दिल्ली के जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) में राष्ट्र विरोधी नारेबाजी को लेकर मचे बवाल के बीच सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में तिरंगा फहराना अनिवार्य कर दिया गया है. गुरूवार को मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की अध्यक्षता में हुई कुलपतियों की बैठक में यह फैसला लिया गया है. बताया जाता है कि बैठक में स्मृति ईरानी ने इस प्रस्ताव को कुलपतियों के सामने रखा जिस पर देश के सभी 46 केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने अपनी मोहर लगा दी. समाचार एजेंसी पीटीईआई के अनुसार इस फैसले को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय का कहना है कि उसके इस कदम से हर केंद्रीय विश्वविद्यालय में एकता और अखंडता को प्रकट करने के साथ ही एक मज़बूत और एकजुट भारत का संदेश जाएगा. मंत्रालय के अनुसार इस नए नियम के तहत केंद्रीय विश्वविद्यालयों में हर रोज 207 फ़ुट ऊंचे खंभे पर तिरंगा लगाना ज़रूरी होगा.

उधर, सरकार के इस फैसले पर विपक्षी दलों ने निशाना साधा है. कांग्रेस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि देशभक्ति देश के संविधान में विश्वास रखने से आती है सिर्फ तिरंगा फहराने और वंदे मातरम गाने से देशभक्ति नहीं आ जाती. वहीं, माकपा नेता वृंदा करात ने भी इस फैसले के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की है.

कोर्ट के बाहर मारपीट के मामले में भाजपा विधायक गिरफ्तार, तुरंत मिली जमानत

दिल्ली में कोर्ट के बाहर मारपीट करने के आरोप में गुरूवार को बीजेपी विधायक ओपी शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया. हालांकिउन्हें तुरंत जमानत भी दे दी गई. जमानत मिलने के बाद भाजपा विधायक ने दावा किया कि उन्हें आठ घंटे की लंबी पूछताछ के बाद जमानत दी गयी है. विधायक का कहना था कि वे इस बात से दुखी हैं कि उन्हें देशद्रोहियों के खि‍लाफ प्रदर्शन करने की वजह से परेशान किया जा रहा है. ओपी शर्मा ने बीती 15 फरवरी को पटियाला हाउस कोर्ट के बाहर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के एक कार्यकर्ता के साथ मारपीट की थी.

केरल में आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या मामले में माकपा के सात कार्यकर्ता गिरफ्तार

केरल के कन्नूर जिले में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता सुजीत की हत्या के मामले में पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि ये सभी युवक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के कार्यकर्ता हैं. सोमवार रात को कन्नूर के पापिनेसेरी में करीब 10 लोगों ने सुजीत के घर में घुसकर उसकी हत्या कर दी थी. मीडिया में आयी खबरों के अनुसार कन्नूर जिले में चुनाव होने वाले हैं, जिस वजह से वामपथियों और भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच कई बार झड़पें हों चुकीं हैं. राज्य भाजपा ने इस घटना के लिए माकपा को ही जिम्मेदार बताया है. जबकि माकपा के राज्य सचिव कोडियरी बालाकृष्णन ने इसे राजनीतिक हत्या मानने से इनकार कर दिया है. उनका कहना है कि यह संबंधित लोगों के बीच का आपसी मामला था. पुलिस का कहना है कि वह अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है और जांच के बाद ही कुछ बता पाएगी.

सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल में सरकार गठन को इजाज़त दी

अरुणाचल मामले में कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट से निराशा हाथ लगी है. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में सरकार बनाने का रास्ता साफ करते हुए वहां सरकार के गठन को मंज़ूरी दे दी है. इससे पहले बुधवार को कोर्ट ने राज्य में यथास्थिति कायम रखने का आदेश देते हुए कहा था कि पहले वह विधानसभा अध्यक्ष के दवारा 14 कांग्रेस विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने से जुड़े दस्तावेज देखना चाहता है. गुरुवार को गुवाहाटी हाईकोर्ट के द्वारा ये दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे गए. इसके बाद शीर्ष अदालत ने यथास्थिति का आदेश वापस लेते हुए सरकार गठन का आदेश दे दिया. सर्वोच्च न्यायालय ने 14 विधायकों की अयोग्यता का मामला वापस गुवाहाटी हाईकोर्ट भेजते हुए उसे इस मामले को 2 हफ्तों में निपटाने को कहा है. कोर्ट ने यह भी साफ़ किया है कि उसके इस आदेश के बाद राज्य में जो भी होगा, उसे कोर्ट में लंबित चल रहे मामले का नतीजा आने पर बदला भी जा सकता है. वहीं, कोर्ट के फैसले के बाद माना जा रहा है कि अरुणाचल में कांग्रेस के 19 बागी विधायक, भाजपा के 11 और दो निर्दलीय मिलकर सरकार बना लेंगे. बता दें कि केंद्र सरकार पहले ही अरूणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन हटाए जाने की सिफारिश कर चुकी है.