भारत सरकार ने यमन में रह रहे  भारतीयों से फौरन देश छोड़ने को कहा है
भारत सरकार ने यमन में रह रहे भारतीयों से फौरन देश छोड़ने को कहा है
सऊदी अरब की बमबारी और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की कार्रवाई के बीच यमन में रह रहे 3500 भारतीयों की जान भी संकट में है.
यमन का संकट बढ़ता जा रहा है. उसके कई शहरों पर हुए ताजा हवाई हमलों में दर्जनों लोगों की मौत की खबरें आ रही हैं. यह हमला सऊदी अरब की अगुवाई में खाड़ी के 10 देश कर रहे हैं और इसे ऑपरेशन डिसाइसिव स्टॉर्म नाम दिया गया है. इन देशों के 235 लड़ाकू विमान यमन की राजधानी सना और दूसरे शहरों के ऊपर बम बरसा रहे हैं. राष्ट्रपति के आवास को भी इस हमले में नुकसान पहुंचा है. इन हवाई हमलों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और शेयर बाजारों के डोलने की आशंकाएं जताई जा रही हैं. संकट से जूझते यमन में करीब साढ़े तीन हजार भारतीय भी फंसे हुए हैं.
यह पूरा विवाद शिया-सुन्नी टकराव और उसकी आड़ में अपने समीकरण साधते यमन के पड़ोसियों के चलते हुआ है.
यह पूरा विवाद शिया-सुन्नी टकराव और उसकी आड़ में अपने समीकरण साधते इस इलाके के अलग-अलग देशों के चलते हुआ है. इसके एक छोर पर सुन्नी बहुल सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश हैं और दूसरे सिरे पर शिया बहुल ईरान. शिया समुदाय के एक विद्रोही गुट ने बीते साल सितंबर में राजधानी सना पर कब्जा करते हुए सत्ता में बड़ी हिस्सेदारी की मांग की थी. हूती विद्रोहियों के नाम से जाने वाले इस समूह ने जनवरी में राष्ट्रपति आवास पर भी कब्जा जमा लिया. इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति अब्द रब्बो मंसूर हादी को नजरबंद कर दिया. हालांकि हादी किसी तरह वहां से दक्षिण के तटवर्ती शहर अदन भागने में कामयाब रहे. अदन सना से तकरीबन 300 किमी की दूरी पर है. ताजा खबरों के मुताबिक वे एक नाव में बैठकर सऊदी अरब की राजधानी रियाद पहुंच गए हैं.
अब यमन पर बमबारी हो रही है. उधर, हूती विद्रोही भी हवाई अड्डे का इस्तेमाल करके अदन और अन्य इलाकों पर हवाई हमले कर रहे हैं. एक संयुक्त बयान में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन और कतर ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने यमन को हूती विद्रोहियों से बचाने के लिए कार्रवाई करने का फैसला लिया है. सऊदी अरब का कहना है कि वह हादी की वैध सरकार की रक्षा कर रहा है. अमेरिका इस हमले में सीधे शामिल तो नहीं है लेकिन, उसने इसका समर्थन किया है. वह सऊदी अरब और अन्य देशों को खुफिया मदद भी दे रहा है. इस बीच, पाकिस्तान का बयान आया है  कि वह भी यमन में अपने सैनिक भेजने के लिए तैयार है.
उधर, हूती विद्रोहियों का सहयोगी माने जाने वाले ईरान ने इन हमलों की निंदा की है. वहां के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारजिया अफखान का बयान आया कि यमन में किए जा रहे इस सैन्य हमले संकट और बढ़ जाएगा और शांतिपूर्ण समाधान के रास्ते खत्म हो जाएंगे. ईरान का यह भी कहना है कि सऊदी अरब के नेतृत्व में किए जा रहे हमलों से क्षेत्र में कट्टरपंथ को बढ़ावा मिलेगा.
यमन की 60 फीसदी आबादी सुन्नी है और 40 फीसदी शिया. बताया जा रहा है कि हूती विद्रोहियों को पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह का समर्थन हासिल है. मौजूदा और निर्वासित राष्ट्रपति हादी सुन्नी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. सालेह शिया समुदाय के थे जिन्हें अरब क्रांति के तहत हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के चलते 2012 में सत्ता और देश छोड़ने पड़े थे. सालेह पहले उत्तरी यमन के राष्ट्रपति थे जो 1990 में दक्षिणी यमन के साथ मिला और इस संयुक्त देश ने उन्हें अपना मुखिया स्वीकार किया. लेकिन भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों के बाद उनकी छवि खराब हो गई थी. गरीबी से जूझते यमन के इस पूर्व मुखिया की संपत्ति 60 अरब डॉलर तक बताई जाती है.
इस बीच, भारत ने यमन में रह रहे अपने नागरिकों से कहा है कि वे फौरन वहां से निकल जाएं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यमन में लगभग 3,500 भारतीय रह रहे हैं. इनमें सबसे ज्यादा नर्सें हैं. भारत द्वारा जारी की गई ये तीसरी चेतावनी है.