नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद माना जा रहा था कि दाऊद इब्राहिम भारत के शिकंजे में आ सकता है. लेकिन कुछ समय पहले मोदी सरकार ने कहा कि उसे पता ही नहीं कि दाऊद कहां है. अब मीडिया रिपोर्टें बता रही हैं कि यह दुर्दांत आतंकी कराची में रह रहा है.
बीते साल मई की बात है. आम चुनाव के नतीजे आ चुके थे. भाजपा के अप्रत्याशित रूप से बहुमत में आने के बाद तय हो गया था कि नरेंद्र मोदी भारत के अगले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं. खबरों से लेकर सोशल मीडिया तक सब जगह मोदी की चर्चा चरम पर पहुंची हुई थी. इसी दौरान तमाम खबरों के बीच एक खबर पाकिस्तान से भी आई. इसमें कहा गया था कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम ने अपना ठिकाना बदल लिया है. खबर के मुताबिक उसे उसने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से कहा कि वह कराची छोड़ना चाहता है. इसके बाद उसे अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर कहीं शिफ्ट कर दिया गया.
अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद को डर था कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उसके खिलाफ कमांडो ऑपरेशन हो सकता है इसलिए उसने कराची से अपना ठिकाना बदल लिया.
दाऊद के इस तरह ठिकाना बदलने को दिल्ली की सत्ता में नरेंद्र मोदी के आगमन से जोड़ा गया था. दरअसल इससे कुछ समय पहले एक गुजराती चैनल संदेश न्यूज को दिए गए साक्षात्कार में मोदी ने दाऊद इब्राहिम को भारत लाने के सवाल पर ओसामा बिन लादेन पर हुई कार्रवाई का उदाहरण दिया था. इसका संदर्भ तत्कालीन गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे का वह बयान था कि दाऊद को पकड़ने के लिए भारत एफबीआई की भी मदद ले रहा है. गृह मंत्री द्वारा इस तरह का सार्वजनिक बयान देने पर निशाना साधते हुए मोदी ने पूछा कि क्या अमेरिका ने एबटाबाद में लादेन के ठिकाने पर ऑपरेशन चलाने से पहले प्रेस कांफ्रेंस की थी. खबरों के मुताबिक अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद को डर था कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उसके खिलाफ कमांडो ऑपरेशन हो सकता है इसलिए उसने कराची से अपना ठिकाना बदल लिया. इन खबरों ने एक वर्ग में उम्मीद पैदा कर दी थी कि 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों का मास्टर माइंड दाऊद जल्द ही कानून के शिकंजे में होगा.
लेकिन एक साल पहले के वे सारे समीकरण अब उलटे दिखाई दे रहे हैं. कुछ समय पहले लोकसभा में भाजपा सांसद नित्यानंद राय ने सरकार से पूछा था कि देश में विभिन्न आतंकी मामलों में वांछित दाऊद इब्राहिम और अन्य आतंकियों के प्रत्यर्पण की स्थिति क्या है? इस पर गृहराज्य मंत्री हरिभाई चौधरी का जवाब था कि सरकार को उसका पता मालूम नहीं है और पता मिलने पर उसके प्रत्यर्पण की कार्यवाही की जाएगी.
भारत लगातार कहता रहा है कि दुनिया के मोस्ट वांटेड अपराधियों की सूची में शामिल दाऊद पाकिस्तान में है. ऐसे में हरिभाई चौधरी के इस जवाब से सरकार की किरकिरी होनी स्वाभाविक ही थी.
भारत लगातार कहता रहा है कि दुनिया के मोस्ट वांटेड अपराधियों की सूची में शामिल दाऊद पाकिस्तान में है. वह उसे प्रत्यर्पित करने के लिए समय-समय पर पाकिस्तान पर दबाव भी बनाता रहा है. ऐसे में हरिभाई चौधरी के इस जवाब से सरकार की किरकिरी होनी स्वाभाविक ही थी. जल्द ही उसे इस बात का अहसास भी हो गया और वह डैमेज कंट्रोल मोड में आ गई. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह का बयान आया कि इस बारे में संदेह की कोई गुंजाइश नहीं है कि दाऊद कहां है. उन्होंने कहा, 'सब जानते हैं कि दाऊद कहां छिपा है और कौन उसे संरक्षण दे रहा है.' गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू का भी कहना था कि दाऊद पाकिस्तान में ही है.
अब भारत पाक के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बातचीत पर छाए संशय से ऐन पहले एक बार फिर इस दुर्दांत आतंकी का नाम सुर्खियों में है. समाचार चैनल टाइम्स नाउ ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में है और कराची में उसका घर है. चैनल के मुताबिक उसके रिपोर्टर ने कराची में दाऊद इब्राहिम के घर फोन किया और दाऊद की पत्नी महजबीन शेख से बात की जिसका कहना था कि 'वे अभी सो रहे हैं.' इससे पहले, हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दाऊद कराची के क्लिफ्टन इलाके में रह रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक दाऊद अपने इस ठिकाने पर पत्नी महजबीन शेख, बेटे मोइन नवाज और बेटियों माहरुख, महरीन और माजिया के साथ रहता है.
मुंबई से दुबई और फिर पाकिस्तान तक
महाराष्ट्र में रत्नागिरि जिले के खेर गांव में 26 दिसंबर 1955 को पैदा हुए दाऊद का पूरा नाम शेख दाऊद इब्राहिम कासकर है. यह भी एक विडंबना ही है कि कानून की धज्जियां उड़ाने वाले दाऊद के पिता इकबाल अली कासकर पुलिस कांस्टेबल थे. 70 के दशक में दाऊद ने स्कूल छोड़कर अपराध की राह पकड़ ली. एक समय के अंडरवर्ल्ड डॉन रहे करीम लाला और हाजी मस्तान के गैंग से जुड़ने के बाद उसने मुंबई के नागपाड़ा और डोंगरी इलाके में काम किया. 1980 के दशक आते-आते वह अपना गिरोह बना चुका था. इसके बाद दाऊद का नाम मुंबई अपराध जगत में बहुत तेज़ी से उभरा. हफ्ता वसूली और फिरौती के बाद उसकी गतिविधियां फिल्म जगत, रियल एस्टेट, सट्टे और शेयर बाज़ार तक फैल गईं. बताते हैं कि इस काम में सत्ता और पुलिस में कई स्तर पर संपर्कों ने उसकी मदद की.
1984 में दाऊद अपने पांच भाइयों अनीस, नूरा, इकबाल, मुस्किम, हुमायूं और तीन बहनों जैतून, फरजाना और मुमताज के साथ दुबई चला गया. दुबई में उसका कारोबार और भी तेजी से फैला.
फिर एक वक्त आया जब दाऊद को यह लगने लगा कि पुलिस और सत्ता से उसके समीकरण गड़बड़ा रहे हैं. खुद पर खतरा मंडराते देख उसने भारत छोड़ने का फैसला कर लिया. बताते हैं कि 1984 में दाऊद अपने पांच भाइयों अनीस, नूरा, इकबाल, मुस्किम, हुमायूं और तीन बहनों जैतून, फरजाना और मुमताज के साथ दुबई चला गया. दुबई में उसका कारोबार और भी तेजी से फैला. दाऊद ने दुनिया के कई देशों में पैठ बना ली. उसके नेटवर्क को डी कंपनी कहा जाने लगा.
माना जाता है कि बाबरी मस्जिद विध्वंस और उसके बाद भड़के दंगों ने दाऊद का रुख आतंकवाद की तरफ मोड़ दिया. इसका बदला लेने के लिए उसने भारत की व्यावसायिक राजधानी मुंबई में बम धमाके करवाए. 1993 में हुए इन धमाकों में 257 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से ज़्यादा घायल हुए थे. तब तक दाऊद के संपर्क लश्करे तैय्यबा और अल कायदा से भी हो गए थे. बाद में इसके चलते जब उसके खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ा तो वह दुबई छोड़कर आईएसआई की पनाह में कराची आ गया.
पाकिस्तान में रहकर भी दाऊद ने मुंबई के अंडरवर्ल्ड पर अपनी पकड़ बनाए रखी. हफ्ता वसूली, फिरौती, हथियार, ड्रग्स और सोने की तस्करी जैसे उसके काम पहले की तरफ चलते रहे. दाऊद ने बॉलीवुड में फिल्मों की फायनेसिंग से लेकर दुबई में रियल एस्टेट और कराची में शेयर कारोबार तक तमाम धंधों से भी खूब पैसा बनाया. बताया जाता है कि इस समय दाऊद के पास सात अरब डॉलर यानी तकरीबन 42 हजार करोड़ रु की संपत्ति है. भारत और पाकिस्तान के अलावा उसका कारोबार संयुक्त अरब अमीरात, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में भी फैला हुआ है. ऑस्ट्रेलिया में उसके कई शॉपिंग मॉल बताए जाते हैं. अकेले मुंबई में ही उसकी दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है. इसमें कोलाबा, क्रॉफोर्ड मार्केट, भिंडी बाजार, बांद्रा, ओसीवारा और वर्सोवा में खड़ी कई इमारतें शामिल हैं. डी कंपनी का कारोबार ब्रिटेन और पश्चिमी यूरोप में भी है. इन देशों में दाऊद बड़े पैमाने पर नशीली दवाओं का कारोबार चला रहा है.
इस सफलता में नए-नए संपर्कों का बड़ा हाथ है. जैसे बीते साल खबर आई थी कि दाऊद ने बोको हरम से हाथ मिला लिया है और अब वह भारत में ड्रग्स के कारोबार में नाइजीरिया के इस खूंखार आतंकी संगठन की मदद ले रहा है. बोको हरम से जुड़े नाइजीरियाई भारत में गोवा और मुंबई जैसे शहरों में खूब सक्रिय हैं. खबरों के मुताबिक इसके बदले में दाऊद बोको हरम को अत्याधुनिक हथियार पहुंचा रहा है.
सूत्रों के मुताबिक दाऊद इब्राहिम भारत आना चाहता था लेकिन शर्तों के साथ. उसकी पहली और सबसे बड़ी शर्त थी कि वह सिर्फ मुंबई बम ब्लास्ट के केस में आरोपी रहेगा.
दाऊद एक वक्त आत्मसमर्पण करना चाहता था!
कुछ दिन पहले खबर आई कि मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद दाऊद सरेंडर करना चाहता था. सीबीआई के तत्कालीन डीआईजी नीरज कुमार के हवाले से एक अखबार ने यह दावा किया. अखबार के मुताबिक दाऊद इब्राहिम ने आत्मसमर्पण करने का फैसला कर लिया था, लेकिन सीबीआई के शीर्ष अधिकारियों ने ऐसा नहीं होने दिया. बवाल होने पर नीरज कुमार ने इस बात से पल्ला झाड़ लिया.
हालांकि सूत्र बताते हैं कि दाऊद इब्राहिम भारत आना चाहता था लेकिन शर्तों के साथ. उसकी पहली और सबसे बड़ी शर्त थी कि वह सिर्फ मुंबई बम ब्लास्ट के केस में आरोपी रहेगा. दाऊद सिर्फ इसी केस में मुकदमे का सामना करना चाहता था. बाकी मामलों में वह बरी होना चाहता था. दाऊद को भारत लाने के लिए दिल्ली से मुंबई तक सीबीआई कोशिश कर रही थी. दिल्ली में इस काम को संयुक्त निदेशक शांतनु सेन देख रहे थे. मुंबई में डीआईजी नीरज कुमार तफ्तीश कर रहे थे. नीरज कुमार और शांतनु सेन को साफ निर्देश दिया गया था कि दाऊद से बातचीत होगी लेकिन समझौता नहीं होगा. यानी अगर वह भारत आएगा तो उसे सभी मुकदमों में मुजरिम की तरह पेश होना होगा. उसकी गिरफ्तारी होगी.
अमेरिका की भृकुटि तनने के बाद पाकिस्तान पर दाऊद को लेकर दबाव बढ़ गया है. हालांकि वह अमेरिका को समझाने की कोशिश करता रहता है कि दाऊद बड़ा अपराधी है लेकिन आतंकवादी नहीं.
इसके बाद दाऊद डर गया. तब उसने खुद को बचाने के लिए देश के मशहूर वकील राम जेठमलानी से भी संपर्क किया था. जेठमलानी उस वक्त लंदन में थे. दाऊद से बात करने के बाद राम जेठमलानी ने महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार से इस बाबत बात की थी. शरद पवार ने भी मना कर दिया. दाऊद ने समझौते की शर्तें रखी थीं. सीबीआई इन्हें मानने के लिए तैयार नहीं थी. माना जाता है कि इसीलिए देश का सबसे मोस्ट वांटेड अपराधी आज भी कानून के शिकंजे से दूर है.
कहां रह रहा है दाऊद?
खुफिया एजेंसियों का कहना है कि दाऊद अब भी पाकिस्तान में है लेकिन जब तक इस मामले में पाकिस्तान सरकार कोई मदद नहीं करती तब तक उसे पकड़ा नहीं जा सकता. वहां रह रहे दाऊद की तीन संतानें हैं. एक बेटा और दो बेटियां. बेटे का नाम मोइन इब्राहिम है जबकि बेटियों के नाम हैं माहरुख और माहरीन. माहरुख की शादी पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर जावेद मियांदाद के बेटे जुनैद से हुई है. बीते अगस्त में खबरें आई थीं कि ईद के मौके पर दाऊद पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर क्वालात गलूजई कस्बे की मस्जिद में दिखा. यहां उसे नमाज पढ़ते देखा गया. बताते हैं कि नमाज अदा करने के बाद दाऊद कबीलाई इलाके पैतिरका की तरफ चला गया था. सूत्रों के मुताबिक खुफिया एजेंसियों ने दाऊद की ये तस्वीरें गृह मंत्रालय को भेजी थीं.
हालांकि दाऊद पर अमेरिका की भृकुटि तनने के बाद पाकिस्तान भी परेशान है. उस पर दबाव बढ गया है कि वह दाऊद को ढूंढ निकाले. यह दबाव कम करने के लिये उसने अमेरिका को कई बार यह समझाने की कोशिश की है कि दाऊद एक बड़ा अपराधी है लेकिन आतंकवादी नहीं. माना जाता है कि यही वजह है कि अमेरिका दाऊद के खिलाफ उतने जोर-शोर से अभियान नहीं चला पाया. बीच में यह खबर भी आई थी कि दाऊद कजाकिस्तान पहुंच गया है. यह इलाका नशीले पदार्थों की गतिविधियों के लिये काफी सुरक्षित माना जा रहा है.
अगस्त 2013 में शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने कहा था कि अगर नरेंद्र मोदी देश के पीएम बनते हैं तो दाऊद इब्राहिम को भारत लाएंगे और फांसी पर लटका देंगे. ठाकरे ने यह बात अपने शिवसेना के मुखपत्र सामना में कही थी.  उन्होंने कहा था कि अगर मोदी के पास सरदार पटेल की तरह शक्ति आ जाती है तो उन सभी लोगों को जेल में डाल दिया जाएगा, जिन्होंने देश को लूटा है. एक साल बाद उसी शिवसेना ने हरिभाई चौधरी के जवाब के बाद विरोधियों से पहले ही भाजपा पर हमला बोल दिया. सामना में छपे एक आलेख में कहा गया कि यह रुख गृहमंत्रालय की कमजोरी को सामने लाता है और इससे दाऊद के पाकिस्तान में होने को लेकर सरकार के पहले वाले दावे खारिज हो जाते हैं.
(नौ मई 2015 को प्रकाशित यह लेख 22 अगस्त 2015 को संपादित किया गया है)