अमित शाह को जानने वाले मानते हैं कि उन्हें रिजल्ट चाहिए. जो रिजल्ट देगा, उनके कार्यकाल में आगे बढ़ेगा. जो नहीं देगा, उसका कद घटेगा
अमित शाह ने भाजपा संगठन को दुरुस्त करने और अपने वफादार नेताओं को ईनाम देने का फैसला कर लिया है. नए पदाधिकारियों की लिस्ट तैयार हो चुकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस लिस्ट पर मुहर भी लगा दी है. बताया जा रहा है कि अमित शाह की टीम में पांच नए महासचिव शामिल होंगे. दो नए उपाध्यक्ष बनाए जाएंगे. जो अमित शाह को जानते हैं उनका कहना है कि उन्हें रिजल्ट चाहिए. जो रिजल्ट देगा, उनके कार्यकाल में आगे बढ़ेगा. जो नहीं देगा, उसका कद घटेगा.
अमित शाह भाजपा के अध्यक्ष जुलाई 2014 में बने थे. इसके बाद अगस्त में उन्होंने अपनी नई टीम बनाई थी. इसमें 11 उपाध्यक्ष और आठ महासचिव शामिल थे. इसके बाद नवंबर 204 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया जिसके बाद संगठन में ऊंचे पदों पर काम कर रहे कई लोग सरकार में चले गए. इनमें राजीव प्रताप रूढ़ी, बंदारू दत्तात्रेय, जेपी नड्डा, मुख्तार अब्बास नकवी जैसे लोग शामिल थे. रघुवर दास, जोकि अमित शाह की टीम में महासचिव थे, झारखंड के मुख्यमंत्री बन गए.
नवंबर 204 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया जिसके बाद संगठन में ऊंचे पदों पर काम कर रहे कई लोग सरकार में चले गए. इनमें राजीव प्रताप रूढ़ी, बंदारू दत्तात्रेय, जेपी नड्डा, मुख्तार अब्बास नकवी जैसे लोग शामिल थे
अमित शाह जब भाजपा अध्यक्ष बने तब तक भाजपा के ज्यादातर बड़े और अनुभवी नेता मोदी सरकार में मंत्री बन चुके थे. इसके बाद मंत्रिमंडल के विस्तार में भी जब पार्टी के कुछ बड़े पदाधिकारी सरकार में शामिल हो गए तो संगठन के काम में दिक्कतें आने लगीं. यहां तक कि दिल्ली के चुनाव में मंत्रियों की पूरी फौज लगानी पड़ गई थी. इसका नतीजा क्या हुआ सब जानते हैं. इसलिए अब अमित शाह अपनी टीम में नये लोगों को शामिल कर रहे हैं जो सिर्फ संगठन का काम देखेंगे. इसमें होंगे वही जिन्होंने अब तक शाह के मुताबिक काम किया है और आगे भी करेंगे.
इस बार जिन नए लोगों को पार्टी में बड़े पद मिल सकते हैं उनमें मध्यप्रदेश के कद्दावर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी हैं जिन्हें पार्टी महासचिव बनाया जा सकता है. विजयवर्गीय को हरियाणा चुनाव में अमित शाह ने परखा और खरा पाया. हरियाणा के चुनाव में वे प्रभारी थे. भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ यहां चुनाव जीती. अब अमित शाह कैलाश विजयवर्गीय को दिल्ली लाना चाहते हैं. इससे एक तीर और दो शिकार होंगे. फिलहाल मध्य प्रदेश में शिवराज के अलावा बीजेपी के पास कोई ताकतवर नेता नहीं है. शिवराज को अब भी आडवाणी कैंप का माना जाता है. कैलाश विजयवर्गीय को महासचिव बनाकर शिवराज को एक संदेश भी दिया जा सकता है.
झारखंड चुनाव में बीजेपी जीती. पहली बार वहां गैर आदिवासी को मुख्यमंत्री बनाया गया. चूंकि अर्जुन मुंडा चुनाव हार चुके थे इसलिए भाजपा के पास वहा कोई और बड़ा आदिवासी नेता नहीं था. अब अमित शाह अर्जुन मुंडा को दिल्ली ला सकते हैं. उन्हें महासचिव बनाया जा सकता है. इस फैसले से भी दो शिकार होगें. एक बीजेपी का आदिवासी नेता महासचिव बनेगा. आदिवासी वोटर को वह कह पाएगी कि पार्टी में आदिवासियों को नजर अंदाज नहीं किया जा रहा है. दूसरा झारखंड में मुख्यमंत्री रघुवर दास को काम करने की छूट मिलेगी. अब भी झारखंड बीजेपी में अर्जुन मुंडा का कैंप ताकतवर है. उसके चलते रघुवर दास को काम करने में बार-बार मुश्किल होती है. वे साफ-सुथरी सरकार चलाना चाहते हैं लेकिन अर्जुन मुंडा के करीबी अफसर और मंत्री बार-बार उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. एक बार तो राज्य के दमदार अफसर ने मुख्यमंत्री से नेताओं के सामने झगड़ा तक कर लिया था.
अमित शाह की टीम में एक और नया नाम पंजाब के सांसद अविनाश खन्ना का हो सकता है. अविनाश खन्ना को जम्मू-कश्मीर चुनाव में प्रभारी बनाया गया था. भाजपा जम्मू में ज्यादातर सीटों पर जीती. इस विजय का श्रेय अविनाश राय खन्ना को भी मिला. अमित शाह उन्हें मौका दे रहे हैं बड़े प्लेटफॉर्म पर काम करने का. शाह की रणनीति है जो चुनाव जिताएगा उसे प्रमोशन मिलेगा.