नरेंद्र मोदी सरकार में नंबर दो कौन है इस पर भले ही बहस जारी हो, गृह मंत्रालय में दूसरे सबसे अहम शख्स हरिभाई चौधरी हैं, इसमें कोई शक नहीं.
इंटेलीजेंस ब्यूरो के मुखिया दिनेश्वर शर्मा, राष्ट्रीय जांच एजेंसी के निदेशक शरद कुमार और केंद्रीय गृह सचिव एक साथ किसी मंत्री की प्रतीक्षा में बैठे हों तो कोई भी मान सकता है कि उन्हें गृहमंत्री राजनाथ सिंह का इंतजार होगा. लेकिन इन दिनों अमूमन ऐसा नहीं होता. बताते हैं कि ये सारे अहम अधिकारी इन दिनों अक्सर गृहराज्य मंत्री हरिभाई चौधरी के सामने हाजिरी लगाते हैं.
नरेंद्र मोदी सरकार में नंबर दो कौन है, इस पर भले ही बहस जारी हो, लेकिन गृह मंत्रालय में दूसरा सबसे अहम शख्स कौन है, इसमें किसी को कोई शक नहीं है. नौ नवंबर 2014 को शपथ लेने के बाद से गृहमंत्रालय में हरिभाई चौधरी का रुतबा लगातार बढ़ता गया है. दरअसल गृहमंत्री राजनाथ सिंह पर पार्टी संबंधी जिम्मेदारियां भी हैं जिसके चलते वे अक्सर दिल्ली से बाहर होते हैं. इस वजह से नॉर्थ ब्लॉक में चौधरी के प्रभाव का दायरा लगातार फैलता गया है.
गुजरात में बनासकांठा जिले के जगना गांव में पैदा हुए हरिभाई चौधरी ने मुंबई विश्वविद्यालय से एमकॉम की डिग्री ली. इसके बाद वे कुछ समय तक मुंबई में हीरा व्यवसाय से जुड़े रहे और फिर अपना कारोबार करने के लिए बनासकांठा लौट गए. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय सदस्य रहे चौधरी 80 के दशक में भाजपा में आए. 1998 में उन्होंने पहली बार भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा और पहली ही बार में कांग्रेस का गढ़ कही जाने वाली बनासकांठा लोकसभा सीट जीत ली. तब से अब तक वे यहीं से चार बार सांसद चुने जा चुके हैं. 2005 से 2010 तक चौधरी गुजरात में पार्टी के उपाध्यक्ष भी रहे.
केंद्र सरकार में भले ही चौधरी पहली बार आए हों, लेकिन गृह मंत्रालय में अब ज्यादातर अहम विभाग उनके ही पास हैं. इनमें जम्मू-कश्मीर, माओवादी हिंसा, आंतरिक सुरक्षा, विदेश मामले, केंद्र शासित प्रदेश और पुलिस सुधार शामिल हैं.
केंद्र सरकार में भले ही चौधरी पहली बार आए हों, लेकिन गृह मंत्रालय में अब ज्यादातर अहम विभाग उनके ही पास हैं. इनमें जम्मू-कश्मीर, माओवादी हिंसा, आंतरिक सुरक्षा, विदेश मामले, केंद्र शासित प्रदेश और पुलिस सुधार शामिल हैं. इन विषयों से जुड़े मामलों पर आखिरी निर्णय अब सीधे चौधरी ही करते हैं. राजनाथ सिंह के पास अहम नीतिगत मसले ही भेजे जाते हैं. बताया जाता है कि हाल ही में उन्होंने सभी सचिवों को निर्देश दिए कि किसी भी फाइल पर निर्णय लेने में 15 दिन से ज्यादा वक्त नहीं लगना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा है कि मंत्रालय के अधिकारी साल में कम से कम छह बार राज्यों में जाकर वहां वरिष्ठ अधिकारियों से मिलें. इस कवायद का मकसद यह पता करना है कि केंद्र से मिले पैसे का जमीन पर किस तरह इस्तेमाल हो रहा है.
चौधरी की अहमियत इस कदर बढ़ने का एक मतलब यह भी है कि दूसरे गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू का कद घटा है. उनके पास अब सीमा प्रबंधन, आपदा प्रबंधन और स्वतंत्रता सेनानी जैसे बनिस्बत कम महत्वपूर्ण विभाग रह गए हैं.