पूरब से पश्चिम तक भारत के सभी राज्यों को एक शानदार सड़क के जरिये आपस में पिरोने के लिए बनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतमाला परियोजना पर जल्द काम शुरू होने वाला है.
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश के चार कोनों पर बसे चार महानगरों को आपस में जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज बनाया था. मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरब से पश्चिम तक सभी राज्यों को आपस में पिरोने के लिए भारतमाला बनाना चाहते हैं. मोदी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पूरब से पश्चिम यानी मिजोरम से गुजरात तक सड़क बनाई जाएगी. सीमावर्ती इलाकों को जोड़ने वाली इस परियोजना पर लगभग 14 हजार करोड़ रु खर्च होने का अनुमान है. भारतमाला, सागरमाला से जुड़ेगी. सागरमाला के तहत बंदरगाहों, तटीय आर्थिक क्षेत्रों और कम से कम 12 स्मार्ट सिटीज को रेल और सड़क नेटवर्क के जरिये देश के भीतरी हिस्सों से जोड़ा जाना है.
एक अखबार से बातचीत में सड़क परिवहन और राजमार्ग सचिव सचिव विजय छिब्बर कहते हैं, 'योजना खासतौर से उत्तरी सीमाओं पर सड़कें बनाने की है. इसे भारतमाला नाम दिया गया है.' छिब्बर के मुताबिक सारी जरूरी मंजूरियां मिल जाने पर काम इसी साल शुरू हो सकता है. बताया जा रहा है कि यह परियोजना मोदी की प्राथमिकताओं में है. इसलिए मंत्रालय को उम्मीद है कि कुछ ही महीनों के भीतर इस पर एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार हो जाएगी.
आधारभूत ढांचे के विकास के लिहाज से तो भारतमाला अहम है ही, रणनीतिक लिहाज से भी इसे काफी महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है.
जानकारों के मुताबिक पूरब से पश्चिम तक फैली इस परियोजना के तहत लगभग पांच हजार 300 किमी कुल लंबाई की नई सड़कें बनानी होंगी. इस पर 14 हजार करोड़ रुपये तक खर्च होने की संभावना है. इस परियोजना पर काम गुजरात और राजस्थान से शुरू होगा जिसके बाद पंजाब और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड की बारी आएगी. फिर उत्तर प्रदेश और बिहार से होते हुए सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और मिजोरम में भारत-म्यांमार बॉर्डर तक सड़कें बनाई जाएंगी. अधिकारियों के मुताबिक परियोजना पांच साल में पूरी करने का लक्ष्य है.
आधारभूत ढांचे के विकास के अलावा भारतमाला रणनीतिक लिहाज से भी अहम परियोजना है. चीन ने अपनी सीमा पर शानदार सड़कें बना ली हैं जबकि भारत के सीमावर्ती इलाकों में अब भी संपर्क को लेकर समस्या रहती है. इस परियोजना से यह स्थिति बदलेगी. सीमावर्ती इलाकों में सैन्य यातायात सुधरेगा. इससे किसी आपात स्थिति में सेना की प्रतिक्रिया पहले से बेहतर होगी. परियोजना का एक बड़ा हिस्सा हिमालयी राज्यों में पड़ रहा है जो स्थानीय अर्थव्यवस्था के कमजोर होने की वजह से पलायन सहित कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं. उम्मीद की जा रही है कि सीमावर्ती इलाकों में व्यापार बढ़ाने में मदद करके भारतमाला परियोजना स्थानीय आर्थिकी को भी सुधारेगी.