विवादित बयानों को लेकर आए दिन चर्चा में रहने वाले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने एक बार फिर से मर्यादा की सीमाएं लांघ दी हैं. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी को लेकर एक ऐसी शर्मनाक टिप्पणी की है जिसमें महिला विरोधी भाव से लेकर रंगभेद और नस्लभेद जैसी बुराइयां शामिल हैं. एक औपचारिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सोनियां गाधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि, 'यदि राजीव गांधी ने उनकी (सोनिया) बजाय किसी नाइजीरियन महिला से शादी की होती तो क्या तब भी कांग्रेस पार्टी उन्हें अपना अध्यक्ष बनाती?'
भाजपा ने इसे उनका निजी बयान बताते हुए कहा है कि वह इस बयान की आलोचना करती है.
गिरिराज सिंह के इस बयान के बाद उनकी आलोचना शुरू हो गई है. सामाजिक संगठनों से लेकर राजनीतिक दलों के लोगों ने भी उनके इस बयान को बेहद शर्मनाक बताया है. कांग्रेस पार्टी तथा अन्य विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गिरिराज सिंह को केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाने की मांग कर दी है. भारतीय जनता पार्टी ने भी गिरिराज सिंह के इस बयान से पल्ला झाड़ लिया है. पार्टी ने इसे उनका निजी बयान बताते हुए कहा है कि वह इस बयान की आलोचना करती है. इस मामले के तूल पकड़ने के बाद से चौतरफा आलोचनाओं का सामना कर रहे गिरिराज सिंह ने अपने इस बयान पर खेद जताया है. उन्होंने सफाई दी है कि यह बयान एक 'ऑफ द रिकॉर्ड' बातचीच का हिस्सा था, और उनका इरादा किसी को भी दु:ख पहुंचाने का नहीं था. इस पूरे प्रकरण में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गिरिराज सिंह को लेकर क्या रूख अपनाते हैं.
समन पर रोक लगाकर सुप्रीम कोर्ट ने मनमोहन सिंह को राहत दी
सुप्रीम कोर्ट ने कोल ब्लाक आवंटन से जुड़े एक मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने उनके खिलाफ निचली अदालत द्वारा जारी किए गए उस समन को खारिज कर दिया है जिसमें उन्हें बतौर आरोपी अदालत में पेश होने को कहा गया था. यह मामला ओडिशा के तालाबीरा-2 कोल ब्लाक के आवंटन का है. यह कोल ब्लॉक हिंडाल्को कंपनी को आवंटित किया गया था. पूर्व प्रधानमंत्री की तरफ से जानेमाने वकील केटीएस तुलसी तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने पैरवी की. इन दोनों ने पूर्व प्रधानमंत्री को तलब किए जाने की वैधता पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट से इस समन को रद्द करने की मांग की. इसको लेकर दलील दी गई कि, निचली अदालत द्वारा जारी किए गए समन में आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत जरूरी माने जाने वाले मंजूरी संबंधी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया. प्रधानमंत्री का बचाव करते हुए उनके वकीलों ने यह भी कहा कि कोयला खदानों का आवंटन बिना किसी आपराधिक नीयत से किया गया था, ऐसे में पूर्व प्रधानमंत्री को भेजा गया समन कहीं से भी न्यायोचित नही है. इन दलीलों को सुनने के बाद न्यायाधीश वी गोपाला गौड़ा और सी नागप्पन की पीठ ने निचली अदालत के समन संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया.
गौरतलब है कि कोयला आवंटन से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही सीबीआई की एक विशेष अदालत ने कुछ दिन पहले ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को समन जारी करके, उन्हें आठ अप्रैल को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था. सीबीआई कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ मनमोहन सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी.
यमन से भारतीयों की वापसी शुरू
हिंसाग्रस्त देश यमन में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी की प्रक्रिया शुरू हो गई है. इसके तहत 350 भारतीयों का पहला दल जिबूती पहुंच गया है. भारतीय नौ सेना का युद्धपोत 'आईएनएस सुमित्रा' इन लोगों को यमन से यहां तक लेकर आया. इसके बाद यह युद्धपोत दूसरी खेप को लेने वापस रवाना हो गया है. बताया जा रहा है कि जिबूती पहुंच चुके ये लोग देर रात तक भारत पहुंच जाएंगे. विदेश मंत्रालय के मुताबिक जिबूती से ये सभी लोग वायुसेना के बोइंग विमान C-17 ग्लोबमास्टर में बैठ कर भारत पहुंचेंगे. इन लोगों के स्वागत के लिए विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह जिबूती में मौजूद थे. उन्होंने यहां पहुंचे सभी लोगों को सुरक्षित घर तक पहंचाने का भरोसा दिलाया. विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक इन 350 लोगों में 100 महिलाएं तथा 25 बच्चे भी शामिल हैं. मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि बाकी भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए सरकार युद्धस्तर पर काम कर रही है. बताया जा रहा है कि यमन में लगभग 4,000 भारतीय मौजूद हैं. गौरतलब है कि हौती विद्रोहियों और अरब देशों की सेनाओं के बीच चल रही लड़ाई के चलते यमन में हालात बेहद खतरनाक हो गए हैं. वहां के राष्ट्रपति अब्द रब्बो मंसूर हादी के देश छोड़कर भाग जाने के बाद भारत ने फौरन अपने नागरिकों को यमन छोड़ने की चेतावनी जारी की थी.