यदि आनुवांशिक कारकों को छोड़ दें तो किसी व्यक्ति की ऊंचाई कितनी होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसे बचपन में कितना पौष्टिक आहार मिला. कई बार यह भी देखा गया है कि यदि किसी बच्चे को उचित पोषक आहार मिले तो उसकी ऊंचाई अपने मां-बाप से ज्यादा हो जाती है. भारतीयों की औसत ऊंचाई कम होने के पीछे यह एक बड़ा कारण माना जाता है. अब एक नए अध्ययन से पता चला है भारतीय परिवारों के बीच लड़कों की चाहत का भी इसमें काफी योगदान है.

भारतीय परिवार की पहली लड़की की ऊंचाई अफ्रीका की अपनी समकक्ष के मुकाबले कम होने की ज्यादा संभावना होगी. वे लड़कियां जिनकी कोई बड़ी बहन है उनकी हालत तो और भी बुरी होती है

इस अध्ययन के हिसाब से हमारे समाज में लड़कों को तरजीह मिलने की वजह से लड़कियों की ऊंचाई पर ज्यादा असर पड़ा रहा है. यह अध्ययन नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी (अमेरिका) में अर्थशास्त्र विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर सीमा जयचंद्रन, रोहिणी पांडे और हार्वर्ड केनेडी स्कूल (अमेरिका) में पब्लिक पॉलिसी विभाग के प्रोफेसर मोहम्मद कमाल ने किया है. इस टीम ने अफ्रीका के सब-सहारा देशों (सहारा मरुस्थल के दक्षिण में बसे देश) और भारत के 1.70 लाख बच्चों के स्वास्थ्य और जनसंख्या से जुड़े डाटा के आधार पर कुछ निष्कर्ष निकाले हैं.

इस अध्ययन के हिसाब से भारत में यदि किसी परिवार में पहला बच्चा लड़का होता है तो यह संभावना ज्यादा होती है कि अफ्रीकी देशों में परिवार के पहले बच्चे से उसकी ऊंचाई ज्यादा होगी. लेकिन भारत के परिवार में उसके बाद के बच्चे ऊंचाई में अपने अफ्रीकी समकक्षों के मुकाबले पिछड़ जाते हैं. लड़कियों के मामले में यह स्थिति और बदतर होती है. भारतीय परिवार की पहली लड़की की ऊंचाई अफ्रीका की अपनी समकक्ष के मुकाबले कम होगी. वे लड़कियां जिनकी कोई बड़ी बहन है उनकी हालत तो और भी बुरी होती है.

लड़कों की चाहत से यह फर्क पैदा हो रहा है

अध्ययन कहता है कि भारतीय परिवारों में लड़कों को मिलने वाली वरीयता ऊंचाई में यह अंतर पैदा कर रही है. भारतीय परिवार चाहते हैं कि पहला बच्चा लड़का हो और उसकी देखभाल सबसे अच्छे तरीके से हो. इन दो वजहों से पारिवारिक संसाधनों को उपयोग लड़कों के लिए ज्यादा होने लगता है.

ये आंकड़े इसलिए चौंकाने वाले हैं कि भारत की विकास दर अफ्रीका के इन देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा है. फिर भी इन देशों के बच्चों की औसत ऊंचाई भारतीय बच्चों के मुकाबले ज्यादा होती है. इस अध्ययन का एक और चौंकाने वाला निष्कर्ष है कि जन्म के क्रम के हिसाब से बच्चों की ऊंचाई कम होने का यह अंतर सिर्फ हिंदू परिवारों में है. अध्ययनकर्ताओं ने केरल की मुस्लिम आबादी के आंकड़ों को भी इन पैमानों पर जांचा है. यह अंतर इन परिवारों में नहीं पाया गया. इस अध्ययन का एक सीधा निष्कर्ष यह भी है कि यदि किसी लड़की की ऊंचाई कम रहेगी तो आनुवांशिक रूप से इसका असर उसके बच्चे की ऊंचाई पर भी पड़ेगा.