इयोन वेल्स ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की अंडरग्रेजुएट छात्रा है. वह हाल में घर लौट रही थी कि उस पर एक अजनबी ने यौन हमला किया. इयोन ने एक चिट्ठी लिखी- अपने हमलावर के नाम, और उन लोगों के नाम जो उसकी मदद के लिए आए. यह चिट्ठी पहले ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्रों की पत्रिका में छपी और फिर ब्रिटेन के टेलीग्राफ़ में. यह यौन हमले से कातर और हताश हुई किसी लड़की की नहीं, अपनी बिरादरी में भरोसा रखने वाली एक मज़बूत लड़की की कहानी है जो हमारी-आपकी दोस्त और सहेली हो सकती है.
मैं ये चिट्ठी तुम्हारे नाम नहीं लिख सकती, क्योंकि मैं तुम्हारा नाम नहीं जानती.
मैं सिर्फ़ इतना जानती हूं कि तुम एक गंभीर यौन आक्रमण और लंबे हिंसक हमले के आरोपी हो.
और मेरा एक सवाल है.
जब तुम ट्यूब (लंदन की मेट्रो ट्रेन) से मेरे पड़ोस तक मेरा पीछा करते सीसीटीवी कैमरे पर पकड़े गए. जब तुम इंतज़ार कर रहे थे कि मैं अपनी सड़क पर आऊं और तुम मुझ तक पहुंचो. जब तुमने अपने हाथ से मेरा मुंह इस तरह जकड़ लिया था कि मेरा सांस लेना मुश्किल हो गया था. जब तुमने मुझे मेरे घुटनों पर ला दिया था और मेरा चेहरा लहूलुहान हो गया था. जब मैं तुम्हारे हाथों की जकड़ से छूटने के लिए लड़ी ताकि मैं चीख सकूं.
जब तुमने मुझे बाल पकड़ कर खींचा और जब तुमने मेरा सिर फुटपाथ से दे मारा और मुझसे कहा कि मदद के लिए चिल्लाना बंद करूं. जब मेरी पड़ोसन ने तुम्हें खिड़की से देखा और तुम पर चिल्लाई, और तुमने उसे घूरा और मेरी कमर और गर्दन पर वार करते रहे.
मैं नहीं जानती, तुम्हारी ज़िंदगी में कौन से लोग हैं? मैं तुम्हारे बारे में कुछ नहीं जानती. लेकिन मैं यह जानती हूं: उस रात तुमने सिर्फ़ मुझ पर हमला नहीं किया.
जब तुम इतनी ताकत से मेरे वक्षों पर झपटे कि मेरी ब्रा फट कर आधी रह गई. जब तुमने मेरे असबाब की तरफ देखा तक नहीं क्योंकि तुम्हें मेरा जिस्म चाहिए था. जब तुम मेरा जिस्म हासिल करने में नाकाम रहे, क्योंकि मेरे घरवाले और पड़ोसी निकल आए और तुमने उन्हें सामने देखा.
जब सीसीटीवी कैमरे में तुम भागते हुए और 20 मिनट बाद, एक और औरत का पीछा करते दिख रहे थे, जिसके बाद उसी स्टेशन पर तुम गिरफ़्तार हो गए. जब मैं पांच बजे सुबह पुलिस स्टेशन में थी जबकि तुम चार मंज़िल नीचे हिरासत में थे. जब मुझे फॉरेंसिक टीमों को अपने कपड़े और अपने नग्न जिस्म पर मौजूद चोट और निशानों के फोटो देने पड़े.
क्या तुमने एक बार भी अपनी ज़िंदगी में आए लोगों के बारे में सोचा?
मैं नहीं जानती, तुम्हारी ज़िंदगी में कौन से लोग हैं? मैं तुम्हारे बारे में कुछ नहीं जानती. लेकिन मैं यह जानती हूं: उस रात तुमने सिर्फ़ मुझ पर हमला नहीं किया.
मैं एक बेटी हूं. मैं एक दोस्त हूं. मैं एक प्रेयसी हूं. मैं एक छात्रा हूं. मैं एक बहन हूं. मैं एक भतीजी हूं. मैं एक पड़ोसी हूं. मैं एक कामगार हूं जो हर रोज़ रेलवे में बने कैफ़े में लोगों को कॉफी सर्व करती है. ये सारे लोग जो मुझसे ये रिश्ता रखते हैं, मेरी बिरादरी बनाते हैं और तुमने उनमें से हरेक पर हमला किया. तुमने उस सच्चाई को नापाक किया जिसकी ये सब लोग नुमाइंदगी करते हैं और जिसके लिए मैं लड़ना कभी बंद नहीं करूंगी: कि दुनिया में अच्छे लोगों की तादाद बुरे लोगों से कई गुना ज़्यादा है.
ये चिट्ठी वाकई तुम्हारे लिए कतई नहीं है, यह उन तमाम पीड़ितों के लिए है जिन पर गंभीर यौन हमले हुए या इसकी कोशिश हुई और उनकी बिरादरियों के एक-एक सदस्य के लिए है.
हम आख़िरी ट्रेन में घर लौटेंगे और हम सड़क पर अकेले चलेंगे, क्योंकि हम इस विचार के आगे घुटने नहीं टेकेंगे कि ऐसा करके हम खुद को ख़तरे में डाल रहे हैं.
मुझे यकीन है तुम्हें 7/7 याद होगा. मुझ यह भी यकीन है कि तुम्हें याद होगा कि किस तरह आतंकी जीते नहीं, क्योंकि लंदन की पूरी बिरादरी अगले दिन ट्यूब पर चली आई थी. तुमने अपना हमला किया, लेकिन मैं अब अपनी ट्यूब में लौट रही हूं.
मेरी बिरादरी यह महसूस नहीं करेगी कि अंधेरे के बाद घर लौटना हमारे लिए असुरक्षित है. हम आख़िरी ट्रेन में घर लौटेंगे और हम सड़क पर अकेले चलेंगे, क्योंकि हम इस विचार के आगे घुटने नहीं टेकेंगे कि ऐसा करके हम खुद को ख़तरे में डाल रहे हैं.
हम साथ आना जारी रखेंगे, किसी सेना की तरह, जब हमारी बिरादरी के किसी भी सदस्य को डराया जाएगा.
ये वह लड़ाई है जो तुम नहीं जीतोगे.
बिरादरी वह ताकत है जिसे हम कम आंकते हैं. हम उसी अख़बार वाले से रोज अख़बार लेते हैं, हम पार्क में अपने कुत्ते को टहला रही महिला को देख हाथ हिलाते हैं, हर रोज़ हम एक ही मुसाफ़िर के बगल में बैठते हैं.
हर शख्स जिसे हम जानते हैं और जिसका ध्यान रखते हैं, हर रोज़ के कुछ सेकंड से ज्यादा नहीं लेता, लेकिन उनसे हमारी ज़िंदगियों का एक बड़ा हिस्सा बनता है. एक बार किसी ने मुझसे यहां तक कहा, चाहे वे जितने अनजाने मालूम होते हों, हमारे सपनों में आने वाले चेहरे वे चेहरे होते हैं जिन्हें हमने पहले देखा है.
हमारी बिरादरी हमारे जेहन में बस जाती है. तुम, मेरे हमलावर, तुमने मेरे भीतर की, या मेरे कर्म की कोई कमज़ोरी साबित नहीं की, बस मनुष्यता की अटूटता का प्रदर्शन करा दिया.
जब तुम बैठकर मुकदमे का इंतज़ार कर रहे हो, मुझे उम्मीद है, तुम सिर्फ ये नहीं सोच रहे कि तुमने क्या किया है. मुझे उम्मीद है, तुम बिरादरी के बारे में सोच रहे हो. अपनी बिरादरी के बारे में- भले ही तुम इसे अपने आसपास रोज़ नहीं देखते हो. ये यहां है. हर तरफ है.
तुमने मेरी बिरादरी को कम करके आंका. या मुझे कहना चाहिए, हमारी? मैं कुछ इस तरह की बात कह सकती थी, ‘कल्पना करो, अगर मैं तुम्हारी बिरादरी की सदस्य होती’, लेकिन इसकी जगह मैं यह कहने जा रही हूं.
बिरादरी में कोई सरहद नहीं होती. सिर्फ़ अपवाद होते हैं, और तुम उनमें से एक हो.
इयोन वेल्स
अनुवादः प्रियदर्शन