11.03.20, शाम चार बजे
आज हमरे बिहार में नीतीश बाबू का बिस्वास मत चल रहा है. हमको उससे कोई लेना-देना तो है नहीं. ऊपर से हमारे साथ वाले मना करने के बाद भी वहां चले गए. तो हम सोचे फुरसत में आज कुछ डायरी-ऊरी ही लिख लें. इधर बीच इतनी उथल-पुथल हुई कि लिखने का समय ही नहीं मिला. हमारे नाम के पूर्व ‘पूर्व मुख्यमंत्री’ लगने के बाद अब जाकर कुछ लिखने की फुरसत मिली है. सो आज लिख रहे हैं...
हमको लगता है इन दिनों देश में एक विशेष प्रकार का मौसम चल रहा है. हृदय परिवर्तन का. वैसे तो यह मौसम लोकसभा चुनाव के बाद से ही शुरू हो गया था. पिछले तीन-चार महीनों से यह जोर पकड़ा है. स्वाईन फ्लू के जैसा, और लगातार चले जा रहा है.
शुरू से शुरू करते हैं. अब देखिए न! अरविंद केजरीवाल का हृदय परिवर्तन हुआ तो उन्होंने 49 दिन सरकार चलाकर छोड़ देने के लिए माफी मांगी. दिल्ली में जगह-जगह हाथ जोड़ माफी मांगते दिखे. देखा-देखी किरण बेदी का हृदय परिवर्तन हो गया. उन्हें लगा कि मोदी देश का अकेले विकास करते-करते थक रहे हैं. तो हमें उनका साथ देना चाहिए, नहीं तो मोदी अकेले कितना बोझ उठाएंगे. कंधा न झुक जाएगा! तो वे मोदी जी को कंधा देने झट से बीजेपी में घुस गईं.
तय बखत में हमको विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना था. मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक सब की नजरें हमरे ऊपर थीं. बिसेस तौर पर, सोशल मीडिया की ताकि हम पर चुटकुला-उटकुला बना सके. हम समझते नहीं सब का!
अब देखिए न! इधर शाजिया इल्मी के साथ कृष्णा तीरथ का भी हृदय परिवर्तन हुआ और दोनों बीजेपी में चली गईं. जब इतना सारा, थोक के भाव हृदय परिवर्तन हुआ तो दिल्ली की जनता का भी हृदय परिवर्तन हो गया और जिता दिया आम आदमी पार्टी को. ऐसा तभी होता है जब जनता का हृदय परिवर्तन होता है. गांधी बाबा का देस है ई. यहां हृदय परिवर्तन ही चलता है.
और उधर, मुंबई नगरिया में ही देखिए. सेंसर बोर्ड का अध्यक्ष बनते ही पहलाज निहलानी का हृदय परिवर्तन हो गया. दादा रे दादा. अपनी फिल्म में तो कहते थे कि अकेली हूं घर मा तू आजा बालमा. और अब कह रहे हैं कि ई सब नहीं चलेगा. समाज पर बुरा असर पड़ता है. तब नहीं पड़ता था महराज!
खैर, ऊ तो ठहरी मायानगरी. कहते भी हैं माया महाठगिनी हम जानी. लेकिन बंगाल में तो गजबै हुआ. पोरीबर्तन का नारा देकर ममता बनर्जी ने वाम दलों की सत्ता उखाड़ी थी. आज वही ममता बनर्जी वाम दलों से गठबंधन की बातें करने के बाद सुना है कि मोदी जी का साथ देने जा रही हैं. अब क्या तो कहा जाए!
कुर्सी पर बैठे-बैठे हमारा हृदय परिवर्तन हुआ तो हम बयान देने लगे. एक से बढ़कर. लल्लन टाप. हम यहां तक गांधीवादी हो गए कि कह दिए अब हम टेंडर-वेंडर में कमीशन-वमीशन नहीं खाएंगे.
तो हमरा भी हृदय परिवर्तन हुआ. और खूब हुआ. पल-पल,छिन-छिन! इतना हुआ हमारा कि हमको खुदै याद नहीं. लेकिन हमसे पहले हृदय परिवर्तन हुआ नीतीश कुमार का. होते ही अचानक से उनको नैतिकता की याद आ गई. बताइए! राजनीति में आज किसी को नैतिकता याद आती है भला जो एकदम उनको याद आ गई! सब हृदय परिवर्तन की कारस्तानी रही.
जब नीतीश बाबू का हृदय परिवर्तन हुआ तो हमको बिहार की कुर्सी पर बैठा दिए. कुर्सी पर बैठते ही हमारा हृदय परिवर्तन नहीं हुआ जैसा कि विरोधी हम पे आरोप लगाते हैं. कुछ दिन बैठने के बाद हो गया. आखिर हम नीतीश जी के समर्थक जो रहे हैं. सच बोलें तो समर्थक से ज्यादा भक्त रहे. जब हमारा हृदय परिवर्तन हुआ, तो नीतीश जी का फिर से हृदय परिवर्तन हो गया. लालू जी से हाथ मिला लिए. जिनके जंगल राज से बचाने की दुहाई दे-देकर बिहार की सत्ता पाए थे,उन्हीं से. हाथ मिलाते हुए नैतिकता की याद नहीं आई.
जाने दीजिए, अब क्या कहा जाए. आज की राजनीति तो रसातल में जा घुसी है. कुर्सी पर बैठे-बैठे हमारा हृदय परिवर्तन हुआ तो हम बयान देने लगे. एक से बढ़कर. लल्लन टाप. हम यहां तक गांधीवादी हो गए कि कह दिए अब हम टेंडर-वेंडर में कमीशन-वमीशन नहीं खाएंगे. पहले कभी खाया तो खाया. हृदय परिवर्तन का कमाल था ई सब. अब हम बिहार के ही नहीं देस के सबसे फेमस नेता हो गए. हमारी पापुलरटी को नीतीश-लालू पचा न पाए. हमको कुर्सी से उतारने का कोसिस शुरु कर दिया और हम उसे बचाने का. इस बीच बीजेपी का भी हृदय परिवर्तन हुआ और हमको पीठ पीछे सर्पोट देना शुरू कर दिया. पीछे से इसलिए क्योंकि उनको हमारे हृदय पर विसवास ही नहीं था. सच कहूं तो हमें खुद्दई नहीं मालूम कि हमारा हृदय परिवर्तन कब होता है. होने के बाद तो ससुरा हमें पता चलता है!
अब बिहार की तरक्की के वास्ते ही एक नई पार्टी बनाई है हमने. हिंदुस्तान अवाम मोर्चा यानी ‘हम’. ‘आप’ तो था ही, अब ‘हम’ भी आ गया. डर है कि कौनो ससुरा ‘मैं’नाम से पार्टी न बना ले.
अब हम का देखते हैं कि रामविलास पासवान का भी हृदय परिवर्तन हो गया है. हालांकि उनका जितना हृदय परिवर्तन हुआ है, उसकी बराबरी केवल यूपी वाले अजित सिंह ही कर सकते हैं, शायद. खैर,पासवान भाई खुलकर हमरे बारे में बोलने लगे. बोले कि महादलित का अपमान है. बीजेपी भी यही सुर लगाई. हमको अच्छा लगा. हर तरफ अपनी गूंज देखकर. तब जदयू के नेताओं का सामूहिक हृदय परिवर्तन हुआ और हमको पार्टी से बर्खास्त कर दिया और नीतीश को अपना नेता चुन लिया. जो नीतीश बाबू हृदय परिवर्तन के चलते सत्ता सौंपे थे, अब वही हृदय परिवर्तन के चलते राष्ट्रपति महोदय के सामने विधायकों की परेड करा दिए.
तय बखत में हमको विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना था. मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक सब की नजरें हमरे ऊपर थीं. बिसेस तौर पर, सोशल मीडिया की ताकि हम पर चुटकुला-उटकुला बना सके. हम समझते नहीं सब का! चारों तरफ बहुत हल्ला था हमको लेकर. लेकिन विधानसभा में वोट पड़ने से पहले ही हम अपना इस्तीफा दे दिए. एकदमे से ऐसा हृदय परिवर्तन हुआ कि का बताएं!
सब बुडबक लोग कह रहे हैं कि हम जबरन हटाए गए. वे सब जानते नहीं न! ई सब हृदय परिवर्तन का मामला है. जितने दिन हम कुर्सी पर बैठे बिहार खूब तरक्की किया. अब बिहार की तरक्की के वास्ते ही एक नई पार्टी बनाई है हमने. हिंदुस्तान अवाम मोर्चा यानी ‘हम’. ‘आप’ तो था ही, अब ‘हम’ भी आ गया. डर है कि कौनो ससुरा ‘मैं’नाम से पार्टी न बना ले. बना भी लेगा तो कोई गम नहीं. देस का लोकतंत्र मजबूते ही होगा. आप, हम और मैं से मिलकर ही तो लोकतंत्र बनता है. गजबे विचार आ गया दिमाग में!
ताजा-ताजा उदाहरण तो आप पार्टी का है. सत्ता पाते ही उनके संगठन में कितनों का हृदय परिवर्तन हो गया है. का दिखता नहीं है का!
आजकल हमारे विरोधी कह रहे हैं कि हम नीतीश कुमार पर जमकर वार कर रहे हैं. तरह-तरह के अनर्गल आरोप लगा रहे हैं, जैसे दिल्ली स्थित बिहार निवास को हमारे जाने के बाद नीतीश कुमार के लिए गंगाजल से धोया गया है. अब इन लोगों को कैसे समझाएं हम. जैसे कुर्सी मिलते ही नीतीश कुमार का हृदय परिवर्तन हो गया है, वैसे ही कुर्सी से उतरते ही हमारा भी हृदय परिवर्तन हो गया है. कृपा करके लोग इसे आड़ोप की संज्ञा न दें.
आजकल सबसे बड़ा हृदय परिवर्तन का केस जम्मू-कश्मीर में देखने को मिल रहा है. बीजेपी और पीडीपी गलबहियां कर रहे है. मोदी ने अरविंद को भले ही गले से न लगाया हो, मगर मुफ्ती को प्यार से कैसे फोटूवा में चांपे दिखे. ताजा-ताजा उदाहरण तो आप पार्टी का है. सत्ता पाते ही उनके संगठन में कितनों का हृदय परिवर्तन हो गया है. का दिखता नहीं है का! और हम पे आरोप लगाते है कि हम नीतीश पर आरोप लगा रहे हैं. अरे भई, ऐसे में हम का कर सकते है, जब पूरे देस में हृदय परिवर्तन का मौसमे चल रहा हो! अब नींद आ रही है...बाकी बातें क...भी अउ.....र...