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जीतनराम मांझी हैं तो नीतीश कुमार के जीवन में रस है
लगता है कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने ठान लिया है कि वे राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए सिरदर्द बने रहेंगे. मुख्यमंत्री पद से हटने के एक महीने बाद भी वे मुख्यमंत्री आवास छोड़ने को तैयार नहीं है. वह भी कई बार कहे जाने के बावजूद. सुनी-सुनाई बात यह  है कि उन्होंने शर्त रखी है कि उन्हें पटना में नीतीश कुमार का मौजूदा आवास आवंटित किया जाए तभी वे मुख्यमंत्री आवास से हटेंगे. मांझी तो यह भी कह रहे हैं कि उनके हटने के बाद इस घर को गंगाजल से धोया जाएगा जिसमें छह महीने लगेंगे. तब तक बिहार में चुनाव हो जाएंगे जिसमें तय है कि नीतीश के हाथ से सत्ता जानी है. तो उनसे बंगला खाली कराकर नीतीश को क्या मिल जाना है? अब इस पर कोई चिढ़े नहीं तो क्या करे?
पहलाज निहलानी ने दिल्ली में बहार लाई है
सूचना और प्रसारण मंत्रालय में आजकल बहार आई हुई है. इसका कारण हैं पहलाज निहलानी जिनसे फिल्म उद्योग औऱ 'उदारवादी' विचारों वाले लोग खासे नाराज हैं. वे फिल्मों पर तरह-तरह के कथित जुल्म ढा रहे हैं और इसकी शिकायत करने बड़ी संख्या में आजकल फिल्म वाले सूचना और प्रसारण मंत्रालय में आ रहे हैं. चूंकि आजकल बड़े-बड़े तारे और तारिकाएं भी फिल्म बनाने के काम में लग गए हैं इसलिए अनुष्का शर्मा जैसे नये-नवेले प्रोडयूसर भी आजकल यहां आए-दिन आए हुए रहते हैं. जाहिर सी बात है बॉलीवुड को हो तो हो मंत्रालय में काम करने वालों को पहलाज निहलानी से कोई शिकायत नही है. बल्कि वे तो इनमेें से कइयों की जिंदगियों में रंग ही घोलने का काम कर रहे हैं.
फिर उलझी सुलझी उलझन
यह कुछ-कुछ चार दिन की चांदनी, फिर अंधेरी रात जैसा हो गया. सबको मालूम है कि सीबीआई का स्थापना दिवस एक अप्रैल यानी मूर्ख दिवस के दिन पड़ता है. पिछले दिनों खबर आई कि एजेंसी के कुछ अधिकारी इससे अटपटा महसूस करते हैं जिसके चलते इस साल स्थापना दिवस पर होने वाले समारोह की तारीख 13 अप्रैल कर दी गई. अब सुनी-सुनाई बात यह है कि यह तारीख भी आगे खिसक गई है. बताते हैं कि वित्त मंत्री अरुण जेतली इस आयोजन के मुख्य अतिथि हैं जिनके कार्यक्रम में आखिरी समय पर बदलाव होने की वजह से तारीख आगे बढ़ानी पड़ी. अब यह समारोह 27 अप्रैल को होने की बात कही जा रही है.
देश की संपत्ति, हमारी अपनी संपत्ति
देश की संपत्ति को अपनी संपत्ति समझने की भावना है तो बड़ी पवित्र. लेकिन इसकी रक्षा करने की भावना पर अमल करते हुए कुछ लोग इतना आगे निकल जाते हैं कि सार्वजनिक जगहों में लगी टाइलें या शीशे उखाड़कर अपने घर ले जाने लगते हैं. राष्ट्रकुल खेलों के बाद ऐसी बहुत सी घटनाएं हुई थीं. कुछ ऐसी ही खबर योजना आयोग की जगह बने नीति आयोग से आई है. खबर सुनी-सुनाई ही है कि आयोग के एक सदस्य की पत्नी ने उनसे शिकायत की कि दीवारें खाली होने की वजह से उनका दफ्तर सूना-सूना सा लगता है. उनकी सलाह थी कि कुछ पेटिंग लगाने से यह कमी दूर हो जाएगी. सदस्य जी ने इस बाबत संबंधित अधिकारी को टटोला तो उन्हें एक अटपटी जानकारी मिली. बताया गया कि इस दफ्तर में पहले जो साहब बैठते थे उनके लिए सरकारी खर्चे से बहुत महंगी पेंटिंगें मंगाई गई थीं. लेकिन दफ्तर समेटते हुए वे उनको भी अपने साथ ले गए. देश की संपत्ति को अपना समझ कर इसकी रक्षा की मानवोचित भावना जो ठहरी.