कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार के भू अधिग्रहण विधेयक पर हमला और तेज कर दिया है. पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी सरकार को भूमि अधिग्रहण पर कानून बनाने में दो साल लगे थे जबकि एनडीए सरकार ने आनन-फानन में इसे खत्म कर दिया. राहुल का कहना था, 'हमने कहा कि अगर किसी से जमीन ली जा रही है तो उस गरीब से उसकी मर्जी पूछी जाए लेकिन आपने कहा कि हम जमीन मालिक की मर्जी नहीं पूछेंगे.' एनडीए सरकार पर कंज कसते हुए राहुल ने कहा, 'पहले चोर रात में चोरी किया करते थे अब वे दिन में सूटबूट पहनकर आते हैं.' उन्होंने यह भी कहा कि इस बिल का संसद से सड़क तक विरोध किया जाएगा.
विपक्षी पार्टियों के जोरदार विरोध के चलते भू अधिग्रहण विधेयक पर मोदी सरकार मुश्किलों में घिरी है.
गौरतलब है कि भू अधिग्रहण विधेयक को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पिछले कुछ समय से काफी मुश्किलों का सामना कर रही है. पहले उसने इस पर जरा भी न झुकने वाला रुख दिखाया था. विपक्ष के भारी विरोध के बात उसने अपना रुख थोड़ा नरम करने का संकेत दिया. लेकिन विपक्ष को अब भी इस विधेयक के कई प्रावधानों पर ऐतराज है. भू अधिग्रहण भारत में एक संवदेनशील मसला रहा है. प. बंगाल के नंदीग्राम और सिंगूर में इस मुद्दे पर जो विरोध शुरू हुआ था उसकी परिणति राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ हुई. यही वजह है कि संसद में विपक्षी पार्टियां इस विधेयक पर मोदी सरकार को घेरने की पूरी कोशिश में हैं.
फिर भूकंप, अलग-अलग राज्यों में 18 मौतें
दिल्ली-एनसीआर सहित पूरे उत्तर भारत को भूकंप ने फिर हिलाकर रख दिया है. मंगलवार को आए भूकंप के छह झटकों का असर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश तक महसूस किया गया. इससे देश के अलग-अलग हिस्सों में 18 लोगों के मारे जाने की खबर है. भूकंप का केंद्र काठमांडू से 82 किलोमीटर दूर नेपाल-चीन सीमा पर था. इससे पहले 25 अप्रैल को आए भूकंप में भी भारत के विभिन्न राज्यों में 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. इनमें सबसे ज्यादा बिहार से थे. गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भूकंप के इन झटकों के मद्देनजर राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) को सतर्क कर दिया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि वे आगे की कार्ययोजना को लेकर जल्द ही वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक करेंगे.
एनजेएसी पर केंद्र को झटका, पांच सदस्यीय खंडपीठ ही करेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को नौ या 11 सदस्यीय संविधान पीठ को भेजने से इनकार कर दिया है. केंद्र सरकार ने यह अनुरोध किया था जिसे न्यायमूर्ति जेएस केहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने ठुकरा दिया. संविधानपीठ ने कहा कि वह पहले याचिकाओं के गुण-दोषों पर सभी पक्षों की दलीलें सुनेगी और उसके बाद जरूरत हुई तो इसे वृहद संविधान पीठ को भेजा जाएगा.
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति और तबादलों के लिए एनजेएसी कानून 2014 और उससे संबंधित 99वें संविधान संशोधन को शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई है जिस पर सुनवाई चल रही है. सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति की नई व्यवस्था देने वाले राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) का गठन होना था जो फिलहाल लटका हुआ है. मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू ने लंबित याचिकाओं का निपटारा होने तक एनजेएसी के गठन के लिए दो प्रतिष्ठित व्यक्तियों के चयन की बैठक में हिस्सा लेने से मना कर दिया था. 20 साल से चली आ रही कोलेजियम व्यवस्था समाप्त कर न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए एनजेएसी का गठन होना है. लेकिन एनजेएसी की वैधानिकता को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं. इस मामले पर न्यायमूर्ति जेएस केहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ सुनवाई कर रही है.