जीतनराम मांझी
जीतनराम मांझी
बिहार में जीतनराम मांझी के इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है.
बिहार के मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने इस्तीफा दे दिया है. मांझी ने आज सुबह राज्यपाल से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंपा. खबरों के मुताबिक राज्यपाल ने उनका इस्तीफा मंजूर भी कर लिया है. माना जा रहा है कि इसके बाद जदयू मुखिया नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है जिन्हें जल्द ही सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है. जदयू से बगावत करने और इसके चलते पार्टी से निकाले जाने के बाद मांझी ने बहुमत साबित करने के लिए कई तरह की जुगत लगाई. लेकिन समीकरण उनके अनुकूल नहीं बन पा रहे थे. पूर्ण बहुमत साबित करने के लिए 117 विधायकों की जरूरत थी. बताया जाता है कि तमाम कोशिशों के बावजूद मांझी का आंकड़ा 100 तक ही पहुंच पा रहा था. भाजपा ने गुरुवार को मांझी सरकार को समर्थन देने की घोषणा की थी. उधर, जदयू को राजद, कांग्रेस और सीपीआई का समर्थन हासिल है.
कांग्रेस के लिए कंगाली में आटा गीला, दफ्तर खाली करने का नोटिस मिला. लोकसभा चुनाव के बाद से लगातार मुंह की खा रही देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के लिए एक और मुसीबत खड़ी हो गई है. केंद्र सरकार ने उससे राजधानी के 24, अकबर रोड स्थित पार्टी मुख्यालय को खाली करने को कहा है. 24, अकबर रोड के अलावा उसे 26, अकबर रोड स्थित सेवा दल कार्यालय व 5, रायसीना रोड स्थित युवक कांग्रेस और एनएसयूआई के दफ्तर को भी खाली करने को कहा गया है. इस बाबत केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने कांग्रेस पार्टी को एक नोटिस भेजा है. इसमें कहा गया है कि लीज की समयसीमा खत्म होने के बाद भी कांग्रेस पार्टी ने इन बंगलों को खाली नहीं किया है. नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि कांग्रेस ने जल्द ही इन जगहों से अपने कार्यालय नहीं हटाए तो उसे बाजार भाव से इनका किराया चुकाना होगा. गौरतलब है कि सभी राजनीतिक दलों को अपने नये कार्यालय बनाने के लिए जून 2010 में ही जमीनें आवंटित की जा चुकी हैं. इसी क्रम में कांग्रेस को 9-ए रोज एवेन्यू में जमीन दी गई है. इसी नीति के आधार पर पार्टी को जून, 2013 तक ये चारों बंगले खाली करने थे, लेकिन, उसने अभी तक ऐसा नहीं किया, जिसके परिणाम स्वरूप उसे यह नोटिस मिला है. कांग्रेस पार्टी ने इस नोटिस के मिलने की पुष्टि करते हुए सरकार से अपने लिए कुछ और समय की मोहलत मांगी है. पार्टी नेता मोतीलाल वोरा का कहना है कि, कांग्रेस ने सरकार के सामने अपना पक्ष रख दिया है और अब सरकार के जवाब की प्रतीक्षा की जा रही है. मालूम हो कि 24, अकबर रोड 1978 से ही कांग्रेस पार्टी का मुख्यालय रहा है.
रेल किराये में राहत की संभावना नहीं हर साल रेल बजट पेश होने से कुछ दिन पहले लोग उम्मीद लगाते हैं कि शायद सरकार रेलवे के किराए और भाड़े में कमी की घोषणा करेगी. कई बार ऐसा हो भी जाता है, लेकिन इस बार के रेल बजट से इस तरह की उम्मीद करना शायद गलत साबित हो सकता है. इसके संकेत किसी और ने नहीं बल्कि खुद केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने दिए हैं. उनका कहना है कि रेल बजट में किराया घटाने की संभावना न के बराबर है. इसको लेकर सिन्हा का तर्क यह था कि सब्सिडी के चलते पहले से ही यात्रियों से कम किराया लिया जा रहा है. उनका यह भी कहना था कि रेलवे को और वित्तीय संसाधन जुटाने की जरूरत है, ऐसे में किराया कम करना मुमकिन नहीं है. इससे पहले रेल मंत्री सुरेश प्रभु भी रेल किराया घटाए जाने की संभावनाओं को खारिज कर चुके हैं. 23 फरवरी से शुरू होने जा रहे संसद के बजट सत्र में रेल बजट 26 फरवरी को पेश किया जाना है.
आखिरकार झारखंड में एक कदम आगे बढ़ी सरकार आखिरकार झारखंड मे राज्य मंत्रिमंडल का विस्तार हो ही गया. गुरुवार की शाम को राज्यपाल डॉ सैयद अहमद ने छह विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिला दी. इन नये मंत्रियों में से चार पुराने भाजपाई हैं, जबकि दो वे हैं जो हाल ही में झारखंड विकास मोर्चा से पार्टी में शामिल हुए हैं. इन सभी के विभागों का भी बंटवारा भी कर दिया गया है. सरकार गठन के डेढ महीने बाद संभव हो सके मंत्रिमंडल के इस विस्तार के बाद झारखंड की राजनीति को लेकर चल रही तरह-तरह की कयासबाजियों पर फिलहाल विराम लग गया है. इससे पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा का भाजपा में पूर्ण विलय हो सकता है. मंत्रिमंडल का विस्तार न हो पाने के लिए यह एक बड़ा कारण माना जा रहा था. इसके अलावा यह भी कहा जा रहा था कि सरकार में सहयोगी पार्टी आजसू, मंत्रिमंडल में ज्यादा प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए है.