फादर अलेक्सिस
फादर अलेक्सिस
क्या फादर अलेक्सिस प्रेम कुमार को तालिबान के चंगुल से छुड़ाने के लिए भारत सरकार को फिरौती देनी पड़ी थी? अपने परिवार को उन्होंने जो बताया है उससे तो ऐसा ही लगता है. अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक फादर अलेक्सिस ने अपने घरवालों को बताया है कि तालिबान ने उनसे कहा था कि वे पैसे का इंतजार कर रहे हैं और उन्हें जल्द ही छोड़ दिया जाएगा.
गौरतलब है कि सरकार ने इस बात से इनकार किया था कि उसने फादर एलेक्सिस को छुड़ाने के लिए पैसा दिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन का कहना था, 'न उन्होंने कभी हमसे पैसे की बात की न हमने दिया.'
फादर अलेक्सिस की रिहाई को एक बड़ी सफलता बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद तमिलनाडु में रह रहे उनके परिजनों को फोन करके यह खुशखबरी सुनाई थी.
47 साल के फादर अलेक्स्सि को दो जून 2014 को अफगानिस्तान के हेरात प्रांत से अगवा कर लिया गया था. वे वहां शरणार्थियों के बच्चों की शिक्षा के लिए काम कर रहे थे. इसके बाद वे आठ महीने तक बंधक रहे. उनकी रिहाई को एक बड़ी सफलता बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद तमिलनाडु में रह रहे उनके परिजनों को फोन करके यह खुशखबरी सुनाई थी. 22 फरवरी को मोदी ने खुद ही ट्वीट करके यह जानकारी सार्वजनिक भी की थी.
हरिंदर बवेजा की इस रिपोर्ट के मुताबिक फादर अलेक्सिस के भाई अल्बर्ट मनोहरन ने फोन पर जो जानकारी दी उसके मुताबिक फादर अलेक्सिस को छुड़ाने के लिए कतर के दोहा में वार्ताएं चलीं. अखबार का यह भी कहना है कि कतर सरकार ने भारत की मदद करने में अहम भूमिका निभाई. हालांकि इसके दिल्ली स्थित दूतावास ने इस बारे में किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया.
अखबार ने तालिबान के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे मुल्ला अब्दुल सलाम जईफ से भी बात की है. जईफ ने इसकी पुष्टि की है कि कतर सरकार ने इस रिहाई में मध्यस्थ की भूमिका निभाई. जईफ का कहना था, 'मुझे नहीं लगता कि भारत और तालिबान के बीच कोई सीधी बातचीत हुई. बातचीत कतर ने की.'