विश्वकप में भारत के हाथों पाकिस्तान की हार का सिलसिला बरकरार है
विश्वकप में भारत के हाथों पाकिस्तान की हार का सिलसिला बरकरार है
विश्वकप में पाकिस्तान को छठवीं बार हराकर भारत ने पुराना तिलिस्म तो बरकरार रखा लेकिन, इसी मैच से कुछ चेतावनी भरे संकेत भी निकलते हैं जिन पर उसे ध्यान देने की जरूरत है
प्रेम के संत वैलेंटाइन का दिन यानी 14 फरवरी एक दिन पहले ही निकल कर गया था, लेकिन माहौल वही पुराना युद्ध जैसा ही था. विश्व कप में भारत और पाकिस्तान की टीमें एक बार फिर आमने सामने थीं. दीवाली के बचे पटाखे रात को ही निकालकर रखे जा चुके थे और क्रिकेट के दीवानों ने सुबह नौ बजे मैच देखने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली थीं.
टॉस भारत ने जीता और बल्लेबाजी का फैसला लिया. मैच के पहले ही ओवर में सोहेल खान ने शिखर धवन के खिलाफ रिव्यू मांग लिया लेकिन वह बेकार गया. पाकिस्तानी बॉलरों में एक मोहम्मद इरफ़ान भी हैं जिनकी बॉलिंग से ज्यादा चर्चे उनके कद के हो रहे हैं जो सात फुट एक इंच है और इसके चलते उनकी बॉल लगभग एक मंजिल की ऊंचाई से बल्लेबाज़ के पास आती है. ठीक-ठाक लय में आ चुके रोहित शर्मा ने सातवें ओवर की तीसरी बॉल पर एक गैर ज़रूरी पुल शॉट खेला और मिस्बाह उल हक के हाथों लपके गए. उन्होंने 20 गेंदों में 15 रन बनाए. लेकिन उसके बाद विराट कोहली और धवन स्कोर को 29 ओवर पांच गेंदों में 163 रन तक ले गए. धवन 73 के स्कोर पर मिस्बाह के सीधे थ्रो से रन आउट हुए.
पाकिस्तान के बल्लेबाज़ों में शायद ही कोई ऐसा हो जिसे भारतीय गेंदबाजों द्वारा अपनी बेहतरीन और सटीक गेंदबाजी के चलते आउट होने को मज़बूर कर दिया गया हो.
उधर, कोहली ने विकेट कीपर से एक जीवन दान पाने के बाद 43वें ओवर में अपना शतक पूरा किया. एकदिवसीय क्रिकेट में 22वें शतक के साथ ही उन्होंने सौरभ गांगुली की बराबरी की और अब वे इस मामले में रिकी पोंटिंग, सनत जयसूर्या और सचिन तेंदुलकर से ही पीछे हैं. यही नहीं, कोहली विश्व कप में पाकिस्तान के विरुद्ध शतक बनाने वाले पहले भारतीय भी बने. अगले ही ओवर में रैना ने भी अपना पचासा पूरा किया. 45वें ओवर की दूसरी बॉल पर कोहली 107 के व्यक्तिगत स्कोर पर सोहेल खान की बाल पर अकमल द्वारा कैच हुए. उस समय स्कोर था तीन विकेट पर 273 रन. तब उम्मीद की जा रही थी कि भारत आराम से 320 या 330 रनों तक जा सकता है. लेकिन भारतीय टीम अंतिम पांच ओवरों में सिर्फ 27 रन जोड़कर 300 के आंकड़े तक ही पहुंच पाई.
पाकितान की पारी अहमद शहज़ाद और यूनिस खान ने शुरू की. यूनिस तीसरे ओवर की दूसरी ही गेंद पर छह रन बनाकर मोहम्मद शमी की बाल पर धोनी द्वारा लपके गए. मंथर गति से अठारहवां ओवर पूरा होते हारिस भी आर अश्विन की गेंद पर रैना द्वारा लपके गए. हारिस ने महत्वपूर्ण 36 रन बनाये और पाकिस्तान का स्कोर था दो विकेट पर 79 रन. अभी स्कोर में और 23 रन जुड़े ही थे कि अहमद शहज़ाद उमेश यादव की गेंद पर जडेजा द्वारा लपके गए. जडेजा का यह शानदार कैच था जो दूसरे प्रयास में लपका गया. इसके बाद देखते ही देखते शोएब मक़सूद और अकमल के लगातार शून्य पर आउट हो जाने से पाकिस्तान का स्कोर हो गया पांच विकेट पर 130 तीन रन. बाद में शाहिद आफरीदी ने तेजी से 22 रन बनाकर कुछ उम्मीदें जरूर जगाईं लेकिन उनके और वहाब रियाज़ के जल्दी जल्दी आउट होने से स्कोर हो गया 34.4 गेदों में सात विकेट पर 154 रन. कप्तान मिस्बाह की 76 रनों की मजबूत और साहसी पारी की बदौलत अगला आठवां विकेट जब यासिर शाह के रूप में गिरा तब तक स्कोर हो चुका था 203 रन. उसके बाद 45वें ओवर की चौथी बाल पर नवें विकेट के रूप में मिस्बाह के आउट होते ही पाकिस्तान का प्रतिरोध लगभग समाप्त हो गया और पूरी पाकिस्तानी टीम 47 ओवर में 224 रन बना कर आउट हो गयी और 76 रनों से मैच गंवा बैठी. इस तरह वह तिलिस्म भी बरकरार रहा कि पाकिस्तान कभी भारत को विश्वकप में नहीं हरा पाता.
लेकिन भारत के खेल में कुछ दरारें भी दिखीं. भारतीय फील्डरों ने दो कैच छोड़े. 26वें ओवर की पांचवी गेंद पर अफरीदी का और 42वें ओवर की चौथी गेंद पर यासिर का. हालांकि दोनों ही कैच आसान नहीं थे, लेकिन हम कोई सीरीज या लोकल मैच नहीं विश्व कप खेल रहे हैं और वह अगर जीतने की नीयत से आये हैं तो इन अवसरों को साधारण कैचों में तब्दील करना आना ही चाहिए.
जीत के बावजूद भारत की गेंदबाजी अभी भी थोड़ी बहुत नहीं, अत्यधिक चिंता का विषय है. इस मैच को ही लें. पाकिस्तान के बल्लेबाज़ों में शायद ही कोई ऐसा हो जिसे भारतीय गेंदबाजों द्वारा अपनी बेहतरीन और सटीक बॉलिंग के चलते आउट होने को मज़बूर कर दिया गया हो. ज्यादातर अपनी ही गलती से आउट हुए दिखे. अगर कहा जाय कि केवल भारत की बल्लेबाजी ही विश्वकप जीतने के स्तर की है तो कुछ गलत नहीं होगा. अगर कल्पना की जाए कि विश्व कप में विश्व के पांच बेहतरीन गेंदबाज ही सारी टीमों के खिलाफ सम्मिलित गेंदबाज़ी करेंगे तो शायद भारत बल्लेबाज़ी के लिहाज से श्रेष्ठ ठहरे लेकिन, गेंदबाजी के स्तर पर वह इस समय सबसे कमजोर टीम है. हमारी गेंदबाजी में वह प्रतिभा नहीं है कि बल्लेबाज को हर समय अपने विकेट को लेकर चिंतिंत रहने को विवश कर दे. इस मैच को भी देखें तो अगर मिस्बाह के साथ एक-दो बल्लेबाज भी लंगर डाल देते तो भारत को मैच बचाने के लाले पड़ गए होते. यानी जैसी गेंदबाजी इस समय भारत की है वह उसे फाइनल तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त नहीं लगती. विश्व कप जितवाने योग्य तो बिलकुल भी नहीं.
इस मैच का एक चिंताजनक पहलू खराब अंपायरिंग भी रही. इसकी मार भारत को झेलनी पड़ी. काफी निर्णय उसी के विरुद्ध बैठे चाहे वे वाइड बाल के रहे हों या रन आउट के.
भारत का अगला मैच 22 फरवरी को मेलबर्न में है. इसमें उसके सामने दक्षिण अफ्रीका की टीम होगी. यानी मुकाबला और भी कड़ा होगा. उम्मीद की जानी चाहिए कि भारत इस मैच वाली गलतियां न दोहराए.