लड़ाई से जूझते यमन में अपने नागरिकों को बचाने के लिए भारत ने जिस कुशलता से कई पहलुओं को साधा उसने अमेरिका सहित कई देशों को उससे मदद मांगने पर मजबूर कर दिया.
गृहयुद्ध से जूझते यमन में फंसे करीब साढ़े तीन हजार भारतीयों को वहां से सुरक्षित निकालना आसान नहीं था. लेकिन जिस तरह से इस काम को अंजाम दिया गया उसके चलते भारत दुनिया भर से तारीफें बटोर रहा है. ऑपरेशन राहत के नाम से चलाया गया यह अभियान अपने आखिरी चरण में है.
यमन में हालात बहुत जटिल हैं. हूती विद्रोहियों ने वहां राजधानी सना सहित देश के एक बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया है. उनकी कार्रवाई के चलते वहां के वर्तमान राष्ट्रपति को देश छोड़कर भागना पड़ा और सऊदी अरब में शरण लेनी पड़ी. जवाबी कार्रवाई में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले दस देशों का गठबंधन यमन पर बम बरसा रहा है. 31 मार्च को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का ट्वीट भी आया कि यमन का एयरपोर्ट हूती लड़ाकों के नियंत्रण में है और एयरस्पेस सऊदी अरब और उसके सहयोगी देशों के कब्जे में जिसके चलते स्थिति बहुत जटिल हो गई है.
cnn grab
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सऊदी अरब सहित दस देशों की फौज ने यमन एयरस्पेस को नो फ्लाई जोन घोषित किया है. भारत ने यमन की राजधानी सना तक हवाई उड़ानों की अनुमति हासिल की.
इस जटिल स्थिति में भारत ने शानदार कूटनीति का परिचय दिया. उसने हर पक्ष को संतुलन के साथ साधा. इसके चलते भारत ने न सिर्फ अपने बल्कि कई दूसरे देशों के लोगों को भी वहां से सुरक्षित निकाला. इनमें अमेरिका, जर्मनी और पाकिस्तान भी शामिल है.
मार्च के आखिरी हफ्ते में खबरें आई थीं कि यमन में हूती विद्रोहियों के कब्जे और इसके जवाब में सऊदी अरब की वहां बमबारी के चलते साढ़े तीन हजार भारतीयों की जिंदगी संकट में है. इसके बाद सरकार ने फौरन बचाव अभियान पर अमल शुरू कर दिया. इससे पहले वह लगातार चेतावनी जारी कर रही थी कि यमन में रह रहे भारतीय जितनी जल्दी हो सके देश छोड़ दें. लेकिन रोजगार के लिए दलालों को पैसा देने के चलते भारी कर्ज से दबे लोग जब तक हो सके वहां रुकना चाहते थे. इसलिए वे फंस गए.
31 मार्च को सरकार ने रक्षा राज्य मंत्री वीके सिंह को ऑपरेशन राहत का जिम्मा देकर यहां से जिबूती के लिए रवाना किया. जिबूती सोमालिया से लगता एक छोटा सा देश है. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बचाव कार्य में सहयोग देने के लिए सऊदी अरब के शाह से बातचीत कर चुके थे. भारत ने यमन के सबसे बड़े शहर सना तक रोज हवाई उड़ानों की अनुमति हासिल की. गौरतलब है कि सऊदी अरब की अगुवाई वाले दस देशों के गठबंधन ने यमन एयरस्पेस को नो फ्लाई जोन घोषित किया हुआ है.
इस पूरी कवायद का नतीजा सुखद रहा. यही वजह है कि छह अप्रैल को एक प्रेस विज्ञप्ति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश मंत्रालय, नौसेना, एयरफोर्स, एयरइंडिया, शिपिंग, रेलवे और राज्य सरकारों की तारीफ करते हुए कहा कि इन सबके बढ़िया समन्वय ने राहत कार्य में बहुत अहम भूमिका निभाई.
एक से पांच अप्रैल के बीच 1330 लोगों को यमन से निकालकर जिबूती लाया गया. इनमें 1154 भारतीय थे और बाकी उन देशों के नागरिक जिनकी सरकारों ने भारत से विशेष तौर पर अपने नागरिकों को बचाने की भी गुजारिश की थी.
विदेश मंत्रालय के मुताबिक अब तक भारतीय वायु सेना यमन से 1144 लोगों को सुरक्षित निकाल चुकी है. इनमें से ज्यादातर को जिबूती लाया गया. एयर इंडिया ने भी इस बीच सना के लिए तीन विशेष उड़ानें भरीं. दो एयरबस और एक बोइंग 777 के जरिये 574 लोगों को जिबूती लाया गया.
भारतीय नौसेना का भी इस काम में बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा. बीते हफ्ते उसने अपने तीन युद्धपोत यमन भेजे थे. इनमें से आईएनएस मुंबई नाम का एक मिसाइल विध्वंसक पोत भी था. भारत के शिपिंग कॉरपोरेशन ने भी कवरत्ति और कोरल नाम के दो यात्री जहाज वहां भेजे. भारी गोलीबारी के चलते ये जहाज यमन के बंदरगाह अदन तक नहीं जा सकते थे इसलिए भारतीयों को इन जहाजों तक लाने के लिए छोटी-छोटी नावों का इस्तेमाल किया गया. एक से पांच अप्रैल के बीच 1330 लोगों को यमन से निकालकर जिबूती लाया गया. इनमें 1154 भारतीय थे और बाकी उन देशों के नागरिक जिनकी सरकारों ने भारत से विशेष तौर पर अपने नागरिकों को बचाने की भी गुजारिश की थी. इन 26 देशों में अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस भी शामिल थे. अमेरिका ने यमन में फंसे अपने नागरिकों को कहा कि वे देश से बाहर निकलने के लिए भारतीय दूतावास की मदद लें.
स्वदेश लौटने के बाद भी सरकार इन लोगों का ख्याल रख रही है. ज्यादातर विमान और समुद्री जहाज यात्रियों को लेकर मुंबई और कोच्चि आ रहे हैं. इसके बाद अपने-अपने इलाकों तक पहुंचने के लिए रेलवे उनकी मदद कर रहा है. वह इन्हें आगे की यात्रा के लिए मुफ्त टिकट दे रहा है. राज्य सरकारें इनमे से कई लोगों की आर्थिक सहायता भी कर रही हैं.