अपनी राजनीतिक टूटों के लिए कुख्यात रहे जनता परिवार ने आखिरकार एक होने की आधिकारिक घोषणा कर दी है. सपा, जेडीयू, आरजेडी, जेडीएस, आईएनएलडी और समाजवादी जनता पार्टी को मिला कर बने इस नये दल की कमांन मुलायम सिंह यादव संभालेंगे. एक दौर में ये सभी पार्टियां 1988 में बने जनता दल का हिस्सा थीं, इसलिए इसे ‘जनता परिवार’ का विलय भी कहा जा रहा है. इस विलय के बाद बनने वाली पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह क्या होगा, यह तय होना अभी बाकी है. नई दिल्ली में मुलायम सिंह यादव के घर पर शरद यादव, नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, एचडी देवेगौड़ा तथा अभय चौटाला सहित अन्य नेताओं की मौजूदगी में जनता परिवार के विलय का ऐलान किया गया.
इस विलय के बाद बनने वाली पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह क्या होगा, यह तय होना अभी बाकी है
इस मौके पर बोलते हुए मुलायम सिंह यादव ने इस विलय को जनता की मांग बताया. उन्होंने कहा कि महीने भर बाद एक साल पूरा करने वाली केंद्र सरकार ने अभी तक ऐसा एक भी काम नहीं किया है जिससे आम जनता का हित हुआ हो, ऐसे में लोग चाहते हैं कि एक नया राजनीतिक विकल्प सामने आए. उन्होंने दावा किया कि जनता परिवार का यह मिलन देश की राजनीति को नई दिशा देगा. गौरतलब है कि राजनीतिक गलियारों में बहुत दिनों से इस विलय को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं. इस बारे में सभी दलों के नेता कई दौर की वार्ता भी कर चुके थे, जिसके बाद हाल ही में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने अपनी पार्टी के जनता परिवार में विलय का एलान कर दिया था. कुछ ही समय बाद बिहार में विधानसभा चुनाव होंने हैं. ऐसे में इस विलय की पहली परीक्षा भी वहीं होगी.
कमेटी बताएगी कि नेताजी से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक होंगी या नहीं?
नेताजी सुभाषचंद्र बोस से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग के बीच केंद्र सरकार ने वही कदम उठाया है जिसकी संभावना जताई जा रही थी. सरकार ने इस बारे में एक केंद्र स्तरीय कमेटी का गठन किया है. यह कमेटी तय करेगी कि सरकार के पास मौजूद नेताजी से जुड़ी गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक किया जाए या नहीं. कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में बनाई गई इस समिति में प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय रॉ, तथा आईबी से जुड़े अधिकारियों को शामिल किया गया है. सरकार का यह फैसला प्रधानमंत्री मोदी और नेताजी के प्रपौत्र सूर्य कुमार बोस की जर्मनी में हुई मुलाकात के बाद आया है. सोमवार को हुई इस मुलाकात में मोदी ने बोस को भरोसा दिलाया था कि वे नेताजी से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करने की उनकी मांग पर विचार करेंगे. माना जा रहा है कि इसी क्रम में सरकार ने यह कमेटी बनाई है.
उमर अब्दुल्ला ने कहा, एलओसी को अंतरराष्ट्रीय सीमा मान लेना चाहिए
जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि नियंत्रण रेखा को भारत और पाकिस्तान के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा मान लेना चाहिए. उनका कहना है कि कश्मीर समस्या का समाधान वहां यथास्थिति बनाए रखने से नहीं होगा, बल्कि ऐसा तभी संभव हो सकता है जबकि एलओसी को अंतरराष्ट्रीय सीमा में तब्दील कर दिया जाय और लोगों को मुक्त आवाजाही की इजाजत मिल सके. भारत और पाकिस्तान के बीच भविष्य में किसी भी तरह के क्षेत्रीय हस्तांतरण को असंभव बताते हुए उन्होंने दलील दी कि नियंत्रण रेखा को अंतरराष्ट्रीय सीमा के तौर पर स्वीकार करना ही दोनों देशों के लिए सबसे मुफीद विकल्प है. उमर ने यह बातें वाशिंगटन स्थित जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट ग्रुप इंडिया डायलॉग की ओर से आयोजित ‘द कश्मीर कॉन्क्लेव’ कार्यक्रम में कहीं. भारत पाक के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के विचार का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह का कदम सफल नहीं होगा. उमर के मुताबिक इस मुद्दे को भारत और पाकिस्तान को खुद ही सुलझाना चाहिए. उन्होंने कहा कि बातचीत केवल नयी दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच नहीं होनी चाहिए, बल्कि सीमा के दोनों तरफ मौजूद लोगों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए.