अब तक सारे मैचों में भारतीय गेंदबाजों ने विपक्षी टीम को आल आउट किया है
अब तक सारे मैचों में भारतीय गेंदबाजों ने विपक्षी टीम को आल आउट किया है
विश्व कप में अब तक भारत के शानदार प्रदर्शन में गेंदबाजों की भूमिका बल्लेबाजों से कम महत्वपूर्ण नहीं रही है, भले ही उन्हें उतनी चर्चा न मिल रही हो.
भारत ने विश्वकप में यूएई को नौ विकेट से रौंद दिया है. 103 रन के लक्ष्य को भारत ने एक विकेट खोकर हासिल कर लिया. भारत की यह लगातार तीसरी जीत है. उसके लिए सबसे अच्छी बात यह है कि टीम के सभी बल्लेबाज फॉर्म में चल रहे हैं. बीते दो मैचों में कुछ खास न कर पाए ओपनर रोहित शर्मा ने भी आज 10 चौक्कों और एक छक्के से सजी 57 रन की शानदार पारी खेली. कुल मिलाकर रोहित शर्मा, शिखर धवन, विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे और सुरेश रैना की बल्लेबाजी की हर तरफ चर्चा है.
भारत ने पाकिस्तान को 76 और दक्षिण अफ्रीका को 130 रन के विशाल अंतर से हराया. यानी भारतीय गेंदबाजों ने मैच को एकतरफा बना दिया.
लेकिन भारत के गेंदबाजों का प्रदर्शन भी बल्लेबाजों से कम शानदार नहीं रहा है. यह अलग बात है कि विराट बल्लेबाजी क्रम की छाया के चलते उनकी उपलब्धियां बनिस्बत कम चर्चा में रही हैं. अब तक हुए तीनों ही मैचों में भारतीय गेंदबाजों ने विपक्षी टीमों को आल आउट किया है. इनमें से यूएई जैसी कमतर टीम को छोड़ दिया जाए तो पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीम के सारे बल्लेबाजों को आउट कर देना कम बड़ी उपलब्धि नहीं है. वह भी बाद में गेंदबाजी करते हुए.
कुछ कह सकते हैं कि टॉसरूपी किस्मत की मेहरबानी से पहले बल्लेबाजी करके हुए भारत ने उन्हें करीब 300 रनों का भारी-भरकम लक्ष्य भी तो दे दिया था. लेकिन फिर यह भी है कि बीते कुछ समय के दौरान क्रिकेट का संतुलन बल्लेबाजों की तरफ झुकता गया है और अब 300 से ऊपर का लक्ष्य पहले की तरह पहाड़ जैसा नहीं माना जाता. इसके अलावा भारत ने पाकिस्तान को 76 और दक्षिण अफ्रीका को 130 रन के विशाल अंतर से हराया. यानी भारतीय गेंदबाजों ने मैच को एकतरफा बना दिया.
भारतीय गेंदबाजों की ये उपलब्धियां इसलिए भी प्रशंसनीय हैं क्योंकि इससे पहले ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड दौरा उनके लिए बहुत निराशाजनक रहा था. ऊपर से ईशांत शर्मा को ऐन विश्व कप से पहले चोट की वजह से टीम से बाहर होना पड़ा. भारत के लिए यह दोहरा झटका था. ईशांत ने इन विदेशी दौरों में अच्छा प्रदर्शन किया था. इसके अलावा वे टीम के सबसे अनुभवी गेंदबाज भी थे. चिंताएं तब और बढ़ गई थीं जब विश्व कप में भारत ने अफगानिस्तान के खिलाफ अभ्यास मैच खेला. इस मैच में 365 के लक्ष्य का पीछा करते हुए अफगानिस्तान की टीम 211 रन बनाने में सफल हो गई. भारतीय गेंदबाज उनके पूरे बल्लेबाजों को भी आउट नहीं कर पाए. खेल विशेषज्ञों ने उनकी यह कहकर आलोचना की कि अफगानिस्तान के खिलाफ यह हाल है तो पाकिस्तान के खिलाफ क्या होगा.
भारतीय गेंदबाजों की ये उपलब्धियां इसलिए भी प्रशंसनीय हैं क्योंकि इससे पहले ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड दौरा उनके लिए बहुत निराशाजनक रहा था.
लेकिन उसके बाद मामला एकदम उलटा हो गया. मोहम्मद शमी, उमेश यादव, मोहित शर्मा, आर अश्विन, भुवनेश्वर कुमार और मोहित शर्मा ने अपने प्रदर्शन से सब आलोचकों के मुंह बंद कर दिए. गौरतलब है कि फील्डिंग के नए नियमों के चलते बल्लेबाजों के लिए रन बनाना पहले से आसान हुआ है यानी गेंदबाजों के लिए हालात मुश्किल हुए हैं. लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने असाधारण प्रदर्शन करते हुए अपना इकॉनॉमी रेट छह से नीचे ही रखा है. वे लगातार नियमित अंतराल पर विकेट भी लेते रहे हैं. इससे उन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि विपक्षी टीम पर लगातार दबाव बना रहे.
यही वजह रही कि पाकिस्तान 224, दक्षिण अफ्रीका 177 और यूएई 102 पर ढेर हो गए. तेज गेंदबाजी को परंपरागत रूप से भारतीय टीम का मजबूत पक्ष नहीं माना जाता. लेकिन इस विश्वकप में भारत ने अब तक जो 30 विकेट चटकाए हैं उनमें करीब आधे तेज गेंदबाजों ने ही लिए हैं. मोहम्मद शमी चोटिल होने की वजह से यूएई के साथ हुआ मैच नहीं खेल पाए लेकिन, उससे पहले के दो मैचों में वे छह विकेट चटकाकर विश्वकप के अगुवा गेंदबाजों की सूची में शामिल हैं जबकि उनसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज उनसे एक दो मैच ज्यादा खेल चुके हैं. इसके अलावा यूएई के खिलाफ हुए मैच में चार विकेट लेने वाले आर अश्विन और रविंदर जडेजा की स्पिन गेंदबाजी ने भी विपक्षी टीमों को छकाया है. अगर गेंदबाजी की यही लय आगे भी बनी रहती है तो भारतीय टीम का भविष्य निश्चित रूप से उज्ज्वल है.