सीरिया के हालात से चिंतित विश्व शक्तियों ने वहां एक सप्ताह के भीतर युद्धविराम और मानवीय मदद बढ़ाए जाने पर सहमति जता दी है. अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन केरी ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की सह मेजबानी वाली वार्ता के बाद कहा कि 17 देशों ने एक सप्ताह की समय सीमा के अंदर पूरे सीरिया में युद्धविराम लागू करने पर सहमति जताई है. साथ ही उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीरिया सहायता समूह भी वहां फंसे लोगों तक मानवीय मदद तत्काल तेज करने पर सहमत हो गया है. केरी का कहना था, 'इस सप्ताह के अंत से सीरिया में जरूरी चीजों का वितरण शुरू हो जाएगा. यह काम पहले उन स्थानों पर किया जाएगा, जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है. इसके बाद इन्हें दुर्गम स्थानों तक पहुंचाया जाएगा.'
हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री ने साफ़ किया है कि यह संघर्ष विराम सीरिया के सभी पक्षों (विद्रोहियों) पर लागू होगा. लेकिन यह उन संगठनों पर लागू नहीं होगा जिन्हें यूएन सुरक्षा परिषद ने चरमपथी संघठन घोषित किया है. इनमें आईएस और अल नुसरा फ्रंट जैसे चरमपंथी संगठन शामिल हैं. केरी के मुताबिक इन संगठनों पर हमले जारी रहेंगे. इससे पहले इस महीने की शुरूआत में प्रस्तावित शांति वार्ता उस समय असफल हो गयी थी जब सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद की सेना ने रूसी विमानों के समर्थन से विद्रोहियों के कब्जे वाले अलेप्पो शहर पर हमला कर दिया था. इसके बाद विद्रोही संगठन इस वार्ता से हट गए थे.
मैक्सिको की जेल में भीषण दंगा, 49 की मौत
मेक्सिको की एक जेल में कैदियों के दो गुटों के बीच हुए संघर्ष में 49 कैदियों की मौत हो गई है. यह घटना नीवो लेयोन नामक प्रांत की टोपो चिको जेल में हुई. यहां के गवर्नर जेमी रोड्रिगुएज ने कहा कि इस घटना में कुख्यात ज़ेटास ड्रग कार्टेल के सदस्यों का हाथ है. हालांकि, पुलिस ने दंगे का कारण अभी नहीं बताया है लेकिन, एक अखबार के मुताबिक ज़ेटास ड्रग कार्टेल के एक कैदी के जेल से फ़रार होने की कोशिशों के बाद यह हिंसा भड़की. पुलिस के मुताबिक अब स्थिति नियंत्रण में है. मैक्सिको की जेलों में ड्रग माफियाओं के बीच हिंसा और जेल तोड़ने की घटनाएं आम हैं. यहां की जेलों में साल 2013 से अब तक 50 से ज्यादा कैदी मारे जा चुके हैं जबकि 60 से ज्यादा फ़रार हो चुके हैं.
जुकरबर्ग की नाराजगी के बाद फेसबुक बोर्ड के सदस्य मार्क एंड्रीसन ने माफ़ी मांगी
फेसबुक बोर्ड के सदस्य मार्क एंड्रीसन ने ट्राई के नेट न्यूट्रैलिटी के समर्थन में दिए गए फैसले पर किये गए अपने विवादित ट्वीट के लिए माफी मांगी है. उन्होंने अपने इस ट्वीट पर फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग के नाराजगी जताने के बाद ऐसा किया है. एंड्रीसन ने माफ़ी मांगते हुए कहा, ‘मैं भारत और भारतीय जनता का बड़ा प्रशंसक हूं जो मेरे प्रति काफी उदार रहे हैं. मेरी टिप्पणी से पहुंची तकलीफ के लिए मैं माफी मांगता हूं और अपने बयान को वापस लेता हूं.' मंगलवार को एंड्रीसन ने नेट न्यूट्रैलिटी पर ट्राई के फैसले को उपनिवेशवाद विरोधी बताते हुए कहा था कि अच्छा होता यदि भारत ब्रिटिश शासन के अधीन ही रहता. सोशल मीडिया पर उनकी इस टिप्पणी की तीखी आलोचना होने के बाद उन्होंने अपने इस ट्वीट को हटा भी लिया था. लेकिन, इसके बाद भी मार्क जुकरबर्ग ने एंड्रीसन के बयान पर दुःख जताते हुए खुद को इससे अलग कर लिया था. जुकरबर्ग ने कहा था कि मैं ऐसी बातों का समर्थन नहीं करता क्योंकि भारत मेरे लिए काफी अहम है.