उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति करने के लिए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) के गठन की प्रक्रिया फिलहाल अटक गई है. देश के मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू ने इस आयोग के दो अहम सदस्यों का चयन करने वाली कमेटी का हिस्सा बनने से इंकार कर दिया है. उनके इस फैसले से सरकार के 11 मई से पहले एनजेएसी के गठन की उम्मीदों को झटका लगा है. जस्टिस दत्तू के इस फैसले की जानकारी देश के अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने दी. सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ के सामने उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति दत्तू ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन उस याचिका को देखते हुए लिया है जिसमें न्यायिक नियुक्ति आयोग के गठन को चुनौती दी गई है. रोहतगी के मुताबिक जस्टिस दत्तू का कहना है कि जब तक इस याचिका को लेकर शीर्ष अदालत कोई फैसला नहीं सुनाती तब तक वे इस पैनल का हिस्सा नहीं रहेंगे. जस्टिस दत्तू ने इस बाबत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा है. छह सदस्यीय न्यायिक नियुक्ति आयोग के दो अहम सदस्यों की नियुक्ति के लिए जो पैनल अधिकृत है, उसमें मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बतौर सदस्य शामिल हैं. जस्टिस दत्तू के इंकार के बाद देखना होगा कि सरकार का इस बारे में क्या रुख रहता है.
बीसीसीआई में घमासान, श्रीनिवासन की चिट्ठी के बाद अनुराग ठाकुर का पलटवार
बीसीसीआई में दो गुटों के बीच चल रहा टकराव बद से बदतर होता जा रहा है. कुछ दिनों पहले आईसीसी के चेयरमैन और बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने एक चिट्ठी लिखकर बोर्ड सचिव अनुराग ठाकुर पर निशाना साधा था. अब ठाकुर ने उन पर पलटवार करते हुए उन्हें एक खुली चिट्ठी लिखी है. दरअसल आईसीसी ने बीसीसीआई को जो चिट्ठी लिखी थी उसमें उसका कहना था कि उसे बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर और करण गिल्होत्रा की मुलाकात का पता चला है. आईसीसी के मुताबिक गिल्होत्रा का नाम संदिग्ध सट्टेबाजों में शामिल है इसलिए अनुराग को उनसे दूर रहना चाहिए. अनुराग ठाकुर श्रीनिवासन को खुला खत लिखकर पलटवार किया है. उनका कहना है कि उन्हें पता नहीं है कि गिल्होत्रा पर बुकी होने का संदेह है और अगर श्रीनिवासन को यह जानकारी थी तो उन्हें यह जानकारी उनके (ठाकुर) के साथ साझा करनी चाहिए थी. अनुराग ने अपनी चिट्ठी में लिखा है, 'मैं आपसे निवेदन करता हूं कि कम से कम अब ऐसे 'संदेहास्पद बुकी' की लिस्ट मेरे और दूसरे बीसीसीआई अधिकारियों के साथ साझा करें जिससे आगे हम ऐसे लोगों से दूर रह सकें. साथ ही अपने परिवार के उन सदस्यों को भी ये लिस्ट दे दें जिन पर सट्टेबाजी के आरोप सही साबित हो चुके हैं.'
श्रीनिवासन गुट और विरोधी गुट के बीच टकराव का ये पहला मुद्दा नहीं है. मार्च में नए बोर्ड के गठन के बाद से दोनों गुट कई मुद्दों पर टकराते रहे हैं. दरअसल बोर्ड में अब श्रीनिवासन का पहले जैसा वर्चस्व खत्म हो गया है और यही वजह है कि इस साल सितंबर में ही उनके आईसीसी के चेयरमैन पद से विदाई के कयास भी लग रहे हैं.