तारी के आदेश रद्द कर देगा.
असांजे पर स्वीडन की दो महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. असांजे इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं और इस मामले में प्रत्यर्पण से बचने के लिए उन्होंने लंदन स्थित इक्वाडोर दूतावास में शरण ले रखी है. उनका कहना है कि अगर वे स्वीडन गए तो वहां की सरकार उन्हें अमेरिका के हवाले कर देगी जहां उन पर दस्तावेज़ लीक करने के आरोप में मुक़दमा चलाया जाएगा. असांजे ने 2010 में अमेरिका के गुप्त सरकारी दस्तावेज़ सार्वजनिक कर दिए थे और इसके बाद अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया था.