दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि नौ फरवरी को जेएनयू में अफजल की याद में हुए कार्यक्रम में कन्हैया कुमार न सिर्फ शामिल थे, बल्कि उन्होंने ही इस कार्यक्रम का आयोजन किया था. बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में कन्हैया कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान पुलिस ने कहा कि उसे इस बात की जानकारी मौके पर मौजूद रहे कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से मिली है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक कोर्ट में इस मामले की 13 पन्नों की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करते हुए पुलिस ने यह भी कहा कि जेएनयू के इस कार्यक्रम में कुछ विदेशी नागरिक भी शामिल हुए थे और वह इनकी तलाश में जुटी है. पुलिस ने इस रिपोर्ट में साफ़ किया है कि उसे निजी समाचार चैनलों से घटना के जो वीडियो मिले हैं, वे उनमें से नहीं हैं जिनके साथ छेड़छाड़ होने की बात कही जा रही है. दिल्ली पुलिस ने यह दावा भी किया है कि कन्हैया जांच में बिल्कुल सहयोग नहीं कर रहे हैं और अगर उन्हें जमानत दी जाती है, तो वे इस जांच को प्रभावित करने के साथ ही दोबारा देशविरोधी गतिविधि को अंजाम दे सकते हैं. हालांकि, तमाम दलीलों के बाद कोर्ट ने सुनवाई 29 फरवरी तक के लिए टाल दी है.

कोर्ट ने जेएनयू मामले में मंगलवार रात गिरफ्तार किये गए छात्रों की सुरक्षा का भी संज्ञान लिया है. कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि उमर ख़ालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को मजिस्ट्रेट के सामने इस तरह पेश किया जाए कि मीडिया को इसकी ख़बर न मिल सके. अदालत ने पुलिस को चेतावनी देते हुए कहा, ‘उनकी पेशी के दौरान कोई गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए. इस बार किसी को भी खरोंच तक न आए.’ उधर, उमर ख़ालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को दिल्ली की एक अदालत ने तीन दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है.

दंगा भड़काने के आरोप में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सलाहकार प्रो. वीरेंद्र सिंह के खिलाफ केस दर्ज

हरियाणा पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार प्रो. वीरेंद्र सिंह और कैप्टन मानसिंह दलाल पर मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस ने यह मामला उस ऑडियो टेप के सार्वजनिक होने के बाद दर्ज किया है जिसमें ये दोनों जाट आरक्षण के दौरान हिंसा तेज करने को कह रहे हैं. इन दोनों ने स्वीकार भी किया है कि टेप में उनकी ही आवाज है, लेकिन इनका कहना है कि उनकी बातों को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया है. वहीं, बुधवार को हरियाणा के पुलिस महानिदेशक यशपाल सिंघल ने बताया कि जाट आंदोलन के दौरान कुल 28 लोगों की मौत हुई है और लगभग दो सौ लोग घायल हुए हैं. उनके मुताबिक हिंसा के आरोप में 127 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 535 लोगों पर मामले दर्ज किए गए हैं.

अब क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भुगतान करने पर सरचार्ज और सेवा शुल्क नहीं लगेगा

नकद लेनदेन पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने कार्ड और डिजिटल भुगतान पर सरचार्ज, सेवा कर और सुविधा शुल्क समाप्त करने का फैसला किया है. केंद्र सरकार द्वारा जारी किये गए एक बयान में कहा गया है कि कार्ड और डिजिटल माध्यम से भुगतान को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों और संगठनों द्वारा इस प्रकार के भुगतान पर लगाए जाने वाले अधिभार, सेवा कर और सुविधा शुल्क को वापस लिए जाने का निर्णय किया गया है. बयान में कहा गया है कि इस फैसले से नकद लेनदेन को कम करने में भी मदद मिलेगी. वहीं, इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त मंत्रालय के उस फैसले को भी मंजूरी दे दी है जिसके तहत एक निश्चित राशि से अधिक का भुगतान कार्ड से या डिजिटल तरीके से करना अनिवार्य होगा.

अपने ही तबादले पर रोक लगाने वाले जज ने कहा, ‘दिमागी संतुलन खो बैठा था’

मद्रास हाईकोर्ट के जज सीएस कर्नन ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि उन्होंने अपना मानसिक संतुलन खोने की वजह से ग़लत आदेश जारी कर दिया था. कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्नन का तबादला कलकत्ता हाईकोर्ट में कर दिया था. साथ ही उनके गलत व्यवहार को देखते हुए उनके अदालती काम-काज पर भी रोक लगा दी थी. लेकिन, इसके बाद कर्नन ने खुद शीर्ष अदालत के इस आदेश पर स्टे लगा दिया था और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने तबादले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर सहित दो अन्य जजों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने की धमकी दी थी. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ अब अपनी ग़लती स्वीकार करते हुए सीएस कर्नन ने टीएस ठाकुर और सुप्रीम कोर्ट के दो अन्य जजों को एक चिट्ठी लिखकर माफ़ी मांगी है. उन्होंने लिखा है कि कुछ जज उनकी हंसी उड़ाते थे जिस कारण वे काफी ज्यादा तनाव में थे जिसके चलते उन्होंने अपना मानसिक संतुलन खोकर यह गलत आदेश जारी कर दिया था. उन्होंने चिट्ठी में यह भी लिखा है कि आगे से ऐसा नहीं होगा.