लव के लिए सलमान कुछ भी करेगा!

लव के लिए सलमान कुछ भी करेगा! कभी-कभी पुरानी हिंदी फिल्मों के टाइटल यथास्थिति बयां करने में कितने कारगर सिद्ध होते हैं न. खैर, लव की खातिर सलमान इन दिनों न सिर्फ अपनी एक्स-गर्लफ्रेंड्स का खूब ख्याल रख रहे हैं बल्कि अपनी नई गर्लफ्रेंड लूलिया वेंतुर को भी अपनी दुनिया का हिस्सा बनाने के लिए बेजोड़ मेहनत कर रहे हैं.

खबर है कि कैट-रणबीर के ब्रेकअप और ‘फितूर’ के बाक्स-आफिस पर फुक जाने ने सलमान को इतना सेंटी कर दिया कि वे कैटरीना और खुद को लेकर अपने बैनर सलमान खान प्रोडक्शन्स तले एक फिल्म का निर्माण करना चाहते हैं. दूसरी तरफ वे अपनी कथित गर्लफ्रेंड लूलिया वेंतुर के रोमानिया टीवी के लिए होस्ट किए एक रियालिटी शो ‘द फॉर्म’ को न सिर्फ इंडिया में बनाना चाहते हैं बल्कि उसे लूलिया के साथ को-होस्ट भी करना चाहते हैं. ऊपर से वे लूलिया को हिंदी में धाराप्रवाह करना चाहते हैं! इसके लिए उन्होंने एक हिंदी ट्यूटर की व्यवस्था की है लेकिन यह सिर्फ हिंदी फिल्मों में लूलिया को काम दिलवाने के लिए सलमान द्वारा उठाया कदम नहीं है. वे चाहते हैं कि लूलिया हिंदी सीखें और उनके परिवार से वैसे ही घुलें-मिलें जैसे वे उनके साथ घुलती-मिलती हैं.


'मैं अपने पिता की हाल ही में लॉन्च हुई बायोग्राफी नहीं पढ़ना चाहती. मां-बाप की जिंदगी में हमेशा कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें बच्चों को कभी नहीं जानना चाहिए.'

सोनाक्षी सिन्हा

(शत्रुघ्न सिन्हा की बायोग्राफी ‘एनीथिंग बट खामोश’ पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें एक चैप्टर उनके और रीना रॉय के करीबी रिश्तों पर है)

टिप्स वाले तौरानी जी का लड़का कब बनेगा स्टार?

फिल्म इंडस्ट्री के हर घर में एक सन रहता है जो हिंदी फिल्मों का स्टार बनना चाहता है. स्टार बनने को बेचैन ऐसे ही एक सन गिरीश कुमार हैं जो टिप्स इंडस्ट्रीज के मालिक रमेश तौरानी के सुपुत्र हैं. रमैया वस्तावैया के बाद इन्हीं गिरीश की लवशुदा भी दर्शकों और समीक्षकों द्वारा नकारी जा रही है लेकिन स्टार बनने की ख्वाहिश है कि दम तोड़ ही नहीं रही.

हाल ही में गिरीश कुमार ने कहा कि अगर शाहरुख खान रोमांस का किंग बनकर थक चुके हैं तो वे उनकी जगह लेने को तैयार हैं! ये भी कि अगर शाहरुख ‘किंग आफ रोमांस’ हो सकते हैं तो वे भी ‘प्रिंस आफ रोमांस’ तो हो ही सकते हैं. उन्होंने सिर्फ यहीं अतिशयोक्ति का हाथ नहीं थामा बल्कि एक मशहूर मैग्जीन के कवर पेज पर जगह बनाने के लिए भी खुद को जरूरत से ज्यादा आंका. खबर है कि एक अंग्रेजी मैग्जीन के कवर पर आने के लिए उन्होंने न सिर्फ मैग्जीन के ऑफिस ढेर सारे मैसेज, ईमेल और फोन किए बल्कि जब बात बनती नहीं दिखी तो खुद एडीटर से मिलने भी पहुंच गए! लेकिन फिर भी बात न बनी तो मैग्जीन वालों से लड़-झगड़कर वापस अपने घर आकर सोफे पर लेट गए. अब सुनने में आ रहा है कि रमेश तौरानी बॉबी देओल वाली ‘सोल्जर’ का सीक्वल बनाना चाहते हैं और गिरीश कुमार को उसमें हीरो लेकर उन्हें फाइनली स्टार बना देना चाहते हैं.


फ्लैशबैक – जब दिलीप कुमार ‘चाणक्य’ होते-होते रह गए

दिलीप कुमार
दिलीप कुमार
दिलीप कुमार ने अगर हिंदी फिल्मों में कई यादगार रोल किए हैं तो कुछ यादगार रोल छोड़े भी हैं. प्यासा पहले उन्हीं के पास आई थी. मदर इंडिया और संगम भी. लॉरेंस आफ अरेबिया जैसी अंतर्राष्ट्रीय फिल्म भी दिलीप साहब ने ठुकराई थी. ऐसी फिल्मों के अलावा कुछ ऐसी फिल्में भी हैं जो दिलीप साहब की हां के बाद शुरू तो हुईं लेकिन कभी पूरी होकर रिलीज न हो सकीं. क्योंकि उन्हें फिल्में बीच में छोड़ने के लिए भी जाना जाता है. उनके सखा के आसिफ की ताजमहल, जानवर और आखिरी मुगल ऐसी ही फिल्में हैं और काला आदमी व शिकवा भी.

चाणक्य का परफेक्ट लुक पाने के लिए दिलीप कुमार विदेश गए थे और विदेशी मेकअप आर्टिस्टों के हुनर ने उन्हें एकदम चाणक्य बना भी दिया था

इन्हीं फिल्मों में एक ‘चाणक्य चंद्रगुप्त’ भी है जिसके बारे में कम ही चर्चा होती है. बीआर चोपड़ा इस फिल्म के निर्देशक थे और इंडस्ट्री में नए आए किशोर शर्मा इसके निर्माता. फिल्म में चाणक्य का किरदार निभाने के लिए दिलीप कुमार को साइन किया गया था और चंद्रगुप्त का किरदार कहते हैं कि धर्मेंद्र निभाने वाले थे. साथ में हेमा मालिनी और परवीन बॉबी भी थीं.

फिल्म को लेकर उत्साह इतना ज्यादा था कि चाणक्य का परफेक्ट लुक पाने के लिए दिलीप कुमार विदेश गए थे और विदेशी मेकअप आर्टिस्टों के हुनर ने उन्हें एकदम चाणक्य बना भी दिया था. चाणक्य वाले बेहतरीन लुक में दिलीप कुमार की खींची गईं तस्वीरें हिंदुस्तान की कई फिल्मी पत्रिकाओं में उस वक्त छपीं लेकिन फिल्म इतनी तैयारियों के बाद भी जल्द ही डिब्बाबंद हो गई. हमेशा के लिए. आज भी ऐसा हो जाने की ठोस वजह कोई नहीं जानता लेकिन कहते हैं कि उस वक्त दिलीप कुमार अपने निर्देशक और निर्माता की योग्यता पर भरोसा नहीं कर पाए थे. उनके अनुसार यह एक बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट था जिसे सही रूप देने के लिए फिल्म को मौजूदा निर्माता और निर्देशक से ज्यादा प्रतिभाशाली शिल्पियों की जरूरत थी.

यह भी दिलचस्प है कि भले ही बीआर चोपड़ा अपनी चाणक्य कभी बना नहीं पाए लेकिन उनके बेटे रवि चोपड़ा ने जरूर बनाई. 1998 में डीडी1 के लिए! ‘मैं दिल्ली हूं’ सीरीज के अंतर्गत 36 एपीसोड वाला एक छोटा धारावाहिक चाणक्य, जिसमें सुरेंद्र पाल चाणक्य बने थे.