नेट न्यूट्रैलिटी पर भारत सरकार के फैसले पर फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने निराशा जताई है. साथ ही उनका कहना है कि उन्होंने अभी हार नहीं मानी है. दरअसल, भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने फेसबुक के 'फ्री इंटरनेट' अभियान को झटका देते हुए नेट न्यूट्रैलिटी का समर्थन किया है. ट्राई ने कहा है कि भारत में उपभोक्ताओं को इंटरनेट सेवाएं एक समान मूल्य पर ही उपलब्ध होंगी. ट्राई के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर मार्क जुकरबर्ग की फ्री बेसिक्स स्कीम पड़ा है. इसके जरिये वे ग्रामीण भारत के लाखों लोगों को मुफ्त में इंटरनेट सुविधा मुहैया कराने की बात कह रहे थे.
ट्राई के इस फैसले पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में जुकरबर्ग ने कहा, 'इंटरनेट डॉट ओआरजी के जरिये बहुत कुछ नया किया जाना संभव है और हम तब तक इस दिशा में काम करते रहेंगे, जब तक सभी की पहुंच इंटरनेट तक न हो जाए.' उन्होंने ने आगे कहा, 'हालांकि हम इस फैसले से निराश हैं, लेकिन मेरी इस योजना ने दुनियाभर में बहुत-से लोगों की जिंदगी में सुधार किया है और भारत को इससे जोड़ना बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां बड़ी आबादी इंटरनेट की पहुंच से दूर है.' जुकरबर्ग के अनुसार, 'मेरी इस योजना के जरिये भारत के इन लोगों को साथ जोड़ लेने से उन्हें गरीबी से मुक्ति मिलेगी, लाखों नौकरियां पैदा होंगी तथा शिक्षा के अवसरों का विस्तार होगा, और यही वजह है कि मैंने अभी तक हार नहीं मानी है.'
कनाडा सीरिया-इराक में और हवाई हमले नहीं करेगा
कनाडा सीरिया और इराक में आईएस पर अब और हमले नहीं करेगा. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडेव का कहना है कि उन्हें ये समझ में आ गया है कि सिर्फ हवाई हमले करके वहां के स्थानीय लोगों को दीर्घकालीन फायदा नहीं पहुंचाया जा सकता. प्रधानमंत्री ने कहा है कि कनाडाई विमान 22 फरवरी से आईएस के ठिकानों पर बमबारी करना बंद कर देंगे. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कनाडा उन इलाक़ों में अपने दो निगरानी विमानों की तैनाती बनाए रखते हुए आईएस से लड़ रहे स्थानीय सैनिकों को प्रशिक्षण देता रहेगा. बीते साल अक्टूबर में प्रधानमंत्री बने ट्रूडेव ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान कनाडा के जंगी विमानों को सीरिया और इराक से वापस बुलाने का वादा किया था. दरअसल, कनाडा के लोग अफगानिस्तान में बड़ी संख्या में अपने सैनिकों की मौत के बाद से सरकार के सैनिकों को बाहर भेजने के फैसले का विरोध कर रहे हैं.
भारत-नेपाल सीमा पर नाकेबंदी खत्म, लेकिन मधेसी आंदोलन जारी रहेगा
नेपाली प्रधानमंत्री केपी ओली के भारत दौरे से महज दो हफ्ते पहले मधेसियों की नाकेबंदी खत्म हो गई है. मधेसियों ने सोमवार को भारत की सीमा से सटे मुख्य कारोबारी केंद्रों और रास्तों की नाकेबंदी खत्म करने का फैसला किया है. मधेसियों का कहना है कि आम नागरिकों को आ रही दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है. हालांकि, मधेसी मोर्चे ने साफतौर पर कहा है कि नए संविधान को लेकर उनका विरोध बदस्तूर जारी रहेगा. मधेसी मोर्चा के नेता सर्वेन्द्रनाथ शुक्ल ने कहा, ‘हमने सीमा पर विरोध करने, यातायात को बाधा पहुंचाने और सरकारी दफ्तराें को बंद करवाने जैसे अभियानों को खत्म कर दिया है, लेकिन जब तक सरकार कोई ठोस निर्णय नहीं लेती तब तक मधेसी आंदोलन जारी रहेगा.’ खबरों के अनुसार मधेसियों ने आगामी 12 फरवरी को सभी जिला मुख्यालयों पर जोरदार प्रदर्शन करने का ऐलान किया है. वहीं, नाकेबंदी खत्म होते ही भारत ने अपने रक्सौल डिपो से तीन लाख लीटर पेट्रोलियम पदार्थों को नेपाल भेजा है. बता दें कि नए संविधान में पर्याप्त प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे मधेसियों ने सीमा पर पिछले पांच महीनों से नाकेबंदी कर रखी थी. इससे भारत से नेपाल को होने वाली पेट्रोल, गैस, डीजल, दवाओं समेत जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति नहीं हो पा रही थी.