बीती आठ जुलाई की बात है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मीडिया से बातचीत के दौरान घाेषणा की कि उनकी सरकार अब राज्य में वैसी तमाम फर्ज़ी ख़बरों से निपटने का इंतज़ाम कर रही है जो राज्य का माहौल बिगाड़ने का काम करती हैं. उनका इशारा उन खबरों से था जिन्होंने बदूरिया में पिछले दिनों हुए दंगे भड़काने में अहम भूमिका निभाई. ममता बनर्जी ने इसके साथ ही कुछ उदाहरण भी गिनाए. मसलन- कोमिला, बांग्लादेश में हुई एक घटना और किसी भोजपुरी फिल्म की वीडियो क्लिप को सोशल मीडिया पर इस तरह पेश किया गया जैसे वे घटनाएं बंगाल में हो रही हों. फिर उन्होंने कहा, ‘फेसबुक के नाम पर फेकबुक को हवा दी जा रही है. मैं फेसबुक का सम्मान करती हूं. लेकिन फेकबुक का नहीं. उसे इजाज़त नहीं दे सकती.’

ममता बनर्जी का यह बयान उत्तर-24 परगना जिले के बदूरिया में हुई सांप्रदायिक हिंसा की पृष्ठभूमि में आया था. इस हिंसा की शुरुआत दो जुलाई को हुई एक घटना से हुई. बताया जाता है कि किसी लड़के ने अपनी फेसबुक वॉल पर पैगंबर मोहम्मद का आपत्तिजनक कार्टून अपलोड कर दिया. इससे गुस्साए मुस्लिम समुदाय ने पूरे इलाके में भारी फसाद किया. इस फसाद को हवा देने में सोशल मीडिया ने भी अहम भूमिका निभाई. उसके बाद फर्ज़ी ख़बरों की जैसे बाढ़ सी आ गई. इनमें हिंसा की गंभीरता को बढ़-चढ़ाकर तो बताया ही गया हिंदुओं पर ऐसे हमलों के झूठे दावे भी किए गए जो कि वास्तव में हुए ही नहीं थे.

उदाहरण के लिए पांच जून को एबीपी न्यूज़ ने इसी तरह की एक फर्ज़ी ख़बर का भंडाफोड़ किया. इसमें बताया गया था कि एक हिंदू महिला को मुस्लिमों की भीड़ ने किस बेदर्दी से पीट-पीटकर मार दिया. जबकि समाचार चैनल की मानें तो वह महिला हिंदू नहीं मुस्लिम ही थी और उस घटना का भी सांप्रदायिक उन्माद से कोई लेना-देना नहीं था. उस महिला को बच्चा चोरी के आरोप में पीटा गया था. इसी तरह फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट आल्टन्यूज़ डॉट इन ने भी कुछ अन्य झूठी ख़बरों की सच्चाई का ख़ुलासा किया.

ट्विटर पर पोस्ट की गई यह नीचे बताई ख़बर भी ऐसी ही थी. यह तस्वीर असल में बांग्लादेश की थी. लेकिन इसे इस तरह पेश किया गया कि बदूरिया के जिस लड़के ने पैगंबर मोहम्मद का आपत्तिजनक कार्टून फेसबुक पर डाला है यह उसी के माता-पिता की तस्वीर है जिन्हें बिना अपराध के ही फसादियों ने सज़ा दे दी. जबकि उस लड़के के पड़ोसियों ने स्क्रोल डॉट इन को बताया कि उसकी मां का देहांत तो काफी पहले हो चुका है. उस वक्त वह बच्चा ही था.

यह एक अन्य तस्वीर तो बदूरिया दंगों के समय की भी नहीं है. वास्तव में यह 2014 की तस्वीर है. जबकि इसे हैशटैग बशीरहाट के नाम से चलाया गया. बताया गया कि कार्तिक नाम के शख्स को मुस्लिमों ने पीट-पीटकर मार डाला है.

नीचे दी गई इस तस्वीर में बंगाली में लिखा है, ‘बदूरिया में हिंदू महिला को बेइज्जत किया जा रहा है.’ जबकि यह तस्वीर एक भोजपुरी फिल्म की शूटिंग की है. यह तस्वीर भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता विजेता मलिक ने फेसबुक पर पोस्ट की थी.

सांप्रदायिक दंगों के दौरान यौन हिंसा की घटनाएं आग भड़काने में बड़ी भूमिका निभाती हैं. संभवत: यही वज़ह है जिसके चलते ये फर्ज़ी ख़बरें तेजी से सोशल मीडिया पर फैलाई गईं. यहां तक कि लोगों की भावनाओं को भुनाने के लिए राजनेता भी इसमें शामिल हो गए. ख़ास तौर पर भाजपा के नेता. यहां तक पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने भी बहती गंगा में हाथ धो लिए. इस सबके ज़रिए ये नेता अपने इस दावे को पुख़्ता करने की कोशिश ही कर रहे थे कि बदूरिया में ‘हिंदू माताओं-बहनों के साथ कैसे यौन अत्याचार हो रहा है.’

भाजपा की ओर से फर्ज़ी ख़बरों का सिलसिला यहीं नहीं रुका. भाजपा की प्रवक्ता नूपुर शर्मा और पार्टी के एक राष्ट्रीय संयुक्त सचिव तो एक ऐसी तस्वीर को बंगाल की बताते हुए नज़र आए जो वास्तव में 2002 के गुजरात दंगों की थी. वे दंगे जो राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के शासनकाल में हुए थे.

Speak-up because it is already too late! Join in at 5 PM today at Jantar Mantar #SaveBengal #SaveHindus pic.twitter.com/QU5ZT1HkUt

— Nupur Sharma (@NupurSharmaBJP) July 8, 2017

फर्ज़ी ख़बरों के सिलसिले को भाजपा के सूचना-तकनीक विभाग के राष्ट्रीय प्रमुख अमित मालवीय ने भी आगे बढ़ाया. उन्होंने बंगाल में बहुत पहले कभी हुई हिंसा की तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए इस तरह पेश किया जैसे वह बदूरिया-बशीरहाट दंगों की हो.

.@malviyamit Shares a 2015 pic from WB without stating it’s an old pic. cc @WBPolice @KolkataPolicehttps://t.co/wzh9FFTNsP https://t.co/eTf79GHA4v

— BOOM FactCheck (@boomlive_in) July 8, 2017

तिस पर तुर्रा देखिए कि तमाम समाचार स्रोतों से यह पता चलने के बावज़ूद कि भाजपा नेता जो तस्वीरें सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं वे फर्ज़ी और पुरानी हैं, इनमें से किसी ने इन्हें अपने फेसबुक या ट्विटर अकाउंट से डिलीट नहीं किया.

इस पर बंगाल की प्रतिक्रिया क्या रही?

जैसा कि शुरू में ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया के बारे में बताया गया है वैसे ही राज्य के शीर्ष पुलिस अफसरों का रुख़ रहा. उन्होंने सोशल मीडिया पर आम जनता के लिए चेतावनी भरे ऐसे तमाम संदेश डाले जिससे लोग अफवाहों से सचेत रहें. कुछ सख़्त कार्रवाई भी की गई. जैसे- कोलकाता पुलिस ने उस व्यक्ति को ग़िरफ्तार भी किया जिसने भोजपुरी फिल्म की शूटिंग की तस्वीर को बदूरिया की घटना से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था.

One rumour-monger arrested by KP for morphing Bhojpuri film scene to spread hate. Rumour-mongers won’t be spared. Peace first.

— Kolkata Police (@KolkataPolice) July 8, 2017

इसके अलावा राज्य सरकार ने घोषणा की कि वह पूरे प्रदेश में 60,000 शांति समितियां गठित कर रही है. सरकार को उम्मीद है कि ये समितियां फर्ज़ी ख़बरों पर सबसे पहले प्रतिक्रिया देंगी. साथ ही ज़रूरी कार्रवाई करेंगी. ताकि किसी इलाके में अगर तनाव बढ़ने की संभावना भी नज़र आए तो उसे समय रहते निर्मूल किया जा सके.

यानी सोशल मीडिया पर लगातार फैलने वाली ख़बरों से निपटने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने अगर गंभीरता से कार्रवाई शुरू की है तो वह उचित ही कही जा सकती है. क्योंकि पिछले कुछ समय में राज्य में हुई हिंसा की घटनाओं को भड़काने में सोशल मीडिया ने बड़ी भूमिका निभाई है.