भारत में महिलाओं से जुड़े कुछ बुनियादी आंकड़ों से लेकर उनके खिलाफ अपराध के अांकड़े और चार्ट कुछ चौंकाने वाले तथ्य उजागर करते हैं.
2011 की जनगणना बताती है कि भारत की करीब 121 करोड़ आबादी में 62.37 करोड़ पुरुष हैं और 58.64 करोड़ महिलाएं. इस आंकड़े को दूसरी तरह से देखा जाए तो देश में प्रति 1000 पुरुषों पर 940 महिलाएं हैं. साक्षरता दर की बात करें तो पुरुषों के लिए यह 80.90 फीसदी है और महिलाओं के लिए 64.6 फीसदी.
एक तरह से देखा जाए तो ये बुनियादी आंकड़े हमारे समाज की गिरती सेहत का संकेत हैं. ये बताते हैं कि तमाम दावों के बावजूद आधी आबादी को पूरा हक नहीं मिल पा रहा. कहीं किसी बेटी को जन्म से पहले ही मारा जा रहा है, कहीं उसे बोझ समझकर उसके साथ खाने से लेकर पढ़ाई तक भेदभाव हो रहा है और कहीं बेटा पैदा करने के दबाव में कोई पत्नी या बहू घरेलू हिंसा की शिकार हो रही है. जाहिर है जब तक यह स्थिति बदली नहीं जाती तब तक बराबरी और न्याय की वह लड़ाई जीती नहीं जा सकती जो किसी भी सभ्य समाज की पहली शर्त है.
कहीं किसी बेटी को जन्म से पहले ही मारा जा रहा है, कहीं उसे बोझ समझकर उसके साथ खाने से लेकर पढ़ाई तक भेदभाव हो रहा है और कहीं बेटा पैदा करने के दबाव में कोई पत्नी या बहू घरेलू हिंसा की शिकार हो रही है.
महिलाओं के खिलाफ अपराध
महिलाएं सामान्य अपराधों जैसे लूट या हत्या का शिकार भी बन सकती हैं. लेकिन ‘महिलाओं के खिलाफ अपराध’ वे अपराध हैं जिनके निशाने पर सिर्फ महिलाएं ही हो सकती हैं. इन अपराधों को दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है –
  1. भारतीय दण्ड संहिता (आईपीसी) के अंतर्गत आने वाले अपराध
  • बलात्कार
  • अपहरण
  • दहेज के लिए हत्या
  • मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न
  • महिला के शीलभंग के लिए उसपर हमला
  • 18 साल से कम उम्र की विदेशी लड़कियों को भारत लाना
  1. विशेष और स्थानीय कानून के अंतर्गत अपराध
  • मानव तस्करी (रोकथाम) कानून – 1956
  • दहेज विरोधी कानून- 1961
  • सती प्रथा विरोधी कानून- 1987
  • महिलाओं का अभद्र चित्रण विरोधी कानून – 1986
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साल 2013 के लिए नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्‍यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि हर दिन महिलाओं के खिलाफ अपराध के औसतन 848 मामले दर्ज किए गए. इनमें 92 बलात्कार के थे, 22 दहेज के लिए हत्या के और बाकी अन्य. यानी भारत में हर दिन कम से से कम 22 महिलाओं की दहेज के लिए हत्या हो रही है और हर उम्र की करीब 92 महिलाएं रोज बलात्कार की शिकार हो रही हैं.
कहां ठहरते हैं अलग-अलग राज्य और शहर?
प्रति लाख महिलाओं में से अपराध की शिकार महिलाओं का औसत (2013 के आंकडों के मुताबिक) दिल्ली में - 146.8 - सबसे ज्यादा हैं. पूर्वोत्तर के मिजोरम और नगालैंड इस मामले में सबसे नीचे आते हैं. अगर शहरों की बात की जाए तो विजयवाड़ा में सबसे ज्यादा - एक लाख में से 279.7 - महिलाएं साल 2013 में अपराध की शिकार हुईं.
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महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में उत्तर भारत के शहर आगे दिखते हैं
महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में उत्तर भारत के शहर आगे दिखते हैं