अखिलेश यादव की कृपा और मुलायम सिंह यादव के आशीर्वाद से कैलाश चौरसिया न केवल सजा पाने के बाद भी मंत्री बने हुए हैं बल्कि विधानसभा की सदस्यता खत्म होने के बाद भी बने रह सकते हैं.

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा और बाल विकास मंत्री कैलाश चौरसिया को जेल में होना चाहिए. लेकिन वे विधानसभा में बैठते हैं और अखिलेश यादव की सरकार में मंत्री बने हुए हैं. उन्हें 11 दिन पहले निचली अदालत ने तीन साल की सजा सुनाई थी. बहुत जल्द चुनाव आयोग उनकी विधानसभा की सदस्यता भी खत्म कर सकता है. उन्हें मंत्रिपद से हटाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका भी दाखिल की जा चुकी है. लेकिन अखिलेश यादव की कृपा और नेताजी यानी कि मुलायम सिंह यादव के आशीर्वाद की वजह से वे न केवल मंत्री बने हुए हैं बल्कि आगे भी बने रह सकते हैं.


मिर्जापुर के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने 27 फरवरी को चौरसिया को तीन साल की बामशक्कत कैद की सजा सुनाई. उन पर नौ हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया.

मामला 1995 का है. आज के मंत्री कैलाश चौरसिया ने तब एक डाकिये को जान से मारने की धमकी दी, उसके साथ मारपीट की और उसकी चिट्ठियां छीन ली. 20 साल लंबा मुकदमा चला. आखिरकार डाकिया बाबू को इंसाफ मिला और मंत्री को सजा. मिर्जापुर के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने 27 फरवरी को चौरसिया को तीन साल की बामशक्कत कैद की सजा सुनाई. उन पर नौ हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया. कुछ घंटे के लिए मंत्रीजी को हिरासत में लिया गया और फिर बीस-बीस हजार रुपए के दो मुचलकों पर ज़मानत दे दी गई. मिर्जापुर के जिलाधिकारी ने चुनाव आयोग और प्रदेश के गृह विभाग के प्रमुख सचिव को चिट्ठी भेजकर सजा के बारे में बता दिया. अब चुनाव आयोग की तरफ से विधानसभा अध्यक्ष के पास चिट्ठी पहुंचने का इंतजार है जिसके बाद उनकी विधानसभा की सदस्यता खत्म हो जाएगी. पिछले दिनों सर्वोच्च अदालत ने फैसला दिया था कि किसी भी जनप्रतिनिधि के खिलाफ अपराध साबित होने पर, देश के जिस भी सदन का वह सदस्य है, उसकी सदस्यता, तत्काल प्रभाव से खत्म हो जाएगी. इसके बाद भी अगर अखिलेश यादव चाहेंगे तो वे अगले छह महीने तक मंत्री बने रह सकते है.

कैलाश चौरसिया मिर्ज़ापुर से लगातार तीसरी बार विधायक बने हैं. समाजवादी पार्टी ने उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से लोकसभा चुनाव में उतारा था. उस वक्त कैलाश चौरसिया ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था. चुनाव में चौरसिया की ज़मानत जब्त हो गई. लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें मंत्री बनाए रखा. कागज पर कैलाश चौरसिया सिर्फ आठवीं पास हैं. लेकिन संपत्ति दो करोड़ से ज्यादा की है. उनके ऊपर आठ मुकदमे हैं और मिर्जापुर के इलाके में इनकी छवि मालदार बाहुबली नेता की है.


उनको सजा मिलने के बाद जो हो रहा है या कहें कि जो होना चाहिए पर नहीं हो रहा है वह अखिलेश यादव की छवि पर एक और बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाते हैं

सवाल सिर्फ कैलाश चौरसिया की छवि का नहीं है. उनको सजा मिलने के बाद जो हो रहा है या कहें कि जो होना चाहिए पर नहीं हो रहा है वह अखिलेश यादव की छवि पर एक और बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाते हैं. अखिलेश यादव अगर अपनी छवि को साफ-सुथरा बनाए रखना चाहते तो 27 फरवरी को ही कैलाश चौरसिया को अपने मंत्रिमंडल से बाहर कर देते. उनकी सरकार आधा वक्त पार कर चुकी है. लेकिन अभी तक अखिलेश अपनी अलग से कोई सकारात्मक छवि नहीं बना पाए. वे मुलायम के नेताजी-राज से बाहर नहीं निकल पाए. अब भी उन्हें एक ऐसे ही नेता के तौर पर देखा जाता है जो बार-बार अपने पिता की छवि से बाहर निकलने की कोशिश तो करता है लेकिन पूरी नहीं.

अब कैलाश चौरसिया का किस्सा अखिलेश की एक और परीक्षा है. अखिलेश को करीब से जानने वाले बताते हैं कि वे उत्तर प्रदेश में अलग तरीके की सरकार चलाना चाहते हैं. लेकिन अपने हर बड़े फैसले से पहले उन्हें एक लंबी अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ता है जहां पिता से लेकर कई चाचा, और आज़म खान तक सब उनपर नजर रखते हैं. उन्होंने अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश बनाने का वादा जनता से किया था और अब उन्होंने एक सजा पाये व्यक्ति को अपना मंत्री बना रखा है. ऐसे में उत्तर प्रदेश, उत्तम प्रदेश बनाने की बात भी कर सकते हैं क्या वे?