भले ही संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) ने विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे की गिरफ्तारी को अवैध ठहरा दिया हो लेकिन इससे उनकी मुश्किलें फिलहाल खत्म होती नहीं दिख रही हैं. ब्रिटेन और स्वीडन ने उनके हक में आए यूएन पैनल का फैसला ठुकरा दिया है. ब्रिटेन ने साफतौर पर कहा है कि वह यूएन के फैसले को नहीं मानेगा और लंदन स्थित इक्वाडोर के दूतावास से बाहर निकलते ही असांजे को गिरफ्तार कर लेगा. दरअसल, प्रत्यर्पण से बचने के लिए असांजे ने जून, 2012 से इक्वाडोर के दूतावास में शरण ले रखी है. इसके बाद उन्होंने अपनी आजादी के लिए यूएन से 2014 में गुहार लगाई थी. दुनियाभर के अवैध हिरासत के मामलों को देखने वाले यूएन के इस पैनल ने बीते शुक्रवार को असांजे की नजरबंदी को गैरकानूनी बताया था और उनकी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए ब्रिटेन सरकार से उन्हें मनचाही जगह पर जाने की अनुमति देने को कहा था. इस घटनाक्रम से जुड़ी महत्वपूर्ण बात है कि कोई भी देश कानूनी रूप से इस पैनल का फैसला मानने के लिए बाध्य नहीं है. इसी कारण ब्रिटेन और स्वीडन ने यूएन पैनल के इस निर्णय को कोई तवज्जो नहीं दी है. उधर, असांजे ने यूएन पैनल को धन्यवाद देते हुए कहा है कि स्वीडन और ब्रिटेन को पैनल के इस फैसले का सम्मान करना चाहिए.
नेपाल में व्यापारियों ने मधेसियों के तंबू उखाड़े, भारत के रुख में अचानक नरमी आई
पिछले चार महीने से सीमा पर जारी नाकेबंदी से परेशान होकर भारत और नेपाल के व्यापारियों ने सीमा पर लगे मधेसियों के तंबुओं को उखाड़ फेंका. दोनों देशों के व्यापारियों ने पहले एक बैठक की और इसके बाद इस घटना को अंजाम दिया. दरअसल, मधेसियों के आंदोलन की वजह से नेपाल के लोग तो जरूरी वस्तुओं की किल्लत से जूझ ही रहे हैं साथ ही इससे सीमावर्ती कारोबार पर भी बुरा असर पड़ रहा है. इस वजह से दोनों तरफ के व्यापारियों में काफी गुस्सा था. उधर, गुरूवार से बीते चार महीनों में पहली बार भारत के सामान लदे 150 ट्रक नेपाल पहुंचे हैं. ट्रकों के नेपाल पहुंचने पर वहां के लोगों में काफी ख़ुशी है. नेपाल के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी कहा है कि भारत की ओर से नाकेबंदी हटाने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है. लेकिन, हमें ख़ुशी है कि रक्सौल के रास्ते सामान लदे ट्रकों को नेपाल आने दिया जा रहा है. वहीं, भारत के रुख में अचानक आए इस बदलाव का मुख्य कारण नेपाल और चीन की बढ़ती नजदीकियों को माना जा रहा है.
ताइवान में भूकंप से 7 लोगों की मौत
दक्षिणी ताइवान में शनिवार तड़के आये भूकंप में सात लोगों की मौत हुई है, जबकि 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. राजधानी ताइपे से करीब 300 किलोमीटर दूर ताइनान शहर में आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.4 आंकी गई है. खबरों के अनुसार इस भूकंप का सबसे ज्यादा असर शहर की एक 16 मंजिला इमारत पर पड़ा जो कि पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है. बताया जाता है कि मरने वाले सातों लोग इसी इमारत में रहते थे. अधिकारियों के अनुसार फिलहाल दमकल कर्मियों ने इस इमारत के मलबे से काफी लोगों को बाहर निकाल लिया है लेकिन अभी भी इसमें करीब 50 लोगों के दबे होने की आशंका है. अधिकारियों का कहना है कि भूकंप के समय लोग गहरी नींद में सो रहे थे जिस वजह से ज्यादा लोग हताहत हुए हैं. ताइवान दो टेक्टोनिक प्लेटों के मिलने के स्थान के काफी क़रीब स्थित है इसीलिए यहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं. इससे पहले यहां जून 2013 में आए भूकंप में चार जबकि सितंबर 1999 में आए भूकंप में 2400 लोगों की मौत हुई थी.