बजट पेश करने से पहले रेलमंत्री सुरेश प्रभु
बजट पेश करने से पहले रेलमंत्री सुरेश प्रभु
सुरेश प्रभु के रेल बजट में कई ऐसी चीजें हैं जो उनके पूर्ववर्ती सदानंद गौड़ा के बजट में नहीं थीं.
आम तौर पर माना जाता है कि सरकारें अपने पिछले बजट को ही आगे बढ़ाती हैं. लेकिन सुरेश प्रभु का रेल बजट कई अहम मामलों में उस बजट से बहुत अलग बताया जा रहा है जो उनके पूर्ववर्ती सदानंद गौड़ा ने जुलाई 2014 में पेश किया था. हालांकि कुछ मामलों में वह गौड़ा की राह चलता भी दिखता है.
रेल किराया
इस बार के बजट में सुरेश प्रभु ने रेल किराये में किसी भी तरह की बढोतरी नहीं की है. इस बात के संकेत उन्होंने बजट पेश करने से पहले ट्वीट करके भी दे दिए थे. उनका कहना था कि रेल में यात्रा करने वाले 95 फीसदी यात्री आम लोग होते हैं और बजट में उनके हितों, प्राथमिकताओं और शिकायतों को ध्यान में रखा गया है. हालांकि इसकी एक बड़ी वजह कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई भारी कमी भी है. पिछले बजट की बात करें तो सदानंद गौड़ा ने अपने रेल बजट में यात्री किराये में बढ़ोतरी का एलान किया था. उनका तर्क था कि किराए में संशोधन न होने से रेलवे की सुविधाओं में गिरावट आई है. तब उन्होंने यह भी कहा था कि भारतीय रेलवे को पूरी तरह से फिट होने के लिए लगभग पांच लाख करोड़ रुपये की जरूरत है.
सुरेश प्रभु के उलट सदानंद गौड़ा ने यात्री किराये बढ़ाए थे. उनका तर्क था कि किराए में संशोधन न होने से रेलवे की सुविधाओं में गिरावट आई है.
नई ट्रेनें
सुरेश प्रभु ने इस बजट में किसी भी नई ट्रेन का ऐलान नहीं किया है. उनका कहना है कि इस दिशा में व्यापक समीक्षा के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा. संभवत: यह पहली बार होगा जब रेल बजट में एक भी नई ट्रेन का ऐलान नहीं किया गया है. अन्यथा अब तक विभिन्न रेलमंत्री रेल के माध्यम से राजनीति चमकाने की कोशिश में रेल बजट में दसियों नई गाड़ियों का ऐलान करते रहे हैं. पिछले अंतरिम बजट की बात करें तो सदानंद गौड़ा ने 58 नई ट्रेनों की घोषणा की थी. इनमें अहमदाबाद- मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन के अलावा अन्य जगहों के लिए प्रीमियम ट्रेनें, एसी एक्सप्रेस, एक्सप्रेस और पैसेंजर गाड़ियां शुरू करने का ऐलान किया गया था.
टिकट आरक्षण
अमूमन देखा जाता है कि त्यौहारों एवं अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर लोगों को लाख कोशिशों के बाद भी रेलवे टिकट नहीं मिल पाता है. आरक्षण के लिए तय सीमित समय सीमा के साथ-साथ टिकटों की कालाबाजारी भी इसकी बड़ी वजह मानी जाती है. इस समस्या से निपटने के लिए सुरेश प्रभु ने इस बार के बजट में दो अहम काम किए हैं. उन्होंने रिजर्वेशन करने की समय सीमा को बढा कर 120 दिन कर दिया है. यानी अब यात्री घर जाने के लिए चार महीने पहले से रिजर्वेशन करा सकेंगे. सदानंद गौड़ा के वक्त यह सीमा तीन महीने थी. इसके अलावा उन्होंने ऑपरेशन फाइव मिनट नाम से एक नया मिशन शुरू करने की बात कही है. उनके मुताबिक इसके तहत अनारक्षित टिकट खरीदने में अब पांच मिनट से ज्यादा वक्त नहीं लगा करेगा.
निवेश
रेलवे की सूरत संवारने को लेकर सुरेश प्रभु ने अगले पांच साल में 8.5 लाख करोड़ रुपये निवेश करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए उन्होंने रेलवे में करीब 88.5 फीसदी संचालन अनुपात का लक्ष्य तय करने के अलावा सुविधाओं पर जोर देने की बात कही है. बजट पेश करते हुए उनका कहना था कि सुविधाओं में सुधार को लेकर उन्हें 20,000 से अधिक सुझाव मिले हैं, जिन पर अमल करने की पूरी कोशिश की जाएगी. पिछले रक्षा मंत्री सदानंद गौड़ा ने भी रेलवे व्यवस्थाओं मे सुधार की बात कही थी. उन्होंने इसके लिए एफडीआई और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) जैसे तरीकों से पैसा जुटाने की बात कही थी.
यात्री सुरक्षा
यात्री सुरक्षा को लेकर सुरेश प्रभु ने इस बार के बजट में दो अहम कदम उठाए हैं. पहला यह कि अब रेलवे हेल्पलाइन नंबर 138, 24 घंटे चालू रहेगा. इसके अलावा सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों के लिए भी एक नया टोल फ्री नंबर 182 बनाया गया है. महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस बार के रेल बजट में महिला डिब्बे में सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रस्ताव भी किया गया है. पिछले बजट की बात करें तो सदानंद गौड़ा ने यात्री सुरक्षा को लेकर एक ऑल इंडिया हेल्पलाइन नंबर बनाने के अलावा 17 हजार आरपीएफ कांस्टेबलों की भर्ती करने की बात कही थी. इनमें चार हजार पद महिला कांस्टेबलों के लिए रखे गये थे.
पूर्व रेलमंत्रियों की प्रतिक्रियाएं
बजट पर पूर्व रेलमंत्रियों की टिप्पणियां बड़ी हद तक नकारात्मक ही रहीं.  कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह पूरी तरह से 'ड्रीम बजट' है जिसे व्यावहारिक तौर पर लागू करना नामुमकिन है.  राजद मुखिया लालू प्रसाद यादव का कहना था, 'सरकार को चाहिए था कि पहले से पेंडिंग योजनाओं को पूरा करे. पता नहीं सरकार क्या चाहती है. बीजेपी हवा में आई थी, हवा हो जाएगी. ' तृणमूल कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी रेल बजट को निराशाजनक बताया. उनकी टिप्पणी थी, 'सरकार जनता को मूर्ख बना रही है. अभी हाल ही रेल किराया बढ़ाया गया था. डीजल के दाम कम हुए हैं, फिर भी किराया नहीं घटाया गया. ' जदयू नेता नीतीश कुमार ने भी कहा कि यात्री किराए कम होने चाहिए थे.